अधिमासव्रत - अधिमासीयार्चव्रत

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


अधिमासीयार्चव्रत

( पूजापङ्कजभास्कर ) - आधिमासके व्रतोमें भगवानकी पूजन - विधिमें यह विशेषता है कि गन्धयुक्त पुष्प और श्रीसूक्तके मन्त्न - इनके साथमें भगवानके नामोंका एक - एक करके उच्चारण करता हुआ उनके पुष्प अर्पण करे । नाम ये हैं - १ - कूर्माय, २- सहस्त्रशीर्ष्णे, ३ - देवाय, ४ - सहस्त्राक्षपादाय, ५ - हरये, ६ - लक्ष्मीकान्ताय, ७ - सुरेश्वराय, ८ - स्वयम्भुवे, ९ - अमिततेजसे, १० - ब्रह्मप्रियाय, ११ - देवाय, १२ - ब्रह्मगोत्राय । पुनः लक्ष्म्यै नमः, कमलायै नमः, श्रियै नमः, पद्मवासायै नमः, हरिवल्लभायै नमः , क्षीराब्धितनायै नमः , इन्दिरायै नमः - इन नामोंसे पुष्प अर्पण करके ' पुराणपुरुषेशान सर्वशोकनिकृन्तन । अधिमासव्रते प्रीत्या गृहाणार्घ्यं श्रिया सह ॥ ' पुराणपुरुषेशान जगद्धातः सनातन । सपत्नीको ददाम्यर्घ्यं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे ॥ देवदेव महाभाग प्रलयोत्पत्तिकारक । कृपया सर्वभूतस्य जगदानन्दकारक । गृहाणार्घ्यमिमं देव दयां कृत्वा ममोपरि ॥' - इन मन्त्रोंसे तीन बार अर्घ्य दे तो महाफल होता है ।

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Last Updated : January 02, 2002

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