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दिलका दिलभर जलदी मिलावरी ...

लावणी - दिलका दिलभर जलदी मिलावरी ...

शाहीर प्रभाकर महाराष्ट्रातील कवी मंडळातील शाहीर कवी म्हणून ओळखले जातात.


दिलका दिलभर जलदी मिलावरी ।

नहि तो लाव अफीम खिलावरी ॥ध्रु०॥

प्यारे हाय तेरा ध्यान लगारे ।

रो रो हो रह नैन अंगारे प्यारे ॥

रूठ गये क्यों दे के दगारे ।

मूंसे क्या तुस पास मंगारे प्यारे ॥

भेजु हलकारे कोन जगारे ।

बडे जगुतसे जुग जुगारे प्यारे ॥चाल॥

उठगये बहिरी बाज शिकारे ॥

क्यौरे लंबा बहुत झुकारे ।

एक वख्त बदनकु दिखारे ॥

येहे अर्ज लिकाके दिलावरा ॥१॥

नहि नींद पलंगपर बहेना ।

दिन रयन कहा लग सहेना ॥

उस बिन किस दुख कहेना ।

अबक्यारे चुपी घर रहेना ॥

हक नाहक बजाकर गहेना ।

परदेस गये छोड मइना ॥चाल॥

जीका जंगल देख बनाती । नही पानी गरम कर न्हाती ॥

यही दर्दसे जान भुजाती । थंड पानी गुलाबका पिलावरी ॥२॥

काही साजण छल बटाऊ । कर कर अर्ज किसेरी बिठाऊ ॥

सोया है क्या जाके उठाऊ । नई सवार तेजी हठाऊ ॥

लाव खंजिर सिर कटाऊ । धन दौलत अपनि लुटाऊ ॥चाल॥

पिहू खातर तन तरसाती ।

आये नगीच दिन बरसाती ॥ मुझे छोड कहा रहे साती ॥

मत लौंडि झुला ते हलावरी ॥३॥

देख देख हमारा बियारी । गुरु ग्यान खुदाने दियारी ॥

सबसाज फुलोरी कियारी । झोली मार बगलमे लियारी ॥

अबहै चलने की तयारी । घर घर धुंड निकालू मियारी ॥चाल॥

गंगु हैबती नाम जगाते । डफके उपर बिर्द लगाते ॥ महादेव गुनिजन गाते ।

जा दौड प्रभाकर बुलावरी ॥ दिलका दिलभर जलदी मिलावरी ॥४॥

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Last Updated : January 11, 2008

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