हिंदी सूची|व्रत|विशिष्ट व्रत|रोग हनन व्रत|
अर्शहरव्रत

रोग हनन व्रत - अर्शहरव्रत

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


अर्शहरव्रत

( अनुष्ठान - प्रकाश ) - जो मनुष्य वेतन ३ लेकर अध्यापन, यजन, हवन या जपादि करते हैं, उनको अर्शरोग होता है । आयुवेंदमें इसको त्रिदोषजन्य और परम्परासे आनेवाला बतलाया है । इसकी निवृत्तिके लिये चान्द्रायणव्रत करे और उन दिनोंमें प्रतिदिन आठ या अट्ठाईस पाठ आदित्यह्रदयके करके शमीकी समिधा और घीसे हवन करे । इस प्रकार करनेसे अर्शरोग दूर होता है । एकभुक्त व्रत करना आवश्यक है ।

३. वेतनमादाय योऽधायपत्यर्चयति जुहोति जपति सोऽर्शो रोगवान् भवति ।

N/A

References : N/A
Last Updated : January 16, 2012

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP