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ऊधो ! मधुपुरका बासी । ...

वियोग - ऊधो ! मधुपुरका बासी । ...

भगवद्वियोगकी पीडाका चित्रण ’वियोग’ शीर्षकके अंतर्गत पदोंमें है ।


ऊधो ! मधुपुरका बासी ।

म्हारो बिछड़यो श्याम मिलाय, विरहकी काट कठण फाँसी ॥

स्याम बिनु चैन नहीं आवे ।

म्हारो जबसे बिछड़यों स्याम, हीवड़ो उझल्यो ही आवे ॥

छाय रही व्याकुलता भारी ।

म्हारे स्याम-विरहमैं आज नैनसैं रह् यो नीर जारी ॥

स्याम बिनु ब्रज सूनो लागै ।

सूनी कुंज तीर जमुनाको, सब सूनो लागै ॥

गोठ-बन स्याम बिना सूनो ।

म्हारै एक-एक पल जुग सम बीते, बिरह बढ़ै दूनौ ॥

ऊधो ! अरज सुणो म्हारी ।

थारो गुण नहिं भूलाँ कदे, मिलाद्यो मोहन बनवारी ॥

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Last Updated : January 30, 2018

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