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श्रीत्रयोदश्यां श्रीरत्यजस्तुति:

श्रीत्रयोदश्यां श्रीरत्यजस्तुति:

स्वामि श्री भारतीकृष्णतीर्थ यांनी जी देवदेवतांवी स्तुती केली आहे, अशी क्वचितच् इतरांनी कोणी केली असेल.


श्रीत्रयोदश्यां श्रीरत्यजस्तुति:
अवाप्तगिरिजन्यनुग्रहभरौ जगज्जित्वरौ
भुजङ्गशयनस्नुषातनुजनी रमातोषकौ ।
स्वकान्तिजितभर्मवार्धररुची मनुन्द्रेडितौ
सुरासुरनमस्कृतस्वचरणौ भजे रत्यजौ ॥१॥

Translation - भाषांतर
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References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:55:55.0830000

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करंधम II.

  • n. (सू. दिष्ट.) भागवत तथा वायु के मतानुसार खनिनेत्र का पुत्र तथा विष्णु के मतानुसार अतिभूतिपुत्र । अवीक्षित राजा का पिता तथा मरुत्त राजा का पितामह [म.अनु.१३७.१६] । इसका मूल नाम सुवर्चस् था । करंधम नाम प्रचलित होने का कारण यह है । एक बार अनेक राजाओं ने मिल कर इसे अत्यंत त्रस्त किया । तब इसने अपने हस्त कंपित कर के सेना उत्पन्न की तथा सब का पराभव किया [म. आश्व.४.९-१६] । इसे कालभीति ने उपदेश किया था [स्कंद.१.२.४०-४२] । महाभारत में तथा मार्कडेय में बलाश्व पाठभेद मिलता है [मार्क.११.८,२१] 
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जेवण उष्टे सोडून अन्नाचा अपमान करणार्याला विविध शास्त्र, पुराणात काय शिक्षासांगितली आहे कृपाया संदर्भासह स्पष्ट करणे .
Category : Vedic Literature
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