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मोर मुकुट की देख छटा ...

विविध - मोर मुकुट की देख छटा ...

’विविध’ शीर्षकके द्वारा संतोंके अन्यान्य भावोंकी झलक दिखलानेवाली वाणीको प्रस्तुत किया है ।


मोर मुकुट की देख छटा मैं हो गई सजनी लटा पटा ॥ टेर ॥

मैं जल जमुना भरन जात री, मार्ग रोकत नाहीं हटा ।

हाथ पकड़ मेरी बइयाँ मरोड़ी, बिखर गया मेरा केश लटा ॥

मैं दधि बेचन जाऊँ वृन्दावन, मार्ग रोकत नाहीं हटा ।

बइयाँ पड़क मेरी मटकी फोड़ी, बिखर गया मेरा दही मठा ॥

सास ससुर मोहे बुरी बतावे, नणदल बोलत बचन खटा ।

श्याम बिहारी मेरी बात न बूझै, सखियन में मेरा मान घटा ॥

घुँघरवाले बाल श्याम के, मानो जैसे इन्द्र घटा ।

सूरदास प्रभु के गुन गावे, राधा कृष्ण रटा रटा ॥

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Last Updated : January 22, 2014

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