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  • शिवानन्दलहरी
    शिवानंदलहरी में भक्ति-तत्व की विवेचना, भक्त के लक्षण, उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी' श्रीआदिशंकराचा..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक १ ते ५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ६ ते १०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ११ ते १५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक १६ ते २०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक २१ ते २५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक २६ ते ३०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ३१ ते ३५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ३६ ते ४०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ४१ ते ४५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ४६ ते ५०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ५१ ते ५५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ५६ ते ६०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ६१ ते ६५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ६६ ते ७०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ७१ ते ७५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराच..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ७६ ते ८०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ८१ ते ८५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ८६ ते ९०
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
  • शिवानन्दलहरी - श्लोक ९१ ते ९५
    शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी..
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कात्यायन

  • n  Killing or beating. Ruining, destroying. 
  • n. एक आचार्य । इसके १. कात्य, २. कात्यायन, ३. पुनर्वसु, ४. मेधजित् तथा ५. वररुचि, ऐसे नामान्तर त्रिकांडकोश में दिये गये है । याज्ञवल्क्य का पौत्र तथा कात्यायनपुत्र वररुचि, अष्टाध्यायी का वार्तिककार होने की संभावना है । आंगिरस, कश्यप, कौशिक, व्द्यामुष्यायण तथा भार्गव गोत्र में भी का कात्यायन है । महाभाष्य इसके वार्तिको पर ही लिखा हुआ ग्रंथ है । इसके ग्रंथ 
  • न. ठार , मारणें ; बडविणें ; नुकसान करणें . ( क्रि०करणें ; काढणे .) 
  • पु. एक ऋषि व सूत्रकार . ०सूत्र - न यजुर्वेदाच्या एका शाखेंचे सुत्र . 
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Why Cows are considered secred in Hinduism?
Category : Hindu - Philosophy
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