TransLiteral Foundation
संस्कृत सूची|संस्कृत साहित्य|उपनिषद‌|
गोरक्ष उपनिषत्

गोरक्ष उपनिषत्

आपल्या प्राचीन वाङ्मयामध्ये उपनिषदांना फार महत्त्वाचे, म्हणजे प्रस्थानत्रयी मधील एक, असे स्थान आहे.
Upanishad are highly philosophical and metaphysical part of Vedas. Being the conclusive part of Vedas, Upanishad can be called the whole substance of Vedic


गोरक्ष उपनिषत्
श्रीराम॥
अथ गोरक्ष उपनिषत्॥

श्री नाथ परमानन्द है विश्वगुरु है निरञ्जन है
विश्वव्यापक है महासिद्धन के लक्ष्य है तिन प्रति हमारे आदेश
होहु॥ इहां आगे अवतरन॥ एक समै विमला नाम महादेवी किंचितु
विस्मय जुक्त भईश्रीमन्महा गोरक्षनाथ तिनसौंपूछतु है।
ताको विस्मय दूर करिबै मैं तात्पर्य है लोकन को मोक्ष करिबै हेतु
कृपालु तासौं महाजोग विद्या प्रगट करिबे को तिन के एसे श्री नाथ
स्वमुख सौं उपनिषद् प्रगट अरै है। गो कहियै इन्द्रिय तिनकी
अन्तर्यामियासों रक्षा करे है भव भूतन की तासों गोरक्षनाथ
नाम है। अरु जोग को ज्ञान करावै है या वास्तै उपनिषद् नाम है।
यातैं ही गोरक्षोपनिषद् महासिद्धनमें प्रसिद्ध हैं। इहां आगै
विमला उवाच॥ मूलको अर्थ॥ जासमै महाशुन्य था आकाशादि
महापंचभूत अरु तिनही पञ्चभूतनमय ईश्वर अरु जीवादि कोई
प्रकार न थे तब या सृष्टि कौ करता कौन था। तात्पर्य ए है
कि नाना प्रकार की सृष्टि होय वै मै प्रथम कर्ता महाभूत है
अरु वैही शुद्ध सत्वांशले के ईश्वर भ वैही मलिन सत्व करि
जीव भये तौतौ साक्षात् कर्त्ता न भय तब जिससमै ए न थे तब
को अनिर्वचनीय पदार्थ था॥ सो कर्त्ता सो कर्त्ता सो कर्त्ता कौन
भयो एसे प्रश्न पर। श्री महागोरक्षनाथ उत्तर करै है श्री
गोरक्षनाथ उवाच। आदि अनादि महानन्दरूप निराकार साकार
वर्जित अचिन्त्य को पदार्थ था तांकु हे देवि मुख्य कर्ता जानियै
क्यों कि निराकार कर्ता होय तौ आकार इच्छा धारिबे मैं विरुद्ध
आवे है। साकार करता होय तौ साकार को व्यापकता नहीं है
यह विरुद्ध आवै है। तातैं करता ओही है जो द्वैताद्वैत रहित
अनिर्वचनीय नथा सदानन्द स्वरूप सोही आजे कुं वक्ष्यमाण है।
इह मार्ग मै देवता कोन है यह आशंका वारनै कहै है। अद्वैतो
परि म्महानन्द देवता। अद्वैत ऊपर भयो तब द्वैत ऊपर तौ
स्वतः भयो॥ इह प्रकार अहं कर्त्ता सिद्ध तूं जान ञ्छह करता
अपनी इच्छा शक्ति प्रगट करी। ताकरि पीछे पिण्ड ब्रह्माण्ड
प्रगट भ तिनमै अव्यक्त निर्गुन स्वरूप सों व्यापक भयो। व्यक्त
आनन्द विग्रह स्वरूप सों विहार करत भयौ पीछै ज्यौही मैं एक
स्वरूप सों नव स्वरूप होतु भयौ -- तैं सत्यनाथ अनन्तर
सन्तोषनाथ विचित्र विश्व के गुन तिन सों असंग रहत भयौ यातैं
संतोषनाथ भयौ। आगे कूर्मनाथ आकाश रूप श्री आदिनाथ।
कूर्मशब्द तै पाताल तरै अधोभूमि तकौ नाम कूर्मनाथ। बीच के
सर्वनाथ पृथ्वीमण्डल के नाथ औरप्रकार सप्तनाथ भ।
अनन्तर मत्स्येन्द्रनाथ के पुनह पुत्र श्री -- जगत की उत्पत्ति के हेत
लाये माया कौ लावण्य तांसौ असंग जोगधर्म -- द्रष्टा रमण
कियौ है आत्मरूप सौं सर्व जीवन मैं। तत् शिष्य गोरखनाथ।

गो कहियै वाक्‍शब्द ब्रह्म ताकी, र कहियै
रक्षा करै, क्ष कहियै क्षय करि रहित अक्षय ब्रह्म
एसे श्रीगोरक्षनाथ चतुर्थरूप भयो और प्रकार नव स्वरूप
भयो तामे एक निरन्तरनाथ कुं किह मार्ग करि पायौ जातु। ताकौ
कारन कहतु हैं। दोय मार्ग विश्व मै प्रगट कियो है कुल अरु अकुल।
कुल मार्ग शक्ति मार्गः अकुल मार्ग अखण्डनाथ चैतन्य मार्ग
तन्त्र अंस जोग तिनमै किंचित प्रपञ्च की॥ एवं॥ या रीत मै
द्वैताद्वैत रहित नाथ स्वरूप तै व्यवहार के हेतु अद्वैत
निर्गुणनाथ भयौ अद्वैत तै द्वैत रूप आनन्द विग्रहात्म नाथ
भयौ तामै ही मो एक तैं मैं विशेष व्यवहार के हेतु नव
स्वरूप भयौ तिन नव स्वरूप कौ निरूपण। श्री कहियै अखण्ड
शोभा संजुक्त गुरु कहिये सर्वोपदेष्टा आदि कहियै इन वक्ष्यमाण
नव स्वरूप मैं प्रथम नाथ  ना करि नाद ब्रह्म को
बोध करावे  थ करि थापन कि है त्रय जगत जित एसो
श्री आदिनाथ स्वरूप। अनन्तर मत्स्येन्द्र नाथ। ता पाछ तत् पुत्र
तत् शिष्य उदयनाथ श्री आदिनाथ तैं जोग शास्त्र प्रगट कियौ
द्वहै। योग कौ उदय जाहरि महासिद्ध निकरि बहुत भयो आतैं
उदयनाथ नाम प्रसिद्ध भयो। अनन्तर दण्डनाथ ताही जोग के
उपदेश तै खण्डन कियो है। काल दण्डलोकनि कौ य्यातै
दण्डनाथ भयौ॥

अगै मत्स्यनाथ असत्य माया स्वरूपमय काल ताको खंडन
कर महासत्य तैं शोभत भयौ आण निर्गुणातीत ब्रह्मनाथ ताकुं
जानैयातै आदि ब्राह्मण सूक्ष्मवेदी। ब्राह्मण वेद पाठी होतु है
ऋग यजु साम इत्यादि कर इनके सूक्ष्म वेदी खेचरी मुद्रा अन्तरीय
खेचरी मुद्रा बाह्यवेषरी कर्ण मुद्रा मुद्राशक्ति की निशक्ति
करबी सिद्धसिद्धान्त पद्धति के लेख प्रमाण। अनन्त मठ मन्दिर
शिव शक्ति नाथ अरु ईच्छा शिव तन्तुरियं जज्ञोपवीत शिव तं तु
आत्मा तं तु जज्ञ जोग जग्य उपवीत शयाम उर्णिमासूत्र। ब्रह्म
पदाचरणं ब्रह्मचर्य शान्ति संग्रहणं गृहस्थाश्रमं
अध्यात्म वासं वानप्रस्थं स सर्वेच्छा विन्यासं संन्यासं आदि
ब्राह्मण कहिवे मै चतुर वर्ण कौ गुरु भयौ अरु इहां च्यारों आश्रम
कौ समावेस जामै होय है य्यातै ही अत्याश्रमी आश्रमन कोहु गुरु
भयौ। सो विशेष करि शिष्य पद्धति मै कह्यो ही है। तात्पर्य
भेदाभेद रहित अचिन्त्य वासना जुक्त जीव होय ते तौ कुल मार्ग
करियौ मै आवतु है अरु समस्त वासना रहित भ है अन्तह्करण
जिनके ऐसै जीव जोग भजन मै आवतु है ऐसो मार्गन मै अकुल मार्ग
है। और शास्त्र वाक् जालकर उपदेश करतु है। मैरो संकेत
शास्त्र है प्तो शुन्य कहिये नाथ सोही संकेत है इह मार्ग में
देवता कोन है यह आशंका वारन कहै है ईश्वर संतान।
संतान दोय प्रकार कौ नाद रूप विन्दु विन्दु नाद रूप। शिष्य
विन्दु रूप पूत्र नाथ रूप नाद शक्तिरूप विन्दु नादरूप करि भ।
शिष्य सौ प्रथम कहै नवनाथ स्वरूप शक्ति विन्दु रूप पर शिव
सोही ईश्वर नाम कर मैरो संतान है। ता करि विश्व की प्रवृत्ति
करतु है। जोग मत अष्टाश्ण्ग जोग मुख्य कर षंडग जोग अकुल कहनै
सो अवधूत जोग जोग मत सौं साधन अष्टाश्ण्ग जोग। आदि ब्राह्मणा
ब्राह्मण क्षत्री वैश्व शूद्रच्यार वर्ण करि पृथ्वी भरी है
तिनमै ब्राह्मण वर्ण मुख्य है। ब्राह्मण किसको कहियै ब्राह्मंकू
सगुण ब्रह्म द्वारे निर्गुण ब्रह्म करिजानै सो ब्राह्मण ए जोगीश्वर
सगुणनाथ गम्य पदार्थ। आनन्द विग्रहात्मनाथ उपदेष्टा उपास्य
रूप अत्याश्रमी गुरु अवधूत जोग साधन मुमुक्षु अधिकारी बन्ध
मोक्ष रहित कोक अनिर्वचनीय मोक्ष मोक्ष ऐसो आ ग्रन्थ मै निरूपण
है सो जो को पढे पढावै जाको अनन्त अचिन्त्य फल है।

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T12:47:07.3430000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

मानवी

  • n. परशु एवं इडा नामक वैदिक वाङ्मय में निर्दिष्ट स्त्रियों का पैतृक नाम [श.ब्रा.१.८.२६];[ तै.सं.२.६.७.३];[ ऋ. १०.८६.३३] । मनु का स्त्रीवंशज इस अर्थ से यह नाम प्रयुक्त हुआ होगा । 
  • a  Human. 
  • f  A woman. 
  • mānavī f S A woman or female. 
More meanings
RANDOM WORD

Did you know?

श्रीदत्तपुराणटीका and more books for shree dattaray
Category : Hindu - Traditions
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Status

  • Meanings in Dictionary: 717,689
  • Total Pages: 47,439
  • Dictionaries: 46
  • Hindi Pages: 4,555
  • Words in Dictionary: 325,801
  • Marathi Pages: 28,417
  • Tags: 2,707
  • English Pages: 234
  • Sanskrit Pages: 14,232
  • Other Pages: 1

Suggest a word!

Suggest new words or meaning to our dictionary!!

Our Mobile Site

Try our new mobile site!! Perfect for your on the go needs.