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पंचरत्नगीता
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - श्रीगीतामाहात्म्य
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः १
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः २
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ३
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ४
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ५
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ६
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ७
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ८
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ९
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः १०
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पंचरत्नगीता - अध्यायः ११
श्रीमद्भगवद्गीतामाहात्म्यम्
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पस्पषाह्निक
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग २
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ३
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ४
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ५
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ६
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ७
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ८
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ९
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १०
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग ११
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १२
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १३
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १४
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पस्पषाह्निक - भाग १५
पस्पषाह्निक संस्कृतमधील एक दुर्मिळ ग्रंथ आहे.
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पतज्जलिचरितम् ।
भारतीय साहित्यात पतंजलिने लिहिलेले ३ मुख्य ग्रन्थ मिळतात - योगसूत्र, अष्टाध्यायी वर भाष्य आणि आयुर्वेदावर ग्रन्थ.
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पतज्जलिचरितम् । प्रथम सर्ग: ।
श्रीरामभद्रदीक्षितप्रणीतं पतज्जलिचरितम् ।भारतीय साहित्यात पतंजलिने लिहिलेले ३ मुख्य ग्रन्थ मिळतात - योगसूत्र, अष्टाध्यायी वर भाष्य आणि आयुर्वेदावर ग्रन्थ.
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पतज्जलिचरितम् । व्दितीय: सर्ग: ।
श्रीरामभद्रदीक्षितप्रणीतं पतज्जलिचरितम् ।भारतीय साहित्यात पतंजलिने लिहिलेले ३ मुख्य ग्रन्थ मिळतात - योगसूत्र, अष्टाध्यायी वर भाष्य आणि आयुर्वेदावर ग्रन्थ.
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पतज्जलिचरितम् । तृतीय: सर्ग: ।
श्रीरामभद्रदीक्षितप्रणीतं पतज्जलिचरितम् ।भारतीय साहित्यात पतंजलिने लिहिलेले ३ मुख्य ग्रन्थ मिळतात - योगसूत्र, अष्टाध्यायी वर भाष्य आणि आयुर्वेदावर ग्रन्थ.
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पतज्जलिचरितम् । चतुर्थ: सर्ग: ।
श्रीरामभद्रदीक्षितप्रणीतं पतज्जलिचरितम् ।भारतीय साहित्यात पतंजलिने लिहिलेले ३ मुख्य ग्रन्थ मिळतात - योगसूत्र, अष्टाध्यायी वर भाष्य आणि आयुर्वेदावर ग्रन्थ.
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प्रबोधसुधाकरः
भारतीय संस्कृतिच्या विकासात आद्य शंकराचार्यांचे विशेष योगदान आहे.
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प्रबोधसुधाकरः - देहनिन्दाप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - विषयनिन्दाप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - मनोनिन्दाप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - विषयनिन्दाप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - मनिनिग्रहप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - वैराग्यप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - आत्मसिद्धिप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - मायासिद्धिप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - लिङ्गदेहादिनिरूपणप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - अद्वैतप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - कर्तृत्वभोक्तृत्वप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - स्वप्रकाशताप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - नादानुसन्धानप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - मनोलयप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - प्रबोधप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - द्विधाभक्तिप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - ध्यानविधिप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - सगुणनिर्गुणयोरैक्यप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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प्रबोधसुधाकरः - आनुग्रहिकप्रकरणम्
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रबोधसुधाकरः
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रत्नावली
‘रत्नावली’ नाटकात हर्षाने प्राकृत भाषांपैकी शौरसेनीचा मुख्यत्वेंकरून उपयोग केला आहे.
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रत्नावली - प्रथमोऽङकः
‘ रत्नावली’ नाटकात हर्षाने प्राकृत भाषांपैकी शौरसेनीचा मुख्यत्वेंकरून उपयोग केला आहे.
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रत्नावली - द्वितीयोऽङकः
‘ रत्नावली’ नाटकात हर्षाने प्राकृत भाषांपैकी शौरसेनीचा मुख्यत्वेंकरून उपयोग केला आहे.
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रत्नावली - तृतीयोऽङक्
‘ रत्नावली’ नाटकात हर्षाने प्राकृत भाषांपैकी शौरसेनीचा मुख्यत्वेंकरून उपयोग केला आहे.
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रत्नावली - चतुर्थोङ्कः
‘ रत्नावली’ नाटकात हर्षाने प्राकृत भाषांपैकी शौरसेनीचा मुख्यत्वेंकरून उपयोग केला आहे.
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पाञ्चरात्रागमः - प्रथमपरिच्छेदः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - प्रथमोध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - द्वितीयोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - तृतीयोध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - चतुर्थोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - पञ्चमोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - षष्ठोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - सप्तमोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - अष्टमोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - नवमोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - दशमोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - एकादशोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - द्वादशोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - त्रयोदशोध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - चतुर्दशोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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प्रथमपरिच्छेदः - पञ्चदशोऽध्यायः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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पाञ्चरात्रागमः
'पाञ्चरात्रागमः' एक उत्कृष्ट रचना.
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साङ्ख्यकारिका
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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साङ्ख्यकारिका - कारिका १-१५
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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साङ्ख्यकारिका - कारिका १६-३०
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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साङ्ख्यकारिका - कारिका ३१-४५
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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साङ्ख्यकारिका - कारिका ४६-६०
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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साङ्ख्यकारिका - कारिका ६१-७२
साङ्ख्यकारिका ग्रंथ ईश्वरकृष्ण यांनी लिहीलेला असून अतिशय चिंतन करण्याजोगा आहे.
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सारस्वत चम्पू
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग १
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग २
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ३
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ४
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ५
सारस्वत चम्पूसर्ग ५
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ६
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ७
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ८
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ९
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग १०
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग ११
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - सर्ग १२
सारस्वत चम्पू
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सारस्वत चम्पू - स्तवन
सारस्वत चम्पू
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सौंदर्यलहरी
आद्य शंकराचार्यांनी शिव आणि शक्ति उपासनेच्या विविध रूढ पद्धतीत स्वतंत्र अशा अध्यात्मप्रवण दृष्टीने ‘ सौंदर्यलहरी ‘ या स्तोत्राची रचना केलेली आहे शिवाय यातील प्रत्येक श्लोक मंत्रस्वरूप आहे.
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सौंदर्यलहरी - प्रस्तावना
आद्य शंकराचार्यांनी शिव आणि शक्ति उपासनेच्या विविध रूढ पद्धतीत स्वतंत्र अशा अध्यात्मप्रवण दृष्टीने ‘ सौंदर्यलहरी ‘ या स्तोत्राची रचना केलेली आहे शिवाय यातील प्रत्येक श्लोक मंत्रस्वरूप आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक १ ते १०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ११ ते २०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक २१ ते ३०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ३१ ते ४०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ४१ ते ५०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ५१ ते ६०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ६१ ते ७०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ७१ ते ८०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ८१ ते ९०
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौन्दर्यलहरी - श्लोक ९१ ते १००
आदि शंकराचार्यांनी भगवान् शंकर आणि भगवती यांच्या आज्ञेनुसार वेदांतील शताक्षरी महाविद्येचे विवरण १०० श्लोकांत केले आहे.
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सौत्रामणी
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः १
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः २
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ३
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ४
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ५
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ६
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ७
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ८
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ९
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः १०
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः ११
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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सौत्रामणी - अनुवाकः १२
पूर्व दिशाचे एक नाव ज्याचा स्वामी इंद्र आहे, त्याच्या प्रीत्यर्थ केला जाणारा एक प्रकारचा यज्ञ.
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व्यासशिक्षा
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षाप्रकरणसूची
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - संज्ञाप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - प्रग्रहप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - परिभाषाप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - दीर्घप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - आगमप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - लोपप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - वैकृतप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - षत्वप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - णत्वप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - रेफप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - विसर्जनीयसन्धिप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - यत्वप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - अच्सन्धिप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - अनैक्यप्रकरणम्
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व्यासशिक्षा - ऐक्यप्रकरणम्
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व्यासशिक्षा - स्वरधर्मस्वरूपप्रकरणम्
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व्यासशिक्षा - स्वरसन्धिप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - हस्तस्वरविन्यासप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - द्वित्वप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - पूर्वारमप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - द्वित्वनिषेधप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - अङ्गसंहिताप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - स्वरभक्तिप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - स्थानकरणप्रयत्नप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - प्लुतप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - ओष्ठ्यप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - कालनिर्णयप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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व्यासशिक्षा - उच्चारणफलप्रकरणम्
प्रस्तुत ग्रंथाचा रचनाकाल विभिन्न विद्वानांनी ईसवीसन पूर्व १००० ते ईसवीसन पूर्व ५०० सांगितलेला आहे.
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शिवानन्दलहरी
शिवानंदलहरी में भक्ति-तत्व की विवेचना, भक्त के लक्षण, उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक १ ते ५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ६ ते १०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ११ ते १५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक १६ ते २०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक २१ ते २५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक २६ ते ३०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ३१ ते ३५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ३६ ते ४०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ४१ ते ४५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ४६ ते ५०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ५१ ते ५५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ५६ ते ६०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ६१ ते ६५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ६६ ते ७०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ७१ ते ७५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ७६ ते ८०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ८१ ते ८५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ८६ ते ९०
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ९१ ते ९५
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवानन्दलहरी - श्लोक ९६ ते १००
शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।
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शिवधनुर्वेदः
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ धनुर्वेदः
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ गुणलक्षणानि
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ शरलक्षणानि
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ फललक्षणानि
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ फलपायनम्
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ नाराचनालीकौ
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ स्थानमुष्टयाकर्षणलक्षणानि
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ गुणमुष्टयः
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ धनुर्मुष्टिसंधानम्
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ व्यायाः
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ लक्ष्यम्
शिवधनुर्वेदः
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शिवधनुर्वेदः - अथ अथानध्यायः
शिवधनुर्वेदः
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शिवसंहिता - प्रथम पटल
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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प्रथम पटल - लयप्रकरण १
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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प्रथम पटल - लयप्रकरण २
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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प्रथम पटल - लयप्रकरण ३
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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प्रथम पटल - लयप्रकरण ४
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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प्रथम पटल - लयप्रकरण ५
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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शिवसंहिता - द्वितीय पटल
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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द्वितीय पटल - तत्त्वज्ञानोपदेश १
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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द्वितीय पटल - तत्त्वज्ञानोपदेश २
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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शिवसंहिता - तृतीय पटल
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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तृतीय पटल - योगानुष्ठानपद्धतिर्योगाभ्यासवर्णन १
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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तृतीय पटल - योगानुष्ठानपद्धतिर्योगाभ्यासवर्णन २
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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तृतीय पटल - योगानुष्ठानपद्धतिर्योगाभ्यासवर्णन ३
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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तृतीय पटल - योगानुष्ठानपद्धतिर्योगाभ्यासवर्णन ४
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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तृतीय पटल - योगानुष्ठानपद्धतिर्योगाभ्यासवर्णन ५
महायोगी आदिनाथ श्रीमहादेव विरचित " शिवसंहिता " हा ग्रंथ देवी पार्वतीने विचारलेले प्रश्न व त्या प्रश्नांना श्रीशिवांनी दिलेली उत्तरे या प्रश्नोत्तरांच्या रूपाने अवतरित झाला आहे.
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