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आदित्य

See also :
ĀDITYA
āditya m S The sun. 2 A deity of a class, a form of Súrya. 3 A deity gen.
 पु. 
सूर्य ; रवि . वीरांच्या अभिमाना झाला अस्त । माध्यान्हीं आला आदित्य । - एरुस्व ७ . ६४ .
बारा आदित्य ( देवता )- धातु , मित्र , अर्यमन , रुद्र , वरुण , सूर्य , भग , विवस्वत , पूषन , सवितृ , त्वष्टृ , व विष्णु हीं बारा महिन्यांतील सूर्याचीं बारा रुपें आहेत .
अदितिपुत्र ; ( सामा . ) देवता किंवा देव .
सूर्यकमळ . आदित्याचीं झाडें । सदा सन्मुख सूर्याकडे । - ज्ञा १८ . ८६५ . [ सं . ]
०वार  पु. रविवार . त्याची छत्री स्त्री . अळंबें ; एक वनस्पति . त्याची तुळस स्त्री . एक तुळशीसारखी वनस्पति .
n.  वैवस्वत मन्वंतर में देवताओं के समूह का नाम । ऋग्वेद में इसके लिये छः सूक्त है । एक स्थान में केवल अदित्यसंघ में छः देवता हैं [ऋ.२.२७.१] । वे इस प्रकार हैं-१.अंश,२. भग,३. धातृ, ४. इन्द्र,५. विवस्वत्, ६. मित्र, ७. वरुण तथा ८. अर्यमन् [तै. ब्रा. १.१.११.३.८] । वेदोत्तर वाङ्मय में बारह माहों के बारह आदित्य या सूर्य प्रसिद्ध हैं (कश्यप देखिये) । उन में विष्णु सर्वश्रेष्ठ माना गया है । ऋग्वेद में सूर्य को आदित्य कहा गया है । इसलिये सूर्य सातवां और मार्ताण्ड आठवां आदित्य होगा । गाय आदित्य की बहन हैं [ऋ.८.१०१.१५] । इन्द्र यह अदिति का पुत्र अर्थात् आदित्यों में से एक है [ऋ.७.८५.४];[ मै. सं. २.१.१२] । परंतु बारह आदित्यों से इन्द्र अलग है [श. ब्रा.११.६.३.५] । आदित्य का उल्लेख वसु, रुद्र, मरुत, अंगिरस्, ऋभु तथा विश्वदेव इन देवताओं के साथ कई स्थानों पर आया है फिर भी वह सब देवताओं का सामान्य नाम है । आदित्यों का वर्णन सब देवताओं के सामान्य वर्णनों से मिलताजुलता होते हुए भी आदित्यों में प्रमुख मित्रावरुणा से नही मिलता । सर्वाधार, सर्वपालक, मन के विचार जाननेवाले, पापी जनों को सजा देनेवाले तथा रोग दूर कर दीर्घायु देनेवाले ऐसा इनका वर्णन है । ब्रह्मदेव को उद्देशित कर, अदिति ने चांवल पकाया, ताकि, उसकी कोख से साध्य देव उत्पन्न हो । आहुति दे कर बचा हुआ चांवल उसने खाया जिससे धाता एवं अर्यमा दो जुडवें पुत्र हुए । दुसरी बार मित्र तथा वरुण तीसरी बार अंश एवं भग तथा चौथे बार इन्द्र एवं विवस्वान हुए । अदिति के बारह पुत्र ही द्वादशादित्य या साध्य नामक देव है [तै. ब्रा.१.१.९.१] । आदित्य से सामवेद हुआ [ऐ.ब्रा.२५.७];[ सां. ब्रा.६.१०];[ श. ब्रा.११.५.८];[ छां. उ.४.१७.२];[[ जै. उ. ब्रा.३.१५.७]];[ पं. ब्रा. ४.१];[ छां. उ.१७.२];[[ जै. उ. ब्रा.३.१५.७]];[ पं. ब्रा. ४. १];[ गो. ब्रा.१.६] । पुराणों में आदित्य , कश्यप तथा अदिति के पुत्र है (कश्यप देखिये) । १. अंशुमान (आषाढ माह, किरण १५००), २. अर्यमन् [वैशाख, १३००]. ३. इंद्र (आश्विन, १२००), ४. त्वष्ट्ट (फाल्गुन, ११००), ५. धातृ [कार्तिक, ११००], ६. पर्जन्य [श्रावण, १४००], ७. पूषन्. (पौष), ८. भग [माघ, ११००], ९. मित्र [मार्गशीर्ष, ११००], १०. वरुण [भाद्रपद, १३००], ११. विवस्वत् (ज्येष्ठ, १४००), १२. विष्णु [चैत्र, १२००] । इनके कार्य भी बताये है [भवि. ब्रह्म. ६५, ७४,७८];[ विष्णु. १.१५.३२] । अंशुमान के लिये अंश या अंशु ऐसा पाठ है । विष्णु के लिये उरुक्रम पाठ है । परंतु स्कंदपुराण में बिलकुल भिन्न सूची दी गयी है । १. लोलार्क, २. उत्तरार्क, ३. सांबादित्य, ४. द्रुपदादित्य, ५. मयूखादित्य, ६. अरुणादित्य, ७. वृद्धादित्य, ८. केशवादित्य, ९. विमलादित्य, १०. गंगादित्य, ११. यमादित्य, १२. सकोलकादित्य [स्कंद. २.४.४६.]

(द्वादश) आदित्य
१. विवस्वान्, २. अर्यमा, ३. पूषा, ४. त्वष्टा, ५. सविता, ६. भग, ७. धाता, ८. विधाता, ९. वरुण, १०. मित्र, ११. शक्र, १२. उरुक्रम.
 m  The sun.
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

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