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देवनाथ
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वीधान
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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उभारा धरणें
Meanings: 4; in Dictionaries: 1
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घडियाल
Meanings: 3; in Dictionaries: 3
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नकीबदार
Meanings: 1; in Dictionaries: 1
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अलख
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अलखनिरंजन
Meanings: 6; in Dictionaries: 3
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उठाण
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उठाणें
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नकीब
Meanings: 4; in Dictionaries: 3
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भूपाळी कृष्णाची - जाग रे जाग बापा । विश्र्व...
देवाला जागे करण्यासाठी पहाटे जी गाणी म्हणतात, त्यांना 'भूपाळी' म्हणतात. Poems that can be sung early morning while remembering God.
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मतभिन्नतेचे दोन विषय -
श्रीपतिनाथ विरचित श्रीसिद्धचरित्र ग्रंथ शके १८०५ (इ.स.१८८३) मध्ये लिहीला.
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दरक
Meanings: 9; in Dictionaries: 6
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दयाळनाथ
महाराष्ट्र कविचरित्र - लेखक जगन्नाथ रघुनाथ आजगांवकर.
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उभारा
Meanings: 14; in Dictionaries: 3
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नयन
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नाथगोपाळाचे सुलतान
संकीर्ण वाड्मय साहित्य.
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काष्ठ
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साव
Meanings: 24; in Dictionaries: 9
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युद्धखण्डः - अध्यायः ११
शिव पुराणात भगवान शिवांच्या विविध रूपांचे, अवतारांचे, ज्योतिर्लिंगांचे, शिव भक्तांचे आणि भक्तिचे विस्तृत वर्णन केलेले आहे.
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खंड १ - अध्याय २९
मुद्गल पुराणात श्री गणेशाच्या आठ अवतारांचे वर्णन आहे.
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प्रेमचंद की कहानियाँ - शांति
मुन्शी प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं।
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श्रीरामचंद्रयोगींचा शिष्यपरिवार
श्रीपतिनाथ विरचित श्रीसिद्धचरित्र ग्रंथ शके १८०५ (इ.स.१८८३) मध्ये लिहीला.
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श्रीवामनपुराण - अध्याय ७६
श्रीवामनपुराणकी कथायें नारदजीने व्यासको, व्यासने अपने शिष्य लोमहर्षण सूतको और सूतजीने नैमिषारण्यमें शौनक आदि मुनियोंको सुनायी थी ।
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श्री गणेश प्रताप - क्रीडाखंड अध्याय ४
सर्व कीर्तीने युक्त, सर्व देवाधिदेवांमध्ये श्रेष्ठ अशा अत्यंत प्रिय असलेल्या श्रीगजाननाच्या स्तुतीपर हा ग्रंथ आहे.
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ग्रामगीता - अध्याय तिसावा
जनसेवा हीच ईशसेवा मानणारे तुकडोजी महाराज हे समाजसुधारक संत होते.
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मन
Meanings: 188; in Dictionaries: 12
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कथाकल्पतरू - स्तबक १० - अध्याय १६
'कथा कल्पतरू' या ग्रंथात चार वेद, सहा शास्त्रे, अठरा पुराणे, तसेच रामायण, महाभारत व श्रीमद्भागवत हे हिंदू धर्मिय वाङमय ओवीरूपाने वर्णिलेले आहे.
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श्रीगुंडामाहात्म्य - अध्याय दुसरा
प्रस्तुत ग्रंथ शके १८३६ यावर्षी कै. गुरूभक्त व्यंकटरमणा मच्छावार यांनी प्रसिद्ध केला होता.
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समाधि प्रकरण - अध्याय सातवा
निरंजन माधवांच्या कवितेतील काव्यस्फूर्ति उच्च दर्जाची असून, भाषेत रसाळपणा व प्रसाद सोज्वळता आहे.
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श्री नवनाथ भक्तिसार पोथी - अध्याय २६
श्रीनवनाथभक्तिसार ही पोथी अत्यंत श्रेष्ठ असून परमप्रासादिक आहे व साधकाला विधिपूर्वक वाचन केले असता दिव्य अनुभव मिळतो.
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श्री गजानन विजय - अध्याय १९
भक्तांना व जनतेस श्री गजानन महाराजांच्या सहवासानें, मनःशांति मिळे व ईश्वरी लीला कळून येऊन उत्तम सदुपदेशाचा लाभ होई.
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