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श्रीश्रृंगगिरिपीठाधिष्ठित श्रीनरहरिसच्चिदानन्दभारतीगुरुस्तोत्रम्

श्रीश्रृंगगिरिपीठाधिष्ठित श्रीनरहरिसच्चिदानन्दभारतीगुरुस्तोत्रम्

स्वामि श्री भारतीकृष्णतीर्थ यांनी जी देवदेवतांवी स्तुती केली आहे, अशी क्वचितच् इतरांनी कोणी केली असेल.


श्रीश्रृंगगिरिपीठाधिष्ठित श्रीनरहरिसच्चिदानन्दभारतीगुरुस्तोत्रम् [ मात्रिकं दण्डकम् ]
कनकमहामणिकलित - किरीटावेणाङ्कास्यौ
नाशितनिखिलश्रितकष्टौ
दिनकरकनकच्छविनिजकायौ शोणाब्ज -
पदौ दत्तानम्रजनाभीष्टौ ॥
वीनप्रभुहररूपौ हरिसुतबाणाभेद्यौ
मोक्षाकाङ्क्षिव्रजजुष्टौ
भारतिरत्ने कलये नरहरिसच्चित्सुखशिव -
नूतननरहरि - भारत्यौ ॥१॥

Translation - भाषांतर
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References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:56:10.0370000

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विदर्भ IV.

  • n. एक लोकसमूह, जिसे सहदेव ने अपने दक्षिणदिग्विजय के समय जीता था [म. स. २८.४१] । इस लोकसमूह में उत्पन्न निम्नलिखित व्यक्तियों का निर्देश महाभारत में प्राप्त हैः- भीष्मक, दमयंती [म. व. ५०-२१]; भीम, जो दमयन्ती का पिता था; रुक्मिणी, जो भीष्मक राजा की कन्या थी; रुक्मिन्, जो भीष्मक राजा का पुत्र था । 
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Category : Hindu - Traditions
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