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नाथ ! थारै सरणै आयो जी ...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार - नाथ ! थारै सरणै आयो जी ...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दारके परमोपयोगी सरस पदोंसे की गयी भक्ति भगवान को परम प्रिय है।

राग जोशी - ताल दीपचन्दी

नाथ ! थारै सरणै आयो जी !

जचै जिसतराँ, खेल खिलाओ, थे मन-चायो जी ॥

बोझो सभी ऊतरयो मनको, दुख बिनसायो जी ।

चिंता मिटी, बड़े चरणाँको सहारो पायो जी ॥

सोच फिकर अब सारो थारै उपर आयो जी ।

मै तो अब निस्चिन्त हुयो अंतर हरखायो जी ॥

जस-अपजस सब थारो, मै तो दास कुहायो जी ।

मन-भँवरो थारै, चरण-कमलमें जा लिपटायो जी ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2008-05-24T22:29:19.5870000

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