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श्रीवरुणास्तुति: [ प्रमिताक्षरा ]

श्रीवरुणास्तुति: [ प्रमिताक्षरा ]

स्वामि श्री भारतीकृष्णतीर्थ यांनी जी देवदेवतांवी स्तुती केली आहे, अशी क्वचितच् इतरांनी कोणी केली असेल.


श्रीवरुणास्तुति: [ प्रमिताक्षरा ]
यमितुष्टरागजितधीविमुख श्रितरुगेजराह सुरपूज्यपद ।
नतवाग्धनापजितजीवजनेड् जलनाथ पाहि करुणाजलधे ॥१॥
गिरिजाधवाहिशयनप्रवणप्रणताधनाश नृपवैभवद ।
शुकमुख्यगीतकनकाभतनो जलनाथ पाहि निखिलाज ( लज्ञ ) नते ॥२॥
पुरुषार्थदातरखिलेप्सितद परतत्त्वरूप कलिदन्तिहरे ।
अपमृत्युहर्तरमृताधिपते जलनाथ पाहि हृतदैत्यतते ॥३॥
यनिवन्दिताङ्घ्रियुगपाशधर शममुख्यदादिविबुधाधिपते ।
मतिरोधमुख्यद निखिलश्रमह जलनाथ पाहि नतपापसह ॥४॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2016-11-11T11:56:07.4130000

Comments | अभिप्राय

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भोज IV.

  • n. एक राजवंश, जो सुविख्यात यादवकुल में अंतर्गत था [म.आ.२१०.१८] । इन्हे वृष्णि, अंधक, आदि नामांतर भी प्राप्त थे । इस वंश में उत्पन्न एक राजा को उशीनर से एक खङ्ग के प्राप्ति हुई थी [म.शां.१६६.८९] । संभव है, इस वंश में निम्नलिखित राजा समाविष्ट थेः---(१) विदर्भाधिपति भीष्म---इसे महाभारत में भोज कहा गया है [म.उ.१५५.२] । (२) कुकुरवंशीय आहुक---इसे हरिवंश में भोज कहा गया है [ह.वं.१.३७.२२] । (३) विदर्भाधिपति रुक्मिन्---इसने ‘भोजकट’ (भोजों का नगर) नामक नयी राजधानी की स्थापना की थी (रुक्मिन् देखिये) । (४) महाभोज---यह यादववंशीय सात्वत राजा का पुत्र था । भागवत के अनुसार इसके वंशज भोज कहलाते थे [भा.९.२४.७-११] 
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