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अध्याय ४ - सर्वाष्टकवर्गरेखाफलम्

मानसागरी - अध्याय ४ - सर्वाष्टकवर्गरेखाफलम्

सृष्टीचमत्काराची कारणे समजून घेण्याची जिज्ञासा तृप्त करण्यासाठी प्राचीन भारतातील बुद्धिमान ऋषीमुनी, महर्षींनी नानाविध शास्त्रे जगाला उपलब्ध करून दिली आहेत, त्यापैकीच एक ज्योतिषशास्त्र होय.

The horoscope is a stylized map of the planets including sun and moon over a specific location at a particular moment in time, in the sky.


सर्वाष्टकवर्गरेखाफलम्

मरणं चतुर्दशभिः सक्रूरैः पञ्चदशभिर्वा । षोडशभिरङ्गपीडा भवति शरीरे महाव्याधिः ॥१॥

सप्तदशभिर्दुःखमष्टादशभिर्धनक्षयः प्रोक्तः । बान्धवपीडा बह्नी भवति तथैकोनविंशत्या ॥२॥

व्ययकलहो विंशतिभिर्गदो दुःखं तथैकविंशत्या । कुमतिर्द्वाविंशतिबिर्दैन्यं च पराभवो विफलम् ॥३॥

नूनं त्रिवर्गहानिर्भवति नराणां त्रिविंशतिभिर्नित्यम् । द्रव्यक्षयस्त्वकस्माद्विंशतिभिश्चतुर्भिरधिकाभिः ॥४॥

करतलगतमपि च धनं नश्यति नराणां पंचविंशतिभिः । षङ्विशतिभिः क्लेशः समता स्यात्सप्तविंशतिभिः ॥५॥

अष्टाधिकविशत्या द्रव्यागमनं यथासुखं भवति । एकोनत्रिंशतिभिर्लोकेषु नरः पूज्यतामेति ॥६॥

मानं सुकृतव्याप्तिस्त्रिंशत्या नास्ति सन्देहमानम् । सुकृतिं सौख्यं नृणामेकाभिरधिकाभिः स्यात् ॥७॥

राज्यादिफलप्राप्तिः कथिता षडाकृतिं यावत् ॥८॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2009-04-02T21:26:53.7970000

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वैश्रवण

  • n. कुबेर का पैतृक नाम, जो उसे विश्रवस् ऋषि का पुत्र होने के कारण प्राप्त हुआ था । प्राचीन साहित्य में सर्वत्र इसे ‘यक्षराज’ कहा गया है, केवल ब्रह्मांड में इसका स्वरूप राक्षसों जैसा बताया गया है । यह महाहनु, शंकुकर्ण एवं ह्रस्वबाहु था । इसका शरीर बड़ा था, एवं सिर मोटा था । इसके केस भूरे थे एवं इसके शरीर का वर्ण पिंगा था । इस प्रकार इसका शरीर जन्म से ही अत्यंत विरूप होने के कारण, इसे कुबेर नामान्तर प्राप्त हुआ था [ब्रह्मांड. ३.८.४०-४४]; कुबेर देखिये । महाभारत में मुचकुंद राजा से हुआ इसका संवाद प्राप्त है, जो ‘मुचकुंद-वैश्रवण संवाद’ नाम से प्रसिद्ध है [म. उ. १३०. ८-१०]; मुचकुंद देखिये । 
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