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मत बाँधो गठरिया अपजस ...

विविध - मत बाँधो गठरिया अपजस ...

’विविध’ शीर्षकके द्वारा संतोंके अन्यान्य भावोंकी झलक दिखलानेवाली वाणीको प्रस्तुत किया है ।


मत बाँधो गठरिया अपजस की ॥ टेर॥

यो संसार बादल की छाया, करो कमाइ भाई हरि रस की ॥१॥

जोर जवानी ढलक जायगी, बाल अवस्था तेरी दिन दस की ॥२॥

धर्मदूत जब फाँसी डारे, खबर लेवे थारे नस- नस की ॥३॥

कहत कबीर सुनो भाई साधो, जब तेरे बात नहीं बस की ॥४॥

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Last Updated : January 22, 2014

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