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शीर्षव्रणहरव्रत

रोग हनन व्रत - शीर्षव्रणहरव्रत

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


शीर्षव्रणहरव्रत

( सूर्यारुण १९१९ ) - जन्मात्नरमें नारिकेल ( नारियल या श्रीफलों ) के अपहरण करनेसे मुखमण्डलको शोभाहीन बनानेवाला शीर्षव्रण होता है । उसके निवारणके निमित्त शिवजीके मन्दिरमें जाकर उनका यथाविधि पूजन करे और नारियलका फल चढ़ावे । इसी प्रकार पार्वतीजीकी भी यथावत् पूजा करे । फिर हाथ जोड़कर

' यन्मया नारिकेलानि हत्वा पापमुपार्जितम् । अर्चितो भगवान् रुद्रो भवान्या भयभञ्जनः ॥

यथाशक्ति च दानाद्यैर्भवन्तोऽपि च पूजिताः । कर्मणानेन मे नाशमुपैतु शिरसो व्रणः ॥'

इस मन्त्रसे प्रार्थना करके फलाहार करे ।

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Last Updated : January 16, 2012

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