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म्हारो लग्यो राम सैं ...

विविध - म्हारो लग्यो राम सैं ...

’विविध’ शीर्षकके द्वारा संतोंके अन्यान्य भावोंकी झलक दिखलानेवाली वाणीको प्रस्तुत किया है ।


म्हारो लग्यो राम सैं हेत-हेत ।

करमां को संगाती राणा कोई भी नहिं ॥ टेर॥

एक माटीका दोय माटला, राणाजी ।

ज्यांरो न्यारो-न्यारो भाग, करमांको संगाती ॥१॥

एक तो शिवजीके जल चढ़े, राणाजी।

दूजो श्मशानमें जाय, करमांको संगाती ॥२॥

एक गऊके दोय बाछड़ा. राणाजी ।

ज्यांरो न्यारो-न्यारो भाग, कंरमाको संगाती ॥३॥

एक तो शिवजीके नांदियो, राणाजी ।

दूजो बिणजारा रो बैल, करमांको संगाती ॥४॥

एक-नारीके दोय बालका, राणाजी ।

ज्यांरो न्यारो-न्यारो भाग, करमांको संगाती ॥५॥

एक तो भोगे राजगद्दी, राणाजी ।

दूजो भीख मांगने जाय, करमांको संगाती ॥६॥

मीरां तो जन्मी मेड़ते, राणाजी ।

ब्याही सीसोद्यां रै गाँव, करमांको संगाती ॥७॥

राणोजी भोगे राजगद्दी, राणाजी ।

मीरां साधांरी मण्डली मांय, करमाको संगाती ॥८॥

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Last Updated : January 22, 2014

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