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अतिसारहरव्रत

रोग हनन व्रत - अतिसारहरव्रत

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


अतिसारहरव्रत

( अनुष्ठात - प्रकाश ) - यह रोग कर्मविपारके अनुसार जलाशयादि नष्ट करनेके पापसे या आयुवेंदके १ अनुसार प्रमाणासे अधिक या गरिष्ठ अथवा अत्यन्त पतला या अत्यन्त स्थूल भोजन करने आदिसे होता है । अतिसारीको चाहिये कि वह शौचादिसे निवृत्त होकर ' सौऽग्निरस्मी०' मन्त्रका यथाशक्ति जप करके उसी मन्त्रसे दशांश हवन करे और एकभुक्त व्रत करके शक्तिके अनुसार सुवर्णका दान दे ।

गुर्वतिस्त्रिग्धतीक्ष्णोष्णद्रवस्थूलतिशीतलैः ।

विरुद्धाध्यशनाजीर्णैर्विषमैश्चातिभोजनैः ॥ ( माधव )

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Last Updated : January 16, 2012

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