TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!

शिवानन्दलहरी - श्लोक ९६ ते १००

शिवानंदलहरी में भक्ति -तत्व की विवेचना , भक्त के लक्षण , उसकी अभिलाषायें और भक्तिमार्ग की कठिनाईयोंका अनुपम वर्णन है । `शिवानंदलहरी ' श्रीआदिशंकराचार्य की रचना है ।


श्लोक ९६ ते १००

९६

धैर्याड्क .शेन निभृतं

रभसादाकृष्य भक्तिश्रृड्ख .लया ।

पुरहर चरणालाने

ह्रदयमदेभं बधान चिद्यन्त्रैः ॥९६॥

 

९७

प्रचरत्यभितः प्रगल्भवृत्त्या

मदवानेष मनःकरी गरीयान् ।

परिगृह्र नयेन भक्तिरज्जवा

परम स्थांणुपदं दृढं नयामुम् ॥९७॥

 

९८

सर्वालड्क .रयुक्तां सरलपदयुतां साधुवृत्तां सुवर्णा

सद्विस्संस्तूयमानां सरसगुणयुतां लक्षितां लक्षणाढ्याम् ।

उद्यद्‍भूषाविशेषामुपगतविनयां द्योतमानार्थरेखां

कल्याणीं देव गौरीप्रिय मम कविताकन्यकां त्वं गृहाण ॥९८॥

 

९९

इदं ते युक्तं वा परमशिव कारुण्यजलधे

गतौ तिर्यग्रूपं तव पदशिरोदर्शनधिया ।

हरिब्रह्याणौ तौ दिवि भुवि चरन्तौ श्रमयुतौ

कथं शंभॊ स्वामिन्कथय मम वेद्योऽसि पुरतः ॥९९॥

१००

स्तोत्रेणालमहं प्रवच्मि न मृषा देवा विरिच्चादयः

स्तुत्यानां गणनाप्रसड्र .समये त्वामग्रगण्यं विदुः ।

माहात्म्याग्रविचारणप्रकरणे धानातुषस्तोमवद्‍

धूतास्त्वां विदुरुत्तमोत्तमफलं शंभो भवत्सेवकाः ॥१००॥

Translation - भाषांतर

हे प्रिपुरारि ! मेरा ह्रदय मदमस्त हाथी जैसा है । इसे धैर्य के दृढ़ अंकुश से , शीघ्र ही जोर से खींचकर भक्तिरुपी श्रृंखला से , ब्रह्यज्ञान की बेड़ियाँ डालकर आपके चरणों के खंभे से बाँध दीजिये । ॥९६॥

हे परमेश्वर ! मेरा मन अत्यंत बलवान मदमस्त हाथी के समान है । यह बड़ा उद्दंड होकर इधर -उधर , चारों ओर , घूमता है । इसे चतुराई से वश में कर , भक्तिरुपी रस्सी से दृढ स्थान (स्थाणुपदं का अर्थ शिव के चरण भी है ) पर ले जाइये । ॥९७॥

( यह बड़ा सुन्दर और महत्वपूर्ण पद है । इसमें आचार्य नवयौवना कमनीय कन्या के साड्र . रुपक द्वारा इस स्तोत्र के गुणों का वर्णन कर रहे हैं । शब्दार्थ में सौभाग्यकांक्षिणी कन्या के गुणॊं का वर्णन है । यहाँ कविता के गुण बताये जा रहे हैं ।

हे गौरीशड्क .र देव , मेरी इस कविता -स्तोत्र -को स्वीकार कीजिये । यह शब्दालंकार और अर्थालंकारों से युक्त है। इसकी सरल शैली है । इसके सीधी वृत्ति है । इसमें उपयुक्त वृत्त हैं । उत्तम वर्ण हैं । इसकी मनीषियों ने प्रशंसा की है । इसमें नवरसों के गुण हैं । इसका उद्देश्य शुभ है । यह काव्य लक्षणॊं से युक्त है । उज्ज्वल विशेषताओं वाली है , और इसकी कोमल गति है । इसकी अर्थसारिणी बड़ी महत्त्वपूर्ण है । यह पाठकों के लिये कल्याणकारी है । ॥९८॥

हे करुणासागर परमकल्याणकारी शिव ! क्या आपके लिये यह उचित है कि आपके पैर और शिर का दर्शन करने की कामना से ब्रह्या और विष्णु को हंस और शूकर का टेढ़ा रुप धारण करना पड़ा।

तब भी वे आकाश और पृथ्वी के भीतर ढूँढ़ते -ढूँढ़ते थक गये । शंभो स्वामी ! आप ही बताइये कि मेरे समक्ष आप किस भाँति प्रकट होंगे । ॥९९॥

अब स्तोत्र की समाप्ति । मैं बढ़ा -चढ़ा कर असत्य बात नहीं कह रहा हूँ । आपके सेवक ब्रह्या आदि देवता जब स्तुतियोग्यों की गणना करने लगे तो आपको ही अग्रगण्य स्वीकार किया । माहात्म्य में अग्रणी -प्रथमपूज्य -के विचार प्रकरण में दुसरे देवता धान के भूसे के समान उड़ गये , व्यर्थ समझे गये । शंभो आपको ही उत्तमोत्तम फल आदर्श -स्वीकार किया गया । ॥१००॥


References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:54:59.0530000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

east

  • स्त्री. पूर्व 
  • स्त्री. पूर्व 
  • पु./अ.व. पूर्वेकडील देश 
RANDOM WORD

Did you know?

Navchandi Paath explain why it should be done?
Category : Hindu - Puja Vidhi
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site

Ved - Puran
Ved and Puran in audio format.

Latest Pages

Status

  • Meanings in Dictionary: 644,289
  • Dictionaries: 44
  • Hindi Pages: 4,328
  • Total Pages: 38,982
  • Words in Dictionary: 302,181
  • Tags: 2,508
  • English Pages: 234
  • Marathi Pages: 22,630
  • Sanskrit Pages: 11,789
  • Other Pages: 1

Suggest a word!

Suggest new words or meaning to our dictionary!!

Our Mobile Site

Try our new mobile site!! Perfect for your on the go needs.