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मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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पाठ पद्धती
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पाठविधिः
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - १ ते ५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ५१ ते १००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - १०१ ते १५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - १५१ ते २००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - २०१ ते २५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - २५१ ते ३००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ३०१ ते ३५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ३५१ ते ४००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ४०१ ते ४५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ४५१ ते ५००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ५०१ ते ५५०
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ५५१ ते ६००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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मन्त्र - ६५१ ते ७००
मन्त्र प्रतिलोम दुर्गासप्तशती पूर्ण रूपात तान्त्रोक्त आहे.
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श्रीमन्महीधर भट्ट - मन्त्रमहोदधिः
श्रीमन्महीधर भट्ट ने स्वयं इस ग्रंथ में शान्ति , वश्य , स्तम्भन , विद्वेषण , उच्चाटण और मारण की विधि बताई है ।
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मन्त्रमहोदधिः - प्रथमः तरङ्गः
श्रीमन्महीधर भट्ट ने स्वयं इस ग्रंथ में शान्ति , वश्य , स्तम्भन , विद्वेषण , उच्चाटण और मारण की विधि बताई है ।
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