TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!
संस्कृत सूची|संस्कृत साहित्य|अष्टोत्तरशतनामावलिः|
माता अमृतानन्दमयी अष्टोत्तर शत नामावलि

माता अमृतानन्दमयी अष्टोत्तर शत नामावलि

अष्टोत्तरशतनामावलिः म्हणजे देवी देवतांची एकशे आठ नावे, जी जप करताना म्हणावयाची असतात. नावे घेताना १०८ मण्यांची जपमाळ वापरतात.
Ashtottara shatanamavali means 108 names of almighty God and Godess.


माता अमृतानन्दमयी अष्टोत्तर शत नामावलि
॥ॐ अमृतेश्वर्यै नमः ॥
ध्यान श्लोकः ॥
ध्यायामोधवलावगुण्ठनवतीं तेजोमयीं नैष्ठिकीम्
स्निग्धापाङ्गविलोकिनीं भगवतीं मन्दस्मित श्रीमुखीम् ॥
वात्सल्यामृतवर्षिणीं सुमधुरं सङ्कीर्तनालापिनीम्
श्यामाङ्गीं मधुसिक्तसूक्तम् अमृतानन्दात्मिकामीश्वरीम् ॥
ॐ पूर्ण-ब्रह्म-स्वरूपिण्यै नमः ॥
ॐ सच्चिदानन्द-मूर्तये नमः ॥
ॐ आत्मारामाग्रगण्यायै नमः ॥
ॐ योग-लीनान्तरात्मने नमः ॥
ॐ अन्तर्मुख स्वभावायै नमः ॥
ॐ तुर्य-तुङ्ग-स्थलीजुषे नमः ॥
ॐ प्रभामण्डल-वीतायै नमः ॥
ॐ दुरासद-महौजसे नमः ॥
ॐ त्यक्त-दिग्वस्तु-कालादि-सर्वावच्छेद-राशये नमः ॥ १० ॥
ॐ सजातीय-विजातीय-स्वीय-भेद-निराकृते नमः ॥
ॐ वाणी-बुद्धि-विमृग्यायै नमः ॥
ॐ शश्वदव्यक्त-वर्त्मने नमः ॥
ॐ नाम-रूपादि शून्यायै नमः ॥
ॐ शून्य-कल्प-विभूतये नमः ॥
ॐ षडैश्वर्य-समुद्रायै नमः ॥
ॐ दूरीकृत-षडूर्मये नमः ॥
ॐ नित्य-प्रबुद्ध-संशुद्ध-निर्मुक्तात्म-प्रभामुचे नमः ॥
ॐ कारुण्याकुल-चित्तायै नमः ॥
ॐ त्यक्त-योग-सुषुप्तये नमः ॥
ॐ केरलक्षमावतीर्णायै नमः ॥ २० ॥
ॐ मानुषस्त्री-वपुर्भृते नमः ॥
ॐ धर्मिष्ठ-सुगुणानन्द-दमयन्ती-स्वयम्भुवे नमः ॥
ॐ माता-पितृ-चिराचीर्ण-पुण्यपूर-फलात्मने नमः ॥
ॐ निःशब्द-जननीगर्भ-निर्गमाद्भुत-कर्मणे नमः ॥
ॐ काली-श्रीकृष्ण-सङ्काश-कोमल-श्यामल-त्विषे नमः ॥
ॐ चिरनष्ट-पुनर्लब्ध-भार्गवक्षेत्र-सम्पदे नमः ॥
ॐ मृतप्राय-भृगुक्षेत्र-पुनरुद्धित-तेजसे नमः ॥
ॐ सौशील्यादि-गुणाकृष्ट-जङ्गम-स्थावरालये नमः ॥
ॐ मनुष्य-मृग-पक्ष्यादि-सर्व-संसेविताङ्घ्रये नमः ॥
ॐ नैसर्गिक-दया-तीर्थ-स्नान-क्लिन्नान्तरात्मने नमः ॥ ३० ॥
ॐ दरिद्र-जनता-हस्त-समर्पित-निजान्धसे नमः ॥
ॐ अन्यवक्त्र-प्रभुक्तान्न-पूरित-स्वीय-कुक्षये नमः ॥
ॐ सम्प्राप्त-सर्व-भूतात्म-स्वात्म-सत्तानुभूतये नमः ॥
ॐ अशिक्षित-स्वयंस्वान्त-स्फुरत्-कृष्ण-विभूतये नमः ॥
ॐ अच्छिन्न-मधुरोदार-कृष्ण-लीलानुसन्धये नमः ॥
ॐ नन्दात्मज मुखालोक-नित्योत्कण्ठित-चेतसे नमः ॥
ॐ गोविन्द-विप्रयोगाधि-दाव-दग्धान्तरात्मने नमः ॥
ॐ वियोग-शोक-सम्मूर्च्छा-मुहु-पतित-वर्ष्मणे नमः ॥
ॐ सारमेयादि-विहित-शुश्रूषा-लब्ध-बुद्धये नमः ॥
ॐ प्रेमभक्ति-बलाकृष्ट-प्रादुर्भावित-शार्ङ्गिणे नमः ॥ ४० ॥
ॐ कृष्णालोक-महाह्लाद-ध्वस्त-शोकान्तरात्मने नमः ॥
ॐ काञ्ची-चन्द्रक-मञ्जीर-वंशी-शोभि-स्वभू-दृशे नमः ॥
ॐ सार्वत्रिक-हृषीकेश-सान्निध्य-लहरी-स्पृशे नमः ॥
ॐ सुस्मेर-तन्-मुखालोक-विस्मेरोत्फुल्ल-दृष्टये नमः ॥
ॐ तत्कान्ति-यमुना-स्पर्श-हृष्ट-रोमाङ्ग-यष्टये नमः ॥
ॐ अप्रतीक्षित-सम्प्राप्त-देवी-रूपोपलब्धये नमः ॥
ॐ पाणी-पद्म-स्वपद्वीण-शोभमानाम्बिका-दृशे नमः ॥
ॐ देवी-सद्यः-तिरोधान-ताप-व्यथित-चेतसे नमः ॥
ॐ दीन-रोदन-निर्घोष-दीर्ण-दिक्कर्ण-वर्त्मने नमः ॥
ॐ त्यक्तान्न-पान-निद्रादि-सर्व-दैहिक-धर्मणे नमः ॥ ५० ॥
ॐ कुररादि-समानीत-भक्ष्य-पोषित-वर्त्मणे नमः ॥
ॐ वीणा-निष्यन्दि-सङ्गीत-लालित-श्रुतिनालये नमः ॥
ॐ अपार-परमानन्द-लहरी-मग्न-चेतसे नमः ॥
ॐ चण्डिका-भीकराकार-दर्शनालब्ध-शर्मणे नमः ॥
ॐ शान्त-रूपामृत-झरी-पारणे-निर्वृतात्मने नमः ॥
ॐ शारदा-स्मारकाशेष-स्वभाव-गुण-सम्पदे नमः ॥
ॐ प्रतिबिम्बित-चान्द्रेय-शारदोभय-मूर्त्तये नमः ॥
ॐ तन्नाटकाभिनयन-नित्य-रङ्गयितात्मने नमः ॥
ॐ चान्द्रेय-शारदा-केलि-कल्लोलित-सुधाब्धये नमः ॥
ॐ उत्तेजित-भृगुक्षेत्र-दैव-चैतन्य-रंहसे नमः ॥ ६० ॥
ॐ भूयः प्रत्यवरुद्धार्ष-दिव्य-संस्कार-राशये नमः ॥
ॐ अप्राकृताद्भुतानन्द-कल्याण-गुण-सिन्धवे नमः ॥
ॐ ऐश्वर्य-वीर्य-कीर्ति-श्री-ज्ञान-वैराग्य-वेश्मने नमः ॥
ॐ उपात्त-बालगोपाल-वेषभूषा-विभूतये नमः ॥
ॐ स्मेर-स्निग्ध-कटाक्षायै नमः ॥
ॐ स्वैराध्युषित-वेदये नमः ॥
ॐ पिञ्छ-कुण्डल-मञ्जीर-वंशिका-किङ्किणी-भृते नमः ॥
ॐ भक्त-लोकाखिलाभीष्ट-पूरण प्रीणनेच्छवे नमः ॥
ॐ पीठारूढ-महादेवीभाव-भास्वर-मूर्तये नमः ॥
ॐ भूषणाम्बर-वेशश्री-दीप्यमानाङ्ग-यष्टये नमः ॥ ७० ॥
ॐ सुप्रसन्न-मुखाम्भोज-वराभयद-पाणये नमः ॥
ॐ किरीट-रशना-कर्णपूर-स्वर्णपटी-भृते नमः ॥
ॐ जिह्व-लीढ-महारोगि-बीभत्स-व्रैणित-त्वचे नमः ॥
ॐ त्वग्रोग-ध्वंस-निष्णात-गौराङ्गापर-मूर्तये नमः ॥
ॐ स्तेय-हिंसा-सुरापानाद्यशेषाधर्म-विद्विषे नमः ॥
ॐ त्याग-वैराग्य-मैत्र्यादि-सर्व-सद्वासना-पुषे नमः ॥
ॐ पादाश्रित-मनोरूढ-दुस्संस्कार-रहोमुषे नमः ॥
ॐ प्रेम-भक्ति-सुधासिक्त-साधु-चित्त-गुहाजुषे नमः ॥
ॐ सुधामणि महानाम्ने नमः ॥
ॐ सुभाषित-सुधामुचे नमः ॥ ८० ॥
ॐ अमृतानन्द-मय्याख्या-जनकर्ण-पुटस्पृशे नमः ॥
ॐ दृप्त-दत्त-विरक्तायै नमः ॥
ॐ नम्रार्पित-बुभुक्षवे नमः ॥
ॐ उट्सृष्ट-भोगि-सङ्गायै नमः ॥
ॐ योगि-संग-रिरंसवे नमः ॥
ॐ अभिनन्दित-दानादि-शुभ-कर्माभिवृद्धये नमः ॥
ॐ अभिवन्दित-निःशेष-स्थिर-जङ्गम-सृष्टये नमः ॥
ॐ प्रोत्साहित-ब्रह्मविद्या-सम्प्रदाय-प्रवृत्तये नमः ॥
ॐ पुनरासादित-श्रेष्ठ-तपोविपिन-वृत्तये नमः ॥
ॐ भूयो-गुरुकुलावास-शिक्षणोत्सुक-मेधसे नमः ॥ ९० ॥
ॐ अनेक-नैष्ठिक-ब्रह्मचारि-निर्मातृ-वेधसे नमः ॥
ॐ शिष्य-सङ्क्रामित-स्वीय-प्रोज्वलद्-ब्रह्म-वर्चसे नमः ॥
ॐ अन्तेवासि-जनाशेष-चेष्टा-पातित-दृष्टये नमः ॥
ॐ मोहान्धकार-सञ्चारि-लोकानुग्राहि-रोचिषे नमः ॥
ॐ तमः-क्लिष्ट-मनोवृष्ट-स्वप्रकाश-शुभाशिषे नमः ॥
ॐ भक्त-शुद्धान्तरङ्गस्थ-भद्र-दीप-शिखा-त्विषे नमः ॥
ॐ सप्रीति-भुक्त-भक्तौघन्यर्पित-स्नेह-सर्पिषे नमः ॥
ॐ शिष्य-वर्य-सभा-मध्य ध्यान-योग-विधित्सवे नमः ॥
ॐ शश्वल्लोक-हिताचार-मग्न-देहेन्द्रियासवे नमः ॥
ॐ निजपुण्य-प्रदानान्य-पापादान-चिकीर्षवे नमः ॥ १०० ॥
ॐ प्रस्वर्यापन-स्वीय-नरक-प्राप्ति-लिप्सवे नमः ॥
ॐ रथोत्सव-चलत्-कन्याकुमारी-मर्त्य-मूर्तये नमः ॥
ॐ विमोहार्णव-निर्मग्न-भृगु-क्षेत्रो-ज्जिहीर्षवे नमः ॥
ॐ पुनस्सन्तानित-द्वैपायन-सत्कुल-तन्तवे नमः ॥
ॐ वेद-शास्त्र-पुराणेतिहास-शाश्वत-बन्धवे नमः ॥
ॐ भृगुक्षेत्र-समुन्मीलत्-परदैवत-तेजसे नमः ॥
ॐ देव्यै नमः ॥
ॐ प्रेमामृतानन्दमय्यै नित्यं नमो नमः ॥ १०८ ॥
॥ॐ अमॄतेश्वर्यै नमः ॥

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:51:06.8630000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

reflex

  • पु. प्रतिक्षेप 
  • प्रत्यावर्ती, प्रतिक्षिप्त 
  • प्रतिक्षेप- 
  • (of, relating to, or produced by stimulus without necessarily the intervention of consciousness) प्रतिक्षेपी, प्रतिक्षिप्त 
More meanings
RANDOM WORD

Did you know?

चंद्र व सूर्य यांच्या ग्रहणी जन्म झाल्यास त्याचे काय परिणाम होतात? शांती, विधी काही आहे काय?
Category : Hindu - Beliefs
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site

Ved - Puran
Ved and Puran in audio format.