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बभ्रु

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
बभ्रु  mfn. mf(, or ऊ॑)n. (according to, [Uṇ. i, 23 fr.]भृ) deep-brown, reddish-brown, tawny, [RV.] &c. &c.
bald-headed, [L.]
बभ्रु  m. m. a kind of large ichneumon, [L.]
any ichneumon, [MBh.]; [Hariv.]
a man with deep-brown hair, [Mn. iv, 30] (others ‘a reddish-brown animal’ or ‘the सोम creeper’)
चातक   Cuculus Melanoleucus (= ), [L.]
a species of vegetable, [L.]
N. of कृष्ण-विष्णु or of शिव, [MBh.]
a king, prince, ib.
बभ्रुक   a partic. constellation (= ), [VarBṛS.] Sch.
गर्गादि   N. of sev. men (cf.g.)
of a descendant of अत्रि (author of [RV. v, 30]), [Anukr.] (also with the patr.दैवावृध and कौम्भ्य, [Br.]; [MBh.]; [Pur.])
of a disciple of शौनक, [VP.]
of a son of विश्वा-मित्र, [MBh.] (also pl.[Hariv.])
of a son of विश्व-गर्भ, [Hariv.]
of a वृष्णि, [MBh.]; [Hariv.]
of a son of द्रुह्यु, [Hariv.]
of a son of रोम-पाद or लोम-पाद, ib.
of a गन्धर्व, [R.]
-देश   of a country (= ), [L.]
See also: देश
बभ्रु  f. () f. a reddish-brown cow, [BhP.]
बभ्रु  n. n. a dark-brown colour or any object of that , [W.]
बभ्रु   [cf.Gk.φρύνη, φρῦνος; Lith.béras, brúnas; Germ.brûn, braun; Eng.brown.]

बभ्रु [babhru] a.  a. [भृ-कु द्वित्वम्; बभ्र्-उ वा [Uṇ.1.21]]
Deepbrown, tawny, reddish-brown; ज्वालाबभ्रुशिरोरुहः [R.15.] 16;19.25; बबन्ध बालारुणबभ्रु वल्कलम् [Ku.5.8.]
Baldheaded through disease.
भ्रुः Fire.
An ichneumon; सखिभिर्न्यवसत् सार्धं व्याघ्राखुवृकबभ्रुभिः [Mb.1.14.27.]
The tawny colour.
A man with tawny hair.
 N. N. of a Yādava; आलप्यालमिदं बभ्रोर्यत् स दारानपाहरत् [Śi.2.1.]
An epithet of Śiva.
Of Viṣṇu.
The Chātaka bird.
A sweeper, cleaner.
 N. N. of a country. -n.
A tawny or brown colour.
Any object of a brown colour.
-भ्रूः  f. f. A reddish-brown cow (कपिला); अजानन्नहनद्बभ्रोः शिरः शार्दूलशङ्कया [Bhāg.9.2.6.]
Comp. धातुः gold.
red chalk (गौरिक), a kind of ochre.
-वाहनः  N. N. of a son of Arjuna by Chitrāṅgadā. [The sacrificial horse let loose by king Yudhiṣṭhira and guarded by Arjuna entered, in the course of its wanderings, the country of Maṇipura, which was then ruled by Babhruvāhana, unequalled in prowess. The horse was taken to the king; but when he read the writing on the plate on its head, he knew that it belonged to the Pāṇḍavas, and that his father Arjuna had arrived in the kingdom; and, hastening to him, respectfully offered his kingdom and his treasures along with the horse. Arjuna, in an evil hour, struck the head of Babhruvāhana and upbraided him for his cowardice saying that if he had possessed true valour and had been his true son, he should not have been afraid of his father and submitted to him so meekly. At these words the brave youth was exceedingly irritated and discharged a crescent-shaped arrow at Arjuna which severed his head from his body. He was, however, restored to life by Ulūpī who happened to be then with Chitrāṅgadā; and having acknowledged Babhruvāhana as his true son, he resumed his journey.]

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
बभ्रु  mfn.  (-भ्रुः-भ्रुः or -भ्रूः-भ्रु)
1. Large, great.
2. Tawny, &c.
3. Bald- headed through disease.
 m.  (-भ्रुः)
1. A name of VISHṆU.
2. SĪVA. 3. AGNI or fire.
4. A large ichneumon.
5. The name of a Muni or holy sage.
6. A rat.
 n.  (-भ्रु)
1. A tawny or brown colour.
2. Any object of that colour.
E. भृ to fill, aff. कु, and the initial repeated; or बभ्र, उ aff.
See also: भृ - कु - बभ्र -

बभ्रु n.  (सो. पुरुरवस्) एक राजा, जो ययाति का पौत्र एवं द्रुह्यु का पुत्र था । इसके पुत्र का नाम सेतु था । कई ग्रन्थों में इसे बभ्रुसेतु भी कहा गया है, पर वास्तविकता यह है कि, सेतु इसके भाई का नाम था । वायु में इसके पुर का नाम रिपु दिया गया है [वायु.९९.७]
बभ्रु (काश्य) n.  काशी का सुविख्यात राजा, जिसे श्रीकृष्ण की कृपा से राज्यश्री का लाभ हुआ था [म.३.२८.१३]
बभ्रु (कौम्भ्य) n.  तांडय ब्राह्मण में निर्दिष्ट एक सामद्रष्टा [तां.ब्रा.१५.३.१३]
बभ्रु (दैवावृध) n.  (सो. क्रोष्टु.) एक यादववंशीय राजा, जो सात्त्वतपुत्र देवावृध का पुत्र था । इसकी माता का नाम पर्णाशा था । इसके नाम के लिये ‘भानु’ पाठभेद प्राप्त है । यह राजर्षि यज्ञविद्या में बडा ही निपुण था । सहदेव सार्ञ्जय ने इसे सोम बनाने की विशेष पद्धति प्रदान की थी । ऐतरेय ब्राह्मण में इसे पर्वत एवं नारद का शिष्य कहा गया है [ऐ.ब्रा.७.३४] । सायणाचार्य इसे दो अलग व्यक्ति मानते है । यह बडा ही दयालु एवं उपकारी राजा था । इसने लोगों को दान भी प्रचुर यात्रा में दिये थे । इसकी उदारता के कारण ही, इसे दानपति नाम प्राप्त हुआ था । इसके पुण्यकर्मो के कारण, इसके वंश का उद्धार हुआ [भा.९.२४.१०] । इसके वंश के नृप भोज ‘मार्तिवतक’ नाम से सुविख्यात हैं [ब्रह्म.१५.३५-४५.] । महाभारत में इसे वृष्णिवंशीय यादव, एवं यदुवंशियों के सत मंत्रिपुंगवों में से एक कहा गया है [म.स.१३.१५९] । सुभद्राहरण के समय रैवतक पर्वत पर हुए महोत्सव में यह उपस्थित था [म.आ.२११.१०] । एकबार श्रीकृष्ण से मिलने यह द्वारका गया था, उस समय शिशुपाल ने इसके पत्नी का हरण किया था [म.स.४२.१०] । द्वारका में हुए ‘यादवी युद्ध’ के समय, इसने श्रीकृष्ण के पास ही बने हुए पेयपदार्थो का सेवन किया था [म.मौ.४.१५] । द्वारका में हुए यादवी युद्ध में सारे यादव लोगों का संहार हो गया, एवं द्वारकानिवासी यादव स्त्रियों की जान खतरे में आ गयी । उस समय दस्यु आदि चोर धनादि के लोभ से आक्रमण ना करे, इसलिये यादव स्त्रियों का रक्षण करने का काम, श्रीकृष्ण नें इसे एवं दारुक को कहा था । किण्तु इसके पहले ही मौसलयुद्ध में फेंक गये एक मूसल से इसकी मृत्यु हो गयी [म.मौ.५.५-६]
बभ्रु II. n.  (सो. क्रोष्टु.) एक राजा, जो रोमपाद का पुत्र था । पद्म में इसे लोमपाद का पुत्र कहा गया है, और इसके पुत्र का नाम धृति बताया गया है [पद्म. सृ.१३] । कई ग्रन्थों में इसके पुत्र का नाम कुति भी मिलता है ।
बभ्रु III. n.  विश्वामित्र ऋषि के ब्रह्मज्ञानी पुत्रों में से एक [म.अनु.४.५०] । इसके वंश के लोग भी ‘बाभ्रव्य’ नाम से ही प्रसिद्ध हुए [ब्रह्म.१०.६१];[ वायु.९१.९९]
बभ्रु IV. n.  सात्वतवंशीय अक्रूर राजा का नामांतर [ब्रह्मांड.१.७१.८१];[ म.शां.८२.१७]; अक्रूर देखिये ।
बभ्रु IX. n.  एक स्मृतिकार, जो बभ्रुस्मृति का रचियता कहा जाता है (C.C) ।
बभ्रु V. n.  एक आचार्य, जो भागवत के अनुसार, व्यास के अथर्थवेदशिष्य परंपरा के आंगिरस शुनक का शिष्य था । इसे आंगिरस ने अथर्वसंहिता प्रदान की थी [भा.१२.७.३]; व्यास देखिये ।
बभ्रु VI. n.  मत्स्यनरेश विराट का एक पुत्र [म.उ.५६.३३]
बभ्रु VII. n.  कश्यप कुलोत्पन्न संपाति का ज्येष्ठ पुत्र । इसके भाई का नाम शीघ्रग था [पद्म. सृ.६.६८]
बभ्रु VIII. n.  ऋषभ पर्वत पर रहनेवाला एक गंधर्व ।

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
BABHRU I   A maharṣi of the line of preceptors from Vyāsa. (See Guruparamparā).
BABHRU II   A Yādava of the Vṛṣṇi dynasty. He was one of the ablest of Yādava warriors. [Chapter 14, Dākṣiṇātya Pāṭham, M.B.]. Even in his old age he used to do penance. Śiśupāla carried away his wife when once he was away in Dvārakā. He was a friend of Śrī Kṛṣṇa. He died when hit by an arrow from Vyāsa. [Chapter 4, Mausala Parva, M.B.].
BABHRU III   A king of Kāśī. By the help of Śrī Kṛṣṇa he attained Rājyalakṣmī. [Chapter 28, Udyoga Parva, M.B.].
BABHRU IV   A son of King Virāṭa. [Śloka 33, Chapter 57, Udyoga Parva, M.B.].
BABHRU V   One of the sons of Viśvāmitra who were Brahmavādīs. [Śloka 50, Chapter 4, Anuśāsana Parva, M.B.].

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