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म्हाने रामजी सदा बर द...

विविध - म्हाने रामजी सदा बर द...

’विविध’ शीर्षकके द्वारा संतोंके अन्यान्य भावोंकी झलक दिखलानेवाली वाणीको प्रस्तुत किया है ।


म्हाने रामजी सदा बर दीज्यो हे माय ।

अमराँ पुर म्हारो सासरो ॥

म्हाने इण जग में मति राखो हे माय !

किसो भरोसो इण सासरो ॥ टेर ॥

मैं जो अयानी धीवड़ नानी,

म्हारी माता बड़ी विधाता हे माय ॥१॥

बाबल ज्ञानी सब सिधि जानी,

म्हाने चार पदारथ दाता हे माय ॥२॥

चँवरी मांडी कदे नहीं रांडी,

म्हारो सतगुरु लगन लिखायो हे माय ॥३॥

सदा सुहागण कदे न दुहागण,

अजर अमर पद पायो हे माय ॥४॥

सदा सपूती कदे न अपूती,

म्हारे शब्द पुत्र भल जायो हे माय ॥५॥

रामदास चरण निबासा,

ये तो दयाल बाल जस गायो हे माय ।

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Last Updated : January 22, 2014

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