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  • विश्वकर्मप्रकाश - अध्याय पहला
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक १ से २०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक २१ से ४०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक ४१ से ६०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक ६१ से ८०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक ८१ से १००
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय पहला - श्लोक १०१ से १२८
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • विश्वकर्मप्रकाश - अध्याय दूसरा
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १ से २०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक २१ से ४०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक ४१ से ६०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक ६१ से ८०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक ८१ से १००
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १०१ से १२०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १२१ से १४०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १४१ से १६०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १६१ से १८०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय दूसरा - श्लोक १८१ से १९७
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • विश्वकर्मप्रकाश - अध्याय तीसरा
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
  • अध्याय तीसरा - श्लोक १ से २०
    देवताओंके शिल्पी विश्वकर्माने, देवगणोंके निवासके लिए जो वास्तुशास्त्र रचा, ये वही ’ विश्वकर्मप्रकाश ’ वास्तुशास्त्र है ।
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: Folder : Page : Word/Phrase : Person


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चुडी

  • स्त्री. बांगडी . चुडा पहा . [ तु . हिं . चुरी ] 
  • स्त्री. अंधार्‍या रात्री उजेडाकरितां सणकाडया , माडाच्या झांपांची शिंगे इ० कांची जुडी पेटवून केलेली दिवटी ; चुडणी ; पेटविलेली गवताची पेंढी , जुडी . क्षणार्धात जिकडे तिकडे चुंडया पेटून उजेड झाला - स्वप . [ जुडी ; दे . चुडुली ] 
  • स्त्री. ( बा . ) शिजविण्याची क्रिया . 
  • ०पुनव स्त्री. माघ शुध्द पौर्णिमा . कोंकणांत ह्या दिवशीं होळीस सुरवात होते . ह्यादिवशी रात्रीं चंद्रासमोर व गांवाच्या सीमेची खूण दर्शविणार्‍या देवाभोंवतीं , दगडाभोंवती चुडया , दिवटया फिरवितात . [ चुडी + पुनव ] 
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