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बुध

See also:  बुंधाड , बुंधारा , बुधधा
A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
बुध  mfn. mfn. awaking (cf.उषर्-बुध)
intelligent, clever, wise, [Mn.]; [MBh.] &c.
बुध  m. m. a wise or learned man, sage, ib.
a god, [L.]
a dog, [L.]
सौम्य   N. of a descendant of सोम (and hence also called , सौमायन, author of [RV. x, 1], and father of पुरू-रवस्; identified with the planet Mercury)
Mercury (regarded as a son of सोम or the moon), [PañcavBr.]; [MBh.]; [R.] &c. of a descendant of अत्रि and author of [RV. v, 1]; [Anukr.]
of a son of वेग-वत् and father of तृण-बिन्दु, [Pur.]
of various authors, [Cat.]

बुध [budha] a.  a. [बुध्-क]
Wise, clever, learned.
Intelligent.
Waking, awaking.
धः A wise or learned man; निपीय यस्य क्षितिरक्षिणः कथां तथाद्रियन्ते न बुधाः सुधामपि [N.1.1.]
A god; [N.1.1.]
A dog.
The planet Mercury; रक्षत्येन तु बुधयोगः [Mu.1.6] (where बुध has sense 1 also); [R.1.47;13.76.]
-धा   Spikenard.-धे ind. On a Wednesday. -Comp.
-अष्टमी  N. N. of a festival.
-जनः   a wise or learned man.
-तातः   the moon.
-दिनम्, -वारः, -वासरः   Wednesday.
-रत्नम्   an emerald.
सानुः a leaf; L. D. B.
the presiding deity in a sacrifice.
-सुतः   an epithet of Purūravas.

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
बुध  m.  (-धः)
1. BUDDHA, the son of the moon and regent of the planet MERCURY, with whom he is identified.
2. A wise or learned man, a sage.
 f.  (-धा) Indian spikenard.
E. बुध् to know or understand, aff. क .
See also: बुध् - क .

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
budha ind Commonly बुद्ध ind
The planet Mercury or the Regent of it.
budha a S Wise, intelligent, sensible.

वि.  शहाणा ; विद्वान ; ज्ञाता ; पंडित . बुध अन्योन्य म्हणति कां जातां या हाचि नाक - वास वसा । - मोसभा १ . ८ . - स्त्री . बुद्धि पहा . म्ह० आगळ बुध वाणिया पाछळ बुध बामणिया . विद्येसंबंधीं प्रत्येक गोष्टींत दक्षिणी लोकांचें पाऊल पुढें असून इतरांचें मागें असे , ती स्थिति बदलून आमचे गुजराथी बंधु आगळ बुध बाणिया पाछल बुध बामणिया ही म्हण खरी करुं पाहत आहेत . - निबंधचंद्रिका . [ सं . ]
 पु. सूर्यमालेंतील एक अंतर्ग्रह ; नवग्रहांतील चवथा . हा सूर्याच्या अति जवळ आहे . [ सं . ]
वि.  ( व्यापारी , सांकेतिक ) पांच ( भाजीपाल्याच्या व्यवहारांत योजतात ).
अ.  संख्यावाचक विशेषणापूर्वी योजावयाचा शब्द . ( विरु . ) बुद्ध पहा .
०वंत  पु. 
०वार  पु. सात वारांपैकीं एक वार ; सौम्यवासर . [ सं . ] म्ह० नवर्‍यास नाहीं थांग बुधवारचें लग्न . बुधवारणें अक्रि . ( म्हैस ) बुधवारीं विणें . हें वेत अशुभ समजून वासरुं ब्राह्मणास दान देतात . [ बुधवार ] बुधाष्टमी स्त्री .
शुक्ल पक्षांत बुधवारीं येणारी अष्टमी .
( कों . ) पुढारी ; महाजन . - ख्रिपु .
स्त्रियांचें एक व्रत . व्रत आचरणार्‍या स्त्रीनें या व्रताची कथा जेवतांना ऐकावयाची असते व कथेंत नरकाचा उल्लेख येतांच जेवतांना उठावयाचें असतें . क्वचित अंचवून पुन्हां जेवावयाचा परिपाठ आहे . [ सं . बुध + अष्टमी ]
कर्नाटकांतील बेडगू जातींतील जात . पाटील . - गांगा .
बुद्वंत पहा .

बुध n.  एक ग्रह, जो बृहस्पति की पत्नी तारा का चन्द्रमा से उत्पन्न पुत्र था [पद्म. सृ.८२] । यह बृहस्पति पत्नी का पुत्र था, इस कारण इसे ‘बृहस्पतिपुत्र’ नामांतर प्राप्त है । क्यों कि, यह चन्द्रमा से उत्पन्न हुआ, इसलिये इसे चन्द्र (सोम) वंश का उत्पादक कहा जाता है [पद्म.उ.२१५] । इसकी पत्नी का नाम इला था, जो मनु की कन्या थी । इला से इसे पुरुरवस नामक पुत्र उत्पन्न हुआ [म.अनु.१४७-२६-२७] । यही पुरुरवस् सोमवंश का आदि पुरुष माना जाता है [पद्म. सृ. ८, १२];[ दे. भा.१.१३] । ‘भविष्य’ में इसे चन्द्र एवं रोहिणी का पुत्र कहा गया है ।
बुध n.  बृहस्पति की दो पत्नियॉं थीं, जिनमें से दूसरी का नाम तारा था । सोम ने तारा का हरण किया था । एवं उससे ही उसे बुध नामक पुत्र हुआ [ऋ.१०.१०९] । पुराणों में भी यह कथा अनेक बार आयी है [वायु.९०.२८-४३];[ ब्रह्म.९.१९-३२];[ मत्स्य.२३];[ पद्म. सृ.१२.३३-५८] । उक्त ग्रन्थों में निर्दिष्ट बुध के जम की कथा रुपकात्मक प्रतीत होती है, एवं आकाश में स्थित गुरु (बृहस्पति), चन्द्र, बुध आदि ग्रहनक्षत्रों को व्यक्ति मान कर इस कथा की रचना की गयी है । विष्णुधर्म में इसके जन्म की कथा कुछ दूसरी भॉंति दी गयी है । कश्यप ऋषि की धनु नामक स्त्री थी, जिससे उसे रज नामक उत्पन्न हुआ पुत्र था । रज का विवाह वरुण की कन्या वारुनी से हुआ । एक बार समुद्र में स्नान करते समय, वारुणी उसी में डूब गयी । उसे डूबा हुआ देख कर, उसे ढूँढने के लिये चन्द्रमा ने जल में प्रवेश किया । उसके प्रवेश करते ही समुद्र में हिलोर्रें उठने लगी, और उससे एक बालक बाहर निकला । वही बालक बुध था । बृहस्पतिपत्नी तारा ने इस बालक बुध के संरक्षण का भार लिया, किन्तु बाद को असुविधा के कारण इसे चन्द्रपत्नी दाक्षायणी को दे दिया [विष्णुधर्म.१.१०६] । बृहस्पति ने इसका जातिकर्मादि संस्कार किये थे । यह परम विद्वान हो कर ‘हस्तिशास्त्र’ में विशेष पारंगत था [पद्म. सृ.१२] । भास्कर संहिता के अन्तर्गत ‘सर्वसारतंत्र’ का यह रचयिता माना जाता है [ब्रह्मवै. १६]
बुध n.  एक बार इसने व्रत किया, एवं उसकी समाप्ति होने पर यह कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति के पास भिक्षा के लिए गया और भिक्षा की याचना की । भिक्षा न मिलने पर इसने अदिति को शाप दिया, जिस कारण उसे एक मृत-अण्ड पैदा हुआ । उस अण्ड से कालोपरान्त श्राद्धदेव की उत्पत्ति हुयी । मृत अण्ड से पैदा होने के कारण, उसे ‘मार्तड’ नामांतर प्राप्त हुआ [म.शां.३२९.४४] । भागवत में इसका विवरण एक ग्रह के रुप में दिया गया है । बुध ग्रह सौरमण्डल में शुक्रग्रह से दो लाख योजन की दूरी पर स्थित माना जाता है । यह शुभग्रह अवश्य है; किन्तु जब सूर्य का उल्लंघन कर जाता है, तब अनावृष्टि द्वारा संसार को त्रस्त करता है [भा.५.२२]
बुध (आत्रेय) n.  एक वैदिक सूक्तद्रष्टा [ऋ. ५.१]
बुध (सौम्य) n.  एक वैदिक सूक्तद्रष्टा [ऋ.५.१.]
बुध (सौमायन) n.  पंचविंश ब्राह्मण में निर्दिष्ट एक आचार्य, जिसके द्वारा यज्ञदीक्षा ली गयी थी [पं.ब्रा.२४.१८.६] । सोम का वंशज होने से, इसे ‘सौमायन’ पैतृक नाम प्राप्त हुआ होगा ।
बुध II. n.  एक वानप्रस्थी ऋषि, जिसने वानप्रस्थ धर्म का पालन एवं प्रसार कर स्वर्गलोक प्राप्त किया था [म.शां.२३९.१७]
बुध III. n.  (सू. दिष्ट.) एक राजा, जो विष्णु एवं वायु के अनुसार वेगवत् राजा का पुत्र था । इसे ‘बंधु’ नामांतर भी प्राप्त है ।
बुध IV. n.  एक स्मृतिकार एवं धर्मशास्त्रज्ञ, जिसका निर्देश अपरार्क, कल्पतरु, जीमूतवाहनकृत ‘कालविवेक’ आदि ग्रन्थों में प्राप्त है । इसके द्वार रचि धर्मशास्त्र का ग्रन्थ काफी छोटा है, जिसमें निम्नलिखित विषयों का विवेचन करते हुए, इसने उन पर अपने विचार प्रकट किये हैः---गर्भाधान से लेकर उपनयन तक के समस्त संस्कार, विवाह, तथा उसके प्रकार, पंच-महायज्ञ, श्राद्ध, पाकयज्ञ, हविर्यज्ञ, सोमयाग, एवं ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं संन्यासियों के कर्तव्य आदि । बुध के द्वारा रचित उक्त ग्रन्थ प्राचीन नहीं प्रतीत होता । उसके अनुशीलन से यह पता चलता है कि, इसने पूर्ववर्ती धर्मशास्त्रवेत्ताओं द्वारा कथित सामग्री को संग्रहित मात्र किया है । इस ग्रन्थ के सिवाय ‘कल्पयुक्ति’ नामक इसका एक अन्य ग्रन्थ भी प्राप्त है (C.C)
बुध IX. n.  ०. द्रविण देश में रहनेवाला एक ब्राह्मण । इसकी पत्नी अत्यंत दुराचारिणी थी, किंतु दीपदान के पुण्यकर्म के कारण, उसके समस्त पाप नष्ट हो गयें [स्कंद. २४.७]
बुध V. n.  मगध देश का एक राजा, जो हेमसदन राजा का पुत्र था । इसकी माता का नाम अंजनी था [स्कंद.१.२.४०]
बुध VI. n.  एक राक्षस, जो पुलह एवं श्वेता के पुत्रों में से एक था ।
बुध VII. n.  सुतप देवों में से एक ।
बुध VIII. n.  गौड देश में रहनेवाला एक ब्राह्मण, जो दुर्व एवं शाकिनी का पुत्र था । यह अत्यंत दुराचारी, दुर्व्यसनी एवं पाशविक वृत्तियों का था । एक बार शराब पी कर वेश्यागमन के हेतु यह एक वेश्या के यहॉं आ कर रातभर वहीं पडा रहा । इसके घर वापस न लौटने पर, इसका पिता ढूंढता हुआ इसके पास पहुँचा, एवं इसकी निर्भत्सना की । उसके इस प्रकार कहने पर, इसने तत्काल अपने पिता को लात से मार कर उसका वध किया । बाद को जब यह घर आया, तब इसको माता ने अपनी बुरी आदतों को छोडने के लिये इसे समझाया । इसने उस बेचारी का भी वध किया । कालांतर में इस हत्यारे ने अपनी पत्नी को भी न छोडा, तथा उसे भी मार कर खतम कर दिया । एक दिन इसने कालभी ऋषि की सूलभा, नामक पत्नी को देखा, तथा तुरंत ही उसका हरण कर उसके साथ बलात्कार किया । इससे क्रुद्ध हो कर ऋषिपत्नी ने शाप दिया, ‘तुम कोढी हो जाओं’। फिर यह कोढी हो कर इधर उधर घूमने लगा । घूमते घूमतें यह शूरसेन राजा के नगर आ पहुँचा, जहॉं वह अपनी संपूर्ण नगरी के साथ विमान में बैठकर स्वर्ग जाने की तैयारी में था । विमान चालके ने लाख प्रयत्न किया, लेकिन वह उड न सका । तब देवदूतों ने कोढी बुध को दूर भगा देने के लिये शूरसेन से प्रार्थना की, क्यों कि, इस हत्यारे की पापछाया के ही कारण विमान पृथ्वी से खिसक न सका । शूरसेन दयालु प्रकृति का धर्मज्ञ शासक था । अतएव उसने बुध को देखा, एवं गजानन नामक चतुरक्षरी मंत्र से इसके कोढ को समाप्त कर, इसे भी स्वानंदापुर ले जाने की व्यवस्था की [गणेश.१.७६]
बुध X. n.  १. एक अग्निहोत्र करनेवाला ब्राह्मण, जो मधुबन में रहनेवाले शाकुनि नामक ऋषि का पुत्र था [पद्म. स्व.३१]

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
BUDHA I   Son of Candra. 1) Birth. Bṛhaspati the teacher-priest of the devas had a very beautiful wife named Tārā. One day seeing the handsome figure of Candra, Tārā became amorous. Candra was the Disciple of Bṛhaspati. It was not right on the part of the wife of the teacher to feel amorous towards a disciple. Bṛhaspati came to know of the affair and sending for Candra asked him to return his wife. Both Candra and Tārā did not pay any heed to Bṛhaspati. Both sides were about to engage in a battle. The devas arrayed themselves on both sides. Seeing that this was not an honourable thing some devas tried for a compromise. Finally Candra returned Tārā to Bṛhaspati. At this time Tārā was pregnant. Both Candra and Bṛhaspati claimed the paternity of the child in the womb of Tārā, who witnessed that Candra was the father of the child. All accepted the words of Tārā. Budha was the child Tārā gave birth to.
2) Marriage and birth of a child.
Budha grew up to be a youth. During the period the King Sudyumna one day entered Kumāravana (a forest) and was changed to a woman. When the King became a woman the name adopted was Ilā, who grew amorous of Budha. The famous King Purūravas was the son born to them. (For more information see Ilā, Candra and Purūravas).
3) Other information
(1) Budha wears a necklace of Rudrākṣa beads (Elaeo Carpus Seeds) and has a bow. [Agni Purāṇa, Chapter 51].
(2) Candra performed the christening ceremony of Budha. [Bhāgavata Skandha 9].
(3) Budha is a luminous member of the assembly of Brahmā. (M.B. Sabha Parva, Chapter 11, Stanza 29).
BUDHA III   A scientist on ethics. He has written a book called Dharmaśāstra on the different kinds of rites of consecration, initiation etc. from formation in the womb till Upanayana (investiture with the Brahmā string), different kinds of marriages, Pañcamahāyaj- ñas (the five essential sacrifices) Śrāddha (offering to the manes), Pākayajña (simple domestic sacrifices), Somayāga (drinking the moon-plant juice at the Soma sacrifice) and such other matters of ethics.
BUDHA IV   A Brāhmaṇa who lived in Gauḍadeśa. Budha who was the incarnation of all vices drank too much and spent a whole night lying unconscious on the veranda of the house of a harlot. His father became anxious about him as he had not returned though the night had advanced much. He searched everywhere and finally came to the place where he was lying unconscious. He reviled the son, who getting angry killed his father then and there. After that he returned home. His mother advised him to leave off his vices. His wife shed tears before him. Seeing that his mother and wife were impediments on his way, he put an end to their lives. Once this Brāhmaṇa carried away Sulabhā the beautiful wife of hermit Kālabhūti and ravished her. Sulabhā cursed him and made him a leper. Budha wandered about and reached the city of King Śūrasena. On that day the King was about to go to Heaven with the entire city by aeroplane. However hard the pilots might try the plane would not move an inch. Then the devas told the King: “Drive away the leper there. The vices of that sinful murderer have made the plane stationary.” Śūrasena who was kind and righteous, neared the leper and cured him with caturākṣarīmantra (a spell of four letters) and got ready to take him also to heaven. [Gaṇeśa Purāṇa 1:76].

बुद्धि पहा.

Aryabhushan School Dictionary | mr  en |   | 
See बुडखा.
 m  The planet Mercury. A wise man.

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  • कहाणी बुध-बृहस्पतीची
    हिंदू धर्मातील पुराणे अतिप्राचीन असून त्यातील कहाण्या उच्च संस्कृतीच्या प्रतिक आहेत.
  • बुध पूजन
    आकाशातील नवग्रह मनुष्याच्या जीवनाची दिशा आणि दशा बदलतात म्हणून त्या ग्रहाच्या स्वामीची अथवा देवतेची शांती केल्यास, त्याला आयुष्यभर स्वास्थ्य, सुख, ऐश..
  • बुधाची जन्मकथा
    कुंडलीतील बुध ग्रहाचा कोप शांत करण्यासाठी हे व्रत करतात. जीवनातील सर्व प्रकारचे वैभव आणि सुख-संपत्ती प्राप्त करण्यासाठी या व्रताची कथा ऐकून..
  • बुधाची विवाहकथा
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  • व्रत शुभ्र बुधवारचे
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  • बुधाची उपासना
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  • बुधाच्या भक्तीचे उपाय
    कुंडलीतील बुध ग्रहाचा कोप शांत करण्यासाठी हे व्रत करतात. जीवनातील सर्व प्रकारचे वैभव आणि सुख-संपत्ती प्राप्त करण्यासाठी या व्रताची कथा ऐकून  विध..
  • नऊ ग्रहांतील बुध
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  • बारा राशी आणि बुध
    कुंडलीतील बुध ग्रहाचा कोप शांत करण्यासाठी हे व्रत करतात. जीवनातील सर्व प्रकारचे वैभव आणि सुख-संपत्ती प्राप्त करण्यासाठी या व्रताची कथा ऐकून  विध..
  • बुधाची थोरवी
    कुंडलीतील बुध ग्रहाचा कोप शांत करण्यासाठी हे व्रत करतात. जीवनातील सर्व प्रकारचे वैभव आणि सुख-संपत्ती प्राप्त करण्यासाठी या व्रताची कथा ऐकून  विध..
  • बुध अष्टोत्तरशतनामवलिः
    अष्टोत्तरशतनामावलिः म्हणजे देवी देवतांची एकशे आठ नावे, जी जप करताना म्हणावयाची असतात. नावे घेताना १०८ मण्यांची जपमाळ वापरतात.Ashtottara shatanamavali..
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