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  • अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - प्रस्तावना
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासव्रत हेमाद्रि
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासीयार्चव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • श्री अनन्त व्रत
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अनन्त व्रत कथा माहात्म्य
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत पूजन की सामग्री
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत का विधान
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • श्री अनन्त व्रत कथा
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • रेवा कीर्तन
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • स्तुति श्रीनाथजी की
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अन्य व्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति, तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है और अंतरात्मा शुद्ध होती है ।
  • मौनव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • शत्रुनाशकव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षपूजाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षतुलसीदलार्पणव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रमामव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रदक्षिणाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षवर्तिप्रदानव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
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उडाण

  • पु. शेताचा , जमिनीचा एकीकडचा विलग असलेला तुकडा . [ उडणें ] 
  • स्त्री. ( ना . ) उडी ; धांव . [ सं . उड्डान ; प्रा . उड्डण ] 
  • न. १ उठाणु ; गळूं . २ ( ल .) बंड ; उठवलेलेंक काहूर ; उठावणी . ' रोज उठवण्या आणावें म्हणजे या मावल्याचे उडाण फुटेल ' - पेद ६ . १४७ . ( उडणें .) 
  • ०खटोलें न. विमान . 
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