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संस्कृत सूची|संस्कृत साहित्य|अष्टोत्तरशतनामावलिः|
वेङ्कटेश्वराष्टोत्तरशतनामावलि ब्रह्मांडपुराणे

वेङ्कटेश्वराष्टोत्तरशतनामावलि ब्रह्मांडपुराणे

अष्टोत्तरशतनामावलिः म्हणजे देवी देवतांची एकशे आठ नावे, जी जप करताना म्हणावयाची असतात. नावे घेताना १०८ मण्यांची जपमाळ वापरतात.
Ashtottara shatanamavali means 108 names of almighty God and Godess.


वेङ्कटेश्वराष्टोत्तरशतनामावलि ब्रह्मांडपुराणे
ॐ श्री वेङ्कटेशाय नमः
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ॐ लक्ष्मीपतये नमः
ॐ अनामयाय नमः
ॐ अमृतांशाय नमः
ॐ जगद्वंद्याय नमः
ॐ गोविंदाय नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ शेषाद्रिनिलयाय नमः ॥१०॥
ॐ देवाय नमः
ॐ केशवाय नमः
ॐ मधुसूदनाय नमः
ॐ अमृताय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ कृष्णाय नमः
ॐ श्रीहरये नमः
ॐ ज्ञानपंजराय नमः
ॐ श्रीवत्सवक्षसे नमः
ॐ सर्वेशाय नमः ॥२०॥
ॐ गोपालाय नमः
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ गोपीश्वराय नमः
ॐ परंज्योतिषये नमः
ॐ वैकुंठपतये नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ सुधातनवे नमः
ॐ यादवेंद्राय नमः
ॐ नित्ययौवनरूपवते नमः
ॐ चतुर्वेदात्मकाय नमः ॥३०॥
ॐ विष्णवे नमः
ॐ अच्युताय नमः
ॐ पद्मिनीप्रियाय नमः
ॐ धरापतये नमः
ॐ सुरपतये नमः
ॐ निर्मलाय नमः
ॐ देवपूजिताय नमः
ॐ चतुर्भुजाय नमः
ॐ चक्रधराय नमः
ॐ त्रिधाम्ने नमः ॥४०॥
ॐ त्रिगुणाश्रयाय नमः
ॐ निर्विकल्पाय नमः
ॐ निष्कलङ्काय नमः
ॐ निरंतकाय नमः
ॐ निरंजनाय नमः
ॐ निराभासाय नमः
ॐ नित्यतृप्ताय नमः
ॐ निरुपद्रवाय नमः
ॐ गदाधराय नमः
ॐ सारन्गपाणये नमः ॥५०॥
ॐ नंदकिने नमः
ॐ शङ्खधारकाय नमः
ॐ अनेकमूर्तये नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ कटिहस्ताय नमः
ॐ वरप्रदाय नमः
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ दीनबांधवे नमः
ॐ आर्तलोकाभयप्रदाय नमः
ॐ आकाशराजवरदाय नमः ॥६०॥
ॐ योगिहृत्पद्ममंदिराय नमः
ॐ दामोदराय नमः
ॐ जगत्पालाय नमः
ॐ पापघ्नाय नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
ॐ शिंशुमाराय नमः
ॐ जटामकुटशोभिताय नमः
ॐ शङ्कमद्योल्लसन्मन्जूकिङ्किण्यद्यकरकंदकाय नमः
ॐ नीलमेघश्यामतनवे नमः ॥७०॥
ॐ बिल्वपत्रार्चनप्रियाय नमः
ॐ जगद्व्यापिने नमः
ॐ जगत्कर्त्रे नमः
ॐ जगत्साक्षिणे नमः
ॐ जगत्पतये नमः
ॐ चिंतितार्थप्रदाय नमः
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ दाशरथाय नमः
ॐ दशरूपवते नमः
ॐ देवकीनंदनाय नमः ॥८०॥
ॐ शौरये नमः
ॐ हयग्रीवाय नमः
ॐ जनार्दनाय नमः
ॐ कन्याश्रवणतारेज्याय नमः
ॐ पीतांबरधराय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ वनमालिने नमः
ॐ पद्मनाभाय नमः
ॐ मृगयासक्तमानसाय नमः
ॐ अश्वारूढाय नमः ॥९०॥
ॐ खड्गधारिणे नमः
ॐ धनार्जनसमुत्सुकाय नमः
ॐ घनसारसन्मध्यकस्तूरि तिलकोज्ज्वलाय नमः
ॐ सच्चिदानंदरूपाय नमः
ॐ जगन्मङ्गलदायकाय नमः
ॐ यज्ञरूपाय नमः
ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
ॐ चिन्मयाय नमः
ॐ परमेश्वराय नमः
ॐ परमार्थप्रदायकाय नमः ॥१००॥
ॐ शांताय नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ दोर्दंडविक्रमाय नमः
ॐ परात्पराय नमः
ॐ परब्रह्मणे नमः
ॐ श्रीविभवे नमः
ॐ जगदीश्वराय नमः
ॐ शेषशैलाय नमः

इति श्री ब्रह्मांड पुराणानांतर्गत श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णम्

Translation - भाषांतर
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References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:51:05.8630000

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ऋच II.

  • n. (सो. कुरु.) देवतातिथि तथा मर्यादा का पुत्र । इसकी पत्नी अंगराजकन्या सुदेवा । पुत्र ऋक्ष [म.आ.९०.२२-२३] 
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