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श्री वादिराज तीर्थ कृतम् ...

कृष्णाष्टक - श्री वादिराज तीर्थ कृतम् ...

देवी देवतांची अष्टके, आजारपण किंवा कांही घरगुती त्रास होत असल्यास घरीच देवासमोर म्हणण्याची ईश्वराची स्तुती होय.
Traditionally,the ashtakam is recited in homes, when some one has health or any domestic problems.


कृष्णाष्टकम्
श्री वादिराज तीर्थ कृतम् ॥
अथ श्री कृष्णाष्टकम् ॥
मध्वमानसपद्मभानुसमम् स्मर प्रतिसंस्मरम् स्निग्धनिर्मलशीतकान्तिलसन्मुखम् करुणोन्मुखम् । हृदयकम्बुसमानकन्धरमक्षयम् दुरितक्षयम् स्निग्धसंस्तुत रौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥१॥
अंगदादिसुशोभिपाणियुगेन सम्क्षुभितैनसम् तुंगमाल्यमणीन्द्रहारसरोरसम् खलनीरसम् । मङ्गलप्रदमन्थदामविराजितम् भजताजितम् तम् गृणेवररौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥२॥
पीनरम्यतनूदरम् भज हे मनः शुभ हे मनः स्वानुभावनिदर्शनाय दिशन्तमार्थिशु शन्तमम् । आनतोस्मि निजार्जुनप्रियसाधकम् खलबाधकम् हीनतोज्झितरौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥३॥
हेमकिंकिणिमालिकारसनांचितम् तमवंचितम् रत्नकांचनवस्त्रचित्रकटिम् घनप्रभया घनम् । कम्रनागकरोपमूरुमनामयम् शुभधीमयम् नौम्यहम् वररौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥४॥
वृत्तजानुमनोजजंघममोहदम् परमोहदम् रत्नकल्पनखत्विशा हृतमुत्तमः स्तुतिमुत्तमम् । प्रत्यहम् रचितार्चनम् रमया स्वयागतया स्वयम् चित्त चिन्तय रौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥५॥
चारुपादसरोजयुग्मरुचामरोच्चयचामरो दारमूर्धजभारमन्दलरंजकम् कलिभंजकम् । वीरतोचितभूशणम् वरनूपुरम् स्वतनूपुरम् धारयात्मनि रौप्यपीठ कृतलयम् हरिमालयम् ॥६॥
शुष्कवादिमनोतिदूरतरागमोत्सवदागमम् सत्कवीन्द्रवचोविलासमहोदयम् महितोदयम् । लक्षयामि यतीस्वरैः कृतपूजनम् गुणभाजनम् धिक्कृतोपमरौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥७॥
नारदप्रियमाविशाम्बुरुहेक्क्षणम् निजलक्षणम् द्वारकोपमचारुदीपरुचान्तरे गतचिन्त रे । (तारकोपमचारुदीपरुचान्तरे गतचिन्त रे । ) धीरमानसपूर्णचन्द्रसमानमच्युतमानम द्वारकोपमरौप्यपीठकृतालयम् हरिमालयम् ॥८॥
फल-श्रुतिः रौप्यपीठकृतालयस्य हरेः प्रियम् दुरिताप्रियम् तत्पदार्चकवादिराजयतीरितम् गुणपूरितम् । गोप्यमष्टकमेतदुच्चमुदे मम त्विह निर्मम- (गोप्यमष्टकमेतदुच्चमुदे भवत्विह निर्मम-) प्राप्यशुद्धफलाय तत्र सुकोमलम् हतधीमलम् प्राप्यसौख्यफलाय तत्र सुकोमलम् हतधीमलम् ॥९॥
॥श्री कृष्णार्पणमस्तु ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2018-02-13T21:12:18.5800000

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पोंगा

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