संस्कृत सूची|पूजा विधीः|प्रतिष्ठारत्नम्|
वेदादि होम

वेदादि होम

सर्व पूजा कशा कराव्यात यासंबंधी माहिती आणि तंत्र.


वेदादि होम :--- यह होम एख कुंड हो तो न करें । पोंचया नव कुंड हो तो पलाश समिधा, घृत वा तिल से आचार्यकुंड को  छोडक अन्य चार कुंडो में १००८ या १०८ अहुति दें । घी की आहुति देते हो तो आज्य संपात पास रखें शांतिकलशमें करें ।
पूर्वकुंड में :--- ॐ अग्निमीळे० दक्षिण कुंड में - ॐ इषेत्वोर्जेत्वा० पश्चिमकुंड में - ॐ अग्न आयाहि० उत्तरकुंड में - ॐ शन्नोदेवी० अगर नवकुंड हो तो

अग्निकोणकुंड में - ॐ वैषट्‌ स्वाहा ।

नैऋत्यकोणकुंड में :--- ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ तत्सवितु. प्रचोदयात्‌ स्वाहा
वायव्यकोणकुंड में :--- ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निरदहातिवेद: । स न: पर्षदतिदुर्गाणि विश्वा नावेव सिंन्धुं दुरितात्यग्नि: स्वाहा ।

ईशानकोणकुडमें :--- ॐ ब्रम्हाजज्ञानं प्रथमं. सतश्व विव: स्वाहा ।
आचार्यकुंड में :--- ॐ मूर्धानंदिवो. देवा: स्वाहा । एक आहुति दें ।
 
स्थाप्यदेवता होम :--- जितनी प्रतिमाकी प्रतिष्ठा करनी हो उन के मंत्र से समिधा, घी अथवा तिलकी १००८ या १०८ आहुति दें । ध्वज, शिखर, वाहन अदि के लिए भी होम करें ।

ध्वज :--- ॐ केतुं कृण्‌वन्नकेतवे० कलश - ॐ आजिघ्र कलशं०

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Last Updated : May 24, 2018

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