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गारुडी - यारो देखो रे देखो गयबी गा...

भारुड - गारुडी - यारो देखो रे देखो गयबी गा...

भारुड Bharude is a kind of satirical form of presenting the faults of lay human beings. It was started by Eknath who is revered as a saint.

यारो देखो रे देखो गयबी गारुडी आया ॥ध्रु०॥

पहिला पहिला कछु नही देखे । निराकार निजरूपा । अलख हातमो पलख बतावे । माया सगुन रूपा ॥ १ ॥

चल चल चल चल । री री री गा गा गा गा । बा बा बा बा ॥ २ ॥

सात सैली उपर विवेक समला शम दम छोडा । ग्यान ध्यानसो बांधा रुमाल समला सबही जोडा ॥ ३ ॥

अनुभव नगर उपर गाजे विद्या वेद पुराना । सोहं शब्दका बाज्या बाजे नाग सुरस नाना ॥ ४ ॥

एक दो ती मिलाके पांच पंचीस का बाणा । बत्तीस मिलाके तेहतीस होके उसका खाना खाना ॥ ५ ॥

क्षनका हुन्नेर क्षन मोही लाया क्षन मोक्षन जोडे । ऐसा हुन्नेर कहे जनार्दन एकनाथकु थाडे ॥ ६ ॥

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Last Updated : November 10, 2013

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