हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|भजन|श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार|
बिनती सुण म्हारी , सुमरो ...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार - बिनती सुण म्हारी , सुमरो ...

श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दारके परमोपयोगी सरस पदोंसे की गयी भक्ति भगवान को परम प्रिय है।

बिनती सुण म्हारी, सुमरो सुखकारी हरिके नामनै ॥

भटकत फिरयो जूण चौरासी लाख महा दुखदाई ।

बिन कारण कर दया नाथ फिर मिनख देह बकसाई ॥

गरभमायँ माताके आकर पाया दुःख अनेक ।

अरजी करी प्रभूसे, बाहर काढ़ो, राखो टेक ॥

करी प्रतिग्या गरभमायँ मैं सुमरण करस्यूँ थारो ।

नही लगाऊँ मन विषयाँमें प्रभुजी मने उबारो ॥

जलम लेय जगमायँ चित्तनै विषयाँ मायँ लगायो ।

जलम-मरण दुःख-हरण रामको पावन नाम भुलायो ॥

खोई उमर ब्रथा भोगाँके सुख-सुपने कै माँई ।

सुख नहिं मिल्यो, बड़्हयो दुख दिन-दिन, रह्यो सोग मन छाई ॥।

मृग-तृस्नाकी धरती मैं जो समझै भ्रमसैं पाणी ।

उसकी प्यास नही मिटणैकी, निश्चै लीज्यो जाणी ॥

यूँ इण संसारी भोगाँमैं नही कदे सुख पायो ।

दुःखरूप सुख देवै किस बिध मूरख मन भरमायो ॥

कर बिचार, मन हटा बिषयसैं प्रभु चरणाँमैं ल्याओ ।

करो कामना त्याग, हरीको नाम प्रेमसैं गाओ ॥

सुख-दुखमें संतोष करो अब, सगली इच्छा छोड़ो ।

'मै' और 'मेरो' त्याग हरीके रूप मायँ चित्त जोड़ो ॥

मिलै सांति दुख कदे न ब्यापै, आवै आनँद भारी ।

प्रेममगन हो नाम हरीको जपो सदा सुखकारी ॥

N/A

References : N/A
Last Updated : May 24, 2008

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP