हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|भजन|तुलसीदास भजन|भजन संग्रह १|
ममता तू न गई मेरे मन तें ...

भजन - ममता तू न गई मेरे मन तें ...

तुलसीदास हिन्दीके महान कवी थे, जिन्होंने रामचरितमानस जैसी महान रचना की ।


ममता तू न गई मेरे मन तें ॥

पाके केस जनमके साथी, लाज गई लोकनतें ।

तन थाके कर कंपन लागे, ज्योति गई नैननतें ॥१॥

सरवन बचन न सुनत काहुके बल गये सब इंद्रिनतें ।

टूटे दसन बचन नहिं आवत सोभा गई मुखनतें ॥२॥

कफ पित बात कंठपर बैठे सुतहिं बुलावत करतें ।

भाइ-बंधु सब परम पियारे नारि निकारत घरतें ॥३॥

जैसे ससि-मंडल बिच स्याही छुटै न कोटि जतनतें ।

तुलसीदास बलि जाउँ चरनते लोभ पराये धनतें ॥४॥

N/A

References : N/A
Last Updated : December 15, 2007

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP