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  • काव्यमीमांसा
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - प्रथमो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - द्वितीयो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - तृतीयो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - चतुर्थो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - पञ्चमो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - षष्ठो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - सप्तमो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - चतुर्थो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - नवमो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - दशमोऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - एकादशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - द्वदशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - त्रयोदशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - चतुर्दशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - पञ्चदशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - षोडशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - सप्तदशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
  • काव्यमीमांसा - अष्टादशो ऽध्यायः
    संस्कृत कवि राजशेखरद्वारा द्वारा रचित काव्यमीमांसा अलंकार शास्त्र पर लिखा गया एक विशालकाय ग्रंथ था, जिसमें मूलत: 18 अधिकरण थे। राजशेखर महाराष्ट्र देश..
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कांठमोरा गळ्यांत अडकणें

  • एक मांजर एका मडक्‍याजवळून जात असतां त्‍या मडक्‍यात दूध आहे असे समजून त्‍याने त्‍या मडक्‍यात तोंड घातले 
  • परंतु त्‍या मडक्‍यातील दूध त्‍यास प्यावयास न मिळतां तोंड बाहेर काढतांना त्‍या मडक्‍याचा काठ त्‍याच्या गळ्यात अडकला. यावरून एखादी भलतीच गोष्‍ट करूं गेले किंवा आड मार्गात शिरले तर एखादे भलतेच लचांड मागे लागण्याचा संभव असतो. ‘जेवी नीचाचा कांठमोरा । गळा अडकल्‍या मांजरा। ते रिघोनि शुचीचिया घरा। नाना रसपात्री विटाळी।।’ -एभा २६.२०६. 
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