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हुआ अब मैं कृतार्थ महाराज...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार - हुआ अब मैं कृतार्थ महाराज...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दारके परमोपयोगी सरस पदोंसे की गयी भक्ति भगवान को परम प्रिय है।

राग केदारा- ताल तीनताल

हुआ अब मैं कृतार्थ महाराज ।

दिया चरन आश्रय गरीबको, धन्य ! गरीबनवाज ॥

घूमा नभ-जल-पृथिवीतलपर, धरे नित नये साज ।

मिली न शान्ति कही प्रभु ! ऐसी, जैसी मुझको आज ॥

बिबिध रूपसे पूजा मैने कितना देव-समाज ।

कितने धनी उदार मनाये, हुआ न मेरा काज ॥

दुखसमुद्रमें डूब रहा था मेरा भग्न जहाज ।

चरण-किनारा मिला अचानक, छूटा दुखका राज ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2008-05-24T22:29:10.8630000

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चुरमुरणें

  • v i  Moan or fret at. Mutter. 
  • अ.क्रि. १ तळमळणें ; विव्हळणें ; शोक करणें ; खेद करणें . २ असंतुष्टपणानें कुरकुरणें ; चरफडणें ; मुळमुळणें . [ चुरमुर ] 
  • चुरमुरत बसणें Sit moaning and fretting. 
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Category : Hindu - Traditions
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