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वसु

   { vasu }
Script: Devanagari

वसु     

Puranic Encyclopaedia  | English  English
VASU I   A King named Uparicaravasu. For further details see under Uparicaravasu).
VASU II   Aṣṭavasus. (The eight Vasus). (For further details see under Ạṣṭavasus).
VASU III   A son born to Kuśa, King of Kanyākubja by his wife Vaidarbhī. Kuśa had four sons, Kuśāmba, Kuśanābha, Asūrtarajas and Vasu. Of them Kuśāmba built the city of Kauśāmbī, Kuśanābha the city of Mahodayapura, Asūrtarajas the city of Dharmāraṇya and Vasu the city of Girivraja which is erected in the middle of five hills. The river Māgadhī flows around this city. [Vālmīki Rāmāyaṇa, Bālakāṇḍa Sarga 32] .
VASU IV   A Vasu is mentioned in [Brahmāṇḍa Purāṇa Chapter 58] , as the brother of Paraśurāma. Vasu, Rumaṇvān, Suṣeṇa, Viśvāvasu and Paraśurāma were the five sons born to Jamadagni by his wife Reṇukā.
VASU IX   Vasu is used as a synonym of Śiva in [Mahābhārata, Anuśāsana Parva, Chapter 17, Stanza 140] .
VASU V   A son of Murāsura. The sons of Murāsura were, Tāmra, Antarīkṣa, Śravaṇa, Vasu, Vibhāvasu, Nabhasvān and Aruṇa. [Bhāgavata, Skandha 10] .
VASU VI   A mighty King of the Kṛmi dynasty. [Mahābhārata, Udyoga Parva, Chapter 74, Stanza 13] .
VASU VII   It is mentioned in [Mahābhārata, Ādi Parva, Chapter 94, Stanza 17] , that the King Īlina had five sons, Duṣyanta, Śūra, Bhīma, Pravasu and Vasu by his wife Rathantarī.
VASU VIII   A scholarly Brahmin-hermit. The hermit Paila was the son of this Vasu. [M.B. Sabhā Parva Chapter 33, Stanza 35] .
VASU X   A name of Mahāviṣṇu. [M.B. Anuśāsana Parva, Chapter 149, Stanza 25] .
VASU XI   A King. He was born to Uttānapāda by Sūnṛtā. A controversy arose among hermits once, about cow-sacrifice and for a solution of the problem the hermits approached this king Vasu, who told them his perception that the sacrifice of cow was, strictly speaking, a matter of slaughter and as such it was to be forbidden. As the hermits could not agree with the King, they cursed him “Let the King go to Pātāla (underworld). Vasu then did very severe penance and attained heaven. [Matsya Purāṇa, 143, 18-25] .

वसु     

वसु n.  प्राचेतस दक्ष की कन्या, जो धर्म ऋषि की पत्नी थी । विभिन्न कल्पों में इसने अनेकानेक अवतार लिये, जिस कारण इसे विभिन्न नाम प्राप्त हुए। महाभारत में प्राप्त इसके विभिन्न नाम निम्नप्रकार हैः- १. शांडिल्या; २. श्र्वासा; ३. रता; ४. धूम्रा; ५. प्रभाता; ६. मनस्विनी। इन वसुओं को अनेकानेक पुत्र उत्पन्न हुए, जो वसु नामक देवतासमूह कहलाते है [भा. ६.६.४] ;[ब्रह्मांड. २.९.५०] ; वसु. २. देखिये ।
वसु (काश्यप) n.  रोहित मन्वन्तर का एक ऋषि [ब्रह्मांड ४.१.६३]
वसु (भारद्वाज) n.  एक वैदिक सूक्तद्रष्टा [ऋ. ९.८०-८२]
वसु II. n.  एक देवतासमूह, जिसकी संख्या आठ होने के कारण ये ‘अष्टवसु’ नाम से प्रसिद्ध है [ऐ. ब्रा. २.१८] ;[श. ब्रा. ४.५.७] । तैत्तिरीय संहिता में इनकी संख्या ३३३ दी गयी हैं [तै. सं. ५.५.२] । ऋग्वेद में देवताओं का त्रिपदीय विभाजन निर्देशित है, जहॉं वसु, रूद्र एवं आदित्यों को क्रमशः पृथ्वी, अंतरिक्ष, एवं स्वर्ग में निवास करनेवाले देव कहा गया हैं [ऋ. ७.३६.१४] । ब्राह्मणग्रंथों में वसु, रुद्र एवं आदित्यों की संख्या क्रमशः आठ, ग्यारह एवं बारह बतायी गयी है । इन्हीं देवों में द्यौः एवं पृथ्वी मिला कर देवों की कुल संख्या तैतीस बतायी गयी है ।
वसु II. n.  इन ग्रंथों में वसुओं को धर्म एवं वसु के पुत्र माने गये है । किन्तु वहॉं वसु एक स्त्री न हो कर, कल्पभेदानुसार अनेकानेक स्त्रियॉं मानी गयी हैं [भा. ६.६.१०] ;[ब्रह्मांड. २.३८.२] ; वसु १. देखिये । ऐश्र्वर्यप्राति के लिए वसुओं की उपासना की जाती है [भा. २.३.३] । ये वासुदेव के अंश माने जाते हैं, एवं वैवस्वत मन्वन्तर के सात देवतासमूह में इनका निर्देश प्राप्त है [मत्स्य. ५.२०-२१, ९.२९] । वैदिक ग्रंथों में तथा पुराणों में, अग्नि को वसुओं का नायक बताया गया है [ब्रह्मांड. २.२७.२४] ;[मत्स्य. ८.४] । देवासुर संग्राम में इन्होंने कालेय नामक दैत्यों से युद्ध किया था [भा. ८.१०.३४] । इन्हें साध्य देवों के बन्धु कहा गया हैं, एवं वसिष्ठ ऋषि से इन्हें लैंगिक समागम से पुनः जन्म प्राप्त होने का शाप प्राप्त हुआ था ।
वसु II. n.  पुराणों में अष्टवसु नाम निम्नप्रकार दिये गये हैः---१. अनल; २. अनिल; ३. अप्; ४. धर; ५. ध्रुव; ६; प्रत्यूष; प्रभास; ८. सों।
वसु II. n.  अष्टवसुओं की माता, पत्नियॉं एवं पुत्र आदि के बारे में विस्तृत जानकारी महाभारत एवं पुराणों में प्राप्त है (पृ. ८१२ पर दी गयी ‘अष्टवसुओं का परिवार’ की तालिका देखिये) ।
वसु - (१) द्रोण
पत्नी - अभिमति
पुत्र - हर्ष, शोक, भय ।
वसु - (२) प्राण
पत्नी - ऊर्जस्वती
पुत्र - सह, आयु, पुरोजव ।
वसु - (३) ध्रुव
पत्नी - धरणि
पुत्र - पुरस्थ देवता ।
वसु - (४) अर्क
पत्नी - वासना
पुत्र - तर्ष ।
वसु - (५) अग्नि
पत्नी - वसोर्धारा कृत्तिका
पुत्र - द्रविणक, स्कंद, विशाख ।
वसु - (६) दोष
पत्नी - शर्वरी
पुत्र - शिशुमार
वसु - (७) वसु
पत्नी - आंगिरसी
पुत्र - विश्वकर्मन्
वसु - (८) विभावसु
पत्नी - उषा
पुत्र - व्युष्ट, रोचिष, आतप, पंचयाम ।
वसु II. n.  इस ग्रंथ में अष्टवसुओं के नाम एवं परिवार के संबंध में अन्य सारे पुराण एवं महाभारत से विभिन्न जानकारी प्राप्त है, जो निम्नप्रकार हैः-
अष्टवसुओं का परिवार
वसु का नाम - (१) अनल
माता - शांडिल्या
पत्नी - -
पुत्र - स्कंद, शाख, विशाख, नैगमेय ।
वसु का नाम - (२) अनिल
माता - श्वासा
पत्नी - शिवा ( कृत्तिका ) कल्याणिनी
पुत्र - मनोजव, जीव, अविज्ञातगति । रमण, शिशिर ।
वसु का नाम - (३) अप् ( अह )
माता - रता
पत्नी - -
पुत्र - वैतण्ड्य ( दंड ); श्रम ( शांब, शम ), श्रांत ( शांत ); मुनि ( ध्वनि, मणिवक्र ), ज्योति ।
वसु का नाम - (४) धर
माता - धूम्रा
पत्नी - मनोहरा
पुत्र - शिशिर, रमण ( द्रविण ), प्राण, हव्यवाह ।
वसु का नाम - (५) ध्रुव
माता - धूम्रा
पत्नी - -
पुत्र - काल ।
वसु का नाम - (६) प्रत्यूष
माता - प्रभाता
पत्नी - -
पुत्र - देवल ।
वसु का नाम - (७) प्रभास
माता - प्रभाता
पत्नी - वरस्त्री आंगिरसी ( बृहस्पतिभगिनी )
पुत्र - विश्वकर्मन् ।
वसु का नाम - (८) सोम ( चंद्र )
माता - मनस्विनी
पत्नी - -
पुत्र - वर्चस् बुध, धर ( धार ), ऊर्मि, कालिल ।
वसु III. n.  वैवस्वत मन्वन्तर का देवगण।
वसु IV. n.  प्रतर्दन देवों में से एक ।
वसु IX. n.  दक्षसावर्णि मन्वन्तर का एक ऋषि।
वसु V. n.  आद्य देवों में से एक ।
वसु VI. n.  दस विश्र्वेदेवों में से तीसरा देव। यह भृगु ऋषि का पुत्र था [मत्स्य. १९५.१३]
वसु VII. n.  ब्रह्मज्योति अग्नि का नामान्तर। पाठभेद - ‘वसुधाम’ [ब्रह्मांड. २.१२.४३]
वसु VIII. n.  सों की अनुचरी देवताओं में से एक ।
वसु X. n.  ०. सावर्णि मनु का एक पुत्र [मत्स्य. ९.३३] ; मनु आदिपुरुष देखिये ।
वसु XI. n.  १. स्वायंभुव मनु का एक पुत्र [मत्स्य. ९.५] ; मनु आदिपुरुष देखिये ।
वसु XII. n.  २. एका राजा, जो मत्स्य के अनुसार पुरूरवस् एवं उर्वशी का पुत्र था [मत्स्य. २४.३३] । पाठभेद - ‘अमावसु’।
वसु XIII. n.  ३. (स्वा. उत्तान.) एक राजा, जो भागवत के अनुसार वत्सर राजा का पुत्र था । इसकी माता का नाम स्वर्वीर्थि था ।
वसु XIV. n.  ४. (सो. अमा.) एक राजा, जो भागवत के अनुसार कुश राजा के चार पुत्रों में से एक था । विष्णु एवं वायु में इसे क्रमशः ‘अमावसु’ एवं ‘यशोवसु’ कहा गया है । इसने गिरिव्रज नामक नगरी की स्थापना की, जो रामायणकाल में ‘वसुमती’ नामक में सुविख्यात थी [वा. रा. बा. ३२.७]
वसु XIX. n.  ९. (सो. वसु.) एक राजा, जो वसुदेव एवं देवराक्षिता के पुत्रों में से एक था । कंस ने इसका वध किया।
वसु XV. n.  ५. (सो. ऋक्ष.) चेदि देश के उपरिचर वसु राजा का नामांतर (उपरिचर देखिये) । भागवत एवं विष्णुमें इसे क्रमशः ‘कृति’ एवं ‘कृतक’ राजा का पुत्र कहा गया है ।
वसु XVI. n.  ६. (स्वा. उत्तान.) एक राजा, जो उत्तानपाद राजा का पुत्र था । इसकी माता का नाम सुनृता था । एक बार पशुयज्ञ के संबंध में वादविवाद का निर्णय देने के लिए कई ऋषि इसके साथ आये। उस समय इसने पशुयज्ञ हिंसक, अतएव त्याज्य होने का अपना मत प्रकट किया, जिस कारण ऋषियों ने इसे रसातल में जाने का शाप दिया। आगे चल कर तपस्या के कारण, इसे स्वर्गलोक की प्राप्ति हो गयी [मत्स्य. १४३.१८-२५]
वसु XVII. n.  ७. (सू. इ.) एक राजा, जो नृग राजा का पुत्र था ।
वसु XVIII. n.  ८. (सू. नृग.) एक राजा, जो सुमति राजा का पुत्र था ।
वसु XX. n.  ०. (सो. वसु.) एक राजा, जो कृष्ण एवं सत्या के पुत्रों में से एक था । भागवत में इसकी माता का नाम नाग्नजिति दिया गया है [भा. १०.६१.१३]
वसु XXI. n.  १. (सो.) एक राजा, जो ईलिन एवं रथंतरी के पॉंच पुत्रों में से एक था । इसके अन्य चार भाईयों के नाम दुय्यंत, शूर, भीम एवं प्रवसु थे [म. आ. ८९.१५]
वसु XXII. n.  २. कृमिकुल का एक कुलांगार राजा, जिसने दुर्व्यवहार के कारण अपने ज्ञातिबांधव एवं स्वजनों का नाश किया [म. उ. ७२.१३] । पुराणों में इसे चेदि देश का राजा एवं पृथु राजा का प्रपौत्र कहा गया है । इसके पुत्र का नाम उपमन्यु था, जिससे औपमन्यव कुल का निर्माण हुआ [मत्स्य. ५०.२५-२६]
वसु XXIII. n.  ३. एक राजा, जो भूतज्योति नामक राजा का पुत्र था । इसके पुत्र का नाम प्रतीक था [भा. ९.२.१७-१८]
वसु XXIV. n.  ४. एक ऋषि, जो इंद्रप्रमति वसिष्ठ नामक ऋषि का पौत्र, एवं भद्र नामक ऋषि का पुत्र था । इसके पुत्र का नाम उपमन्यु था ।
वसु XXIX. n.  ९. एक दैत्य, जो मुर दैत्य के पुत्रों में से एक था । कृष्ण ने इसका वध किया [भा. १०.५९.१२]
वसु XXV. n.  ५. एक ऋषि, जो जमदग्नि एवं रेणुका के पॉंच पुत्रों में से एक था । इसके अन्य भाईयों के नाम रुमण्वत्, सुपेण, विश्र्वावसु एवं परशुराम थे । पिता की मातृबध संबंधी आज्ञा न मानने के कारण, इसे पिता के द्वारा शाप प्राप्त हुआ था । परशुराम के द्वारा उस शाप से इसका उद्धार हुआ।
वसु XXVI. n.  ६. एक आंगिरसवंशीय ऋषि, जो पैल ऋषि का पिता था [म. स. ३०.३५] । युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में यह ‘होता’ था ।
वसु XXVII. n.  ७. (स्वा. प्रिय.) एक राजा, जो कुशद्वीप के हिरण्यरेतस् राजा के सात पुत्रों में से एक था [भा. ५.२०.१४] ; हिरण्यरेतस् देखिये । कुशद्वीप का इसका राज्यविभाग इसीके ही नाम से सुविख्यात हुआ।
वसु XXVIII. n.  ८. एक यक्ष, मणिभद्र एवं पुण्यजनी के पुत्रों में से एक था [ब्रह्मांड. ३.७.१२३]
वसु XXX. n.  ०. एक वसु, जिसकी पत्नी का नाम आंगिरसी, एवं पुत्र नाम विश्वकर्मन् था [भा. ६.६.११] ; वसु २. देखिये ।
वसु XXXI. n.  १. कर्दम ऋषि के दस पुत्रों में से एक [ब्रह्मांड. २.१४.९]
वसु XXXII. n.  २. मारीच कश्यप नामक ऋषि की पत्नी, जिसने सों के लिए अपने पति का त्याग किया [मत्स्य. २३.२५]
वसु XXXIII. n.  ३. एक ऋषि, जो भृगु वारुणि एवं पौलोमी के सात ऋषिपुत्रों में से एक था ।
वसु XXXIV. n.  ४. काश्मीर देश का एक राजा, जिसने पुष्करतीर्थ पर तपस्या की थी । इसने पुंडरिकाक्ष के स्तोत्र का पठन किया, जिस कारण इसे मोक्ष की प्राप्ति हुई [वराह. ५-६] । अपने पूर्वजन्म में, चाक्षुष मनु के राज्यकाल में यहं ब्रह्मा का पुत्रा था । एक बार इसने रैभ्य ऋषि के द्वारा बृहस्पति को प्रश्र्न किया, ‘कर्म से मोक्ष प्राप्त होता है, या ज्ञान से?’ उस समय बृहस्पति ने इसे जबाब दिया, ‘ज्ञानपूर्वक किये कर्म से मनुष्य को मोक्षप्राप्ति होती है’। उस जन्म में इसके पुत्र का नाम विवस्वत् था । अपने इस पूर्वजन्म का स्मरण एक व्याध के द्वारा इसे हुआ, जिस कारण इसने उस व्याध को अगले जन्म में ‘धर्मव्याध’ होने का वर प्रदान किया।
वसु XXXV. n.  ६. केरल देश में रहनेवाला एक ब्राह्मण [पद्म. उ. ११९] । पापकर्म के कारण इसे पिशाचयोनि प्राप्त हो गयी। पश्र्चात् गंगोदक से यह मुक्त हुआ।
वसु XXXVI. n.  ७. वेंकटाचल पर रहनेवाला एक निषाद। इसकी पत्नी का नाम चित्रवती था, जिससे इसे वीर नाम पुत्र उत्पन्न हुआ था । विष्णु की उपासना करने से यह मुक्त हुआ।

वसु     

हिन्दी (hindi) WN | Hindi  Hindi
noun  एक प्रकार के वैदिक देवता   Ex. वेदों में वसुओं की संख्या आठ बताई गई है ।
HYPONYMY:
विष्णु सोमदेव प्रभास प्रत्यूष ध्रुव धर
ONTOLOGY:
पौराणिक जीव (Mythological Character)जन्तु (Fauna)सजीव (Animate)संज्ञा (Noun)
SYNONYM:
सावित्र आदित्य
Wordnet:
benবসু
kasوَسوٗ
kokवसू
malവസു
marवसू
oriବସୁ
panਵਸੂ
sanवसुः
tamஆதித்யா
urdوسُو , ساوتر , آدتیہ
noun  दक्ष प्रजापति की एक कन्या   Ex. वसु का वर्णन पुराणों में मिलता है ।
ONTOLOGY:
पौराणिक जीव (Mythological Character)जन्तु (Fauna)सजीव (Animate)संज्ञा (Noun)
Wordnet:
kokवसू
marवसु
panਵਸੁ
sanवसुः
See : सज्जन, जल, आग, सोना, मौलसिरी, अगति, मौलसिरी

वसु     

मराठी (Marathi) WN | Marathi  Marathi
noun  दक्ष राजाची एक कन्या   Ex. वसुचे वर्णन पुराणांमध्ये आढळते.
ONTOLOGY:
पौराणिक जीव (Mythological Character)जन्तु (Fauna)सजीव (Animate)संज्ञा (Noun)
SYNONYM:
वसू
Wordnet:
kokवसू
panਵਸੁ
sanवसुः

वसु     

A dictionary, Marathi and English | Marathi  English
A kind of demigod of whom eight are enumerated. 2 n S Wealth.

वसु     

Aryabhushan School Dictionary | Marathi  English
 m  A kind of demi-god.
  Wealth.

वसु     

 पु. एक विशिष्ट देवता . या आठ आहेत . अष्टवसु पहा . - न . ज्या वेद स्तन शोभती शिरे सात । तिथि तरि वसु जाणा । - देप ४६ . [ सं . ]
 पु. पोळ . वसू पहा .
पुस्त्री . मायणी ; कडे . वसू पहा .

वसु     

A Sanskrit English Dictionary | Sanskrit  English
वसु  mfn. 1.mf( or वी)n. (for 2. See p. 932, col. 3) excellent, good, beneficent, [RV.] ; [GṛŚrS.]
sweet, [L.]
dry, [L.]
N. of the gods (as the ‘good or bright ones’, esp. of the आदित्यs, मरुत्s, अश्विन्s, इन्द्र, उषस्, रुद्र, वायु, विष्णु, शिव, and कुबेर), [RV.] ; [AV.] ; [MBh.] ; [R.]
अप्   of a partic. class of gods (whose number is usually eight, and whose chief is इन्द्र, later अग्नि and विष्णु; they form one of the nine गणs or classes enumerated under गण-देवताq.v.; the eight वसुs were originally personifications, like other Vedic deities, of natural phenomena, and are usually mentioned with the other गणs common in the वेद, viz. the eleven रुद्रs and the twelve आदित्यs, constituting with them and with द्यौस्, ‘Heaven’, and पृथिवी, ‘Earth’ [or, according to some, with इन्द्र and प्रजा-पति, or, according to others, with the two अश्विन्s], the thirty-three gods to which reference is frequently made; the names of the वसुs, according to the विष्णु-पुराण, are, 1. आप [connected with , ‘water’]; 2. ध्रुव, ‘the Pole-star’; 3. सोम, ‘the Moon’; 4. धव or धर; 5. अनिल, ‘Wind’; 6. अनल or पावक, ‘Fire’; 7. प्रत्यूष, ‘the Dawn’; 8. प्रभास, ‘Light’; but their names are variously given; अहन्, ‘Day’, being sometimes substituted for 1; in their relationship to Fire and Light they appear to belong to Vedic rather than Purānic mythology), [RV.] &c. &c.
a symbolical N. of the number ‘eight’ [VarBṛS.]
a ray of light, [Naigh. i, 15]
a partic. ray of light, [VP.]
जिन   = , [Śīl.] (only [L.] the sun; the moon; fire; a rope, thong; a tree; N. of two kinds of plant = बक and पीत-मद्गु; a lake, pond; a kind of fish; the tie of the yoke of a plough; the distance from the elbow to the closed fist)
N. of a ऋषि (with the patr.भरद्-वाज, author of [RV. ix, 80-82] , reckoned among the seven sages), [Hariv.]
of a son of मनु, ib.
of a son of उत्तान-पाद, ib.
of a prince of the चेदिs also called उपरि-चर, [MBh.]
of a son of ईलिन, ib.
of a son of कुश and the country called after him, [RV.]
of a son of वसु-देव, [BhP.]
of a son of कृष्ण, ib.
of a son of वत्सर, ib.
of a son of हिरण्य-रेतस् and the वर्ष ruled by him, ib.
of a son of भूतज्योतिस्, ib.
of a son of नरक, ib.
of a king of कश्मीर, [Cat.]
वसु  f. () f. light, radiance, [L.]
a partic. drug, [L.]
N. of a daughter of दक्ष and mother of the वसुs (as a class of gods), [Hariv.] ; [VP.]
वसु  m. n. (in वेदgen.व॑सोस्, व॑स्वस् and व॑सुनस्; also pl., exceptionally m.) wealth, goods, riches, property, [RV.] &c. &c. (°सोष्-पतिm.prob. ‘the god of wealth or property’ [AV. i, 12] [[Paipp.] असोष्-प्°, ‘the god of life’]; °सोर्-धा॑राf. ‘stream of wealth’, N. of a partic. libation of घृत at the अग्नि-चयन, [AV.] ; [TS.] ; [Br.] &c.; of the wife of अग्नि, [BhP.] ; of the heavenly गङ्गा, [MBh.] ; of sacred bathing-place, ib.; of a kind of vessel, ib.; °सोर्-धा॑रा-प्रयोगm.N. of wk.)
वसु  n. n. gold (See -वर्म-धर)
-मेखल   a jewel, gem, pearl (See )
ROOTS:
मेखल
any valuable or precious object, [L.]
वसु  f. n. (also f.) a partic. drug, [L.]
वसु  n. n. a kind of salt (= रोमक), [L.]
water, [L.]
a horse (?), [L.]
श्याम   = , [L.]
वसु  n. 2.m. or n. (for 1. See p. 930, col. 3) dwelling or dweller (See सं॑-वसु).
वसु   a 1. 2. . See pp. 930 and 932.

वसु     

वसु [vasu] a.  a. Sweet.
Dry.
Ved. Wealthy, rich.
Ved. Good. -n. [वस्-उन् [Uṇ.1.1] ]
Wealth, riches; स्वयं प्रदुग्धेऽस्य गुणैरुपस्नुता वसूपमानस्य वसूनि मेदिनी [Ki.1.18;] [R.8.31;] 9.6 वस्वीशाद् वसुनिकरं (लब्ध्वा) धृतानुरागा [Rām. ch.7.58.]
A jewel, gem.
Gold.
Water; वसु काल उपादत्ते काले चायं विमुञ्चति [Bhāg.4.16.6.]
A thing, substance; त्रात्वार्थितो जगति पुत्रपदं च लेभे दुग्धा वसूनि वसुधा सकलानि येन [Bhāg.2.7.9;] [Mb.12.98.2.]
A kind of salt.
A medicinal root (वृद्धि).
A yellow kind of kidney-bean.
The ghee (घृत); विधिना वेददृष्टेन वसोर्धारा- मिवाध्वरे [Mb.13.2.35.] -m.
 N. N. of a class of deities (usually pl. in this sense); सेयं भूरिवसोर्वसोरिव सुता मृत्यो- र्मुखे वर्तते [Māl 5.24;] [Ki.1.18;] (the Vasus are eight in number: 1 आप, 2 ध्रुव, 3 सोम, 4 धर or धव, 5 अनिल, 6 अनल, 7 प्रत्यूष, and 8 प्रभास; sometimes अह is substituted for आप; धरो ध्रुवश्च सोमश्च अहश्चैवानिलोऽनलः । प्रत्यूषश्च प्रभासश्च वसवोऽष्टाविति स्मृताः).
The number 'eight'.
 N. N. of Kubera.
Of Śiva.
Of Agni.
A tree.
A lake, pond.
A rein.
The tie of a yoke.
A halter.
A ray of light; निरकाशयद्रविमपेतवसुं वियदालयादपरदिग्गणिका [Śi.9.1;] शिथिलवसुमगाधे मग्नमापत् पयोधौ [Ki.1.46] (in both cases वसु means 'wealth' also).
The sun.
The distance from the elbow to the closed fist. -f.
A ray of light.
Light, radiance.
A medicinal root (वृद्धि).-Comp.
-उत्तमः  N. N. of Bhīṣma; तान् समेतान् महाभागानुपलभ्य वसूत्तमः । पूजयामास ...... [Bhāg.1.9.9.]
-उपमः   Natron (Mar. सज्जीखार).
ओ (औ) कसारा N. of Amarāvatī, the city of Indra.
of Alakā, the city of Kubera; 'वस्वौकसारा श्रीदस्य शक्रस्य नलिनी पुरी' इति हरिः; वस्वौकसारां नलिनीमतीत्यैवोत्तरान् कुरून् [Rām.2.94.26;] व्यक्तं वस्वोकसारेयम् [Mb.7.67.16.] (com. वस्वोकसारा सलोप आर्षः । कनकमयानि ओकांसि सारो यस्याः सा तथा).
of a river attached to Amarāvatī and Alakā.
-कीटः, -कृमिः   a beggar.-ता,
-तातिः  f. f. Ved. wealth.
-दा   the earth.
-देवः  N. N. of the father of Kṛiṣṇa and son of Sūra, a descendant of Yadu. ˚भूः,
-सुतः   &c. epithets of Kṛiṣṇa.
-देवता, -देव्या   -देवता,
-देव्या   the asterism called Dhaniṣṭhā. the ninth day of a lunar fortnight.
-द्रुमः   the Udumbara tree.-धर्मिका crystal.
धा the earth; वसुधेयमवेक्ष्यतां त्वया [R.8.83;] पुरा सप्तद्वीपां जयति वसुधामप्रतिरथः [Ś.7.35;1.25.]
the heaven; धरान् धरित्रीं वसुधां भर्तुस्तिष्ठाम्यनन्तरम् [Mb. 13.93.1] (com. वसून् देवान् धत्ते इति व्युत्पत्त्या वसुधां दिवम्).
the ground; वसुधालिङ्गनधूसरस्तनी [Ku.4.4.] ˚अधिपः a king. ˚धरः a mountain; वसुधाधरकन्दराभिसर्पी प्रतिशब्दोऽपि हरेर्भिनत्ति नागान् [V.1.18.] ˚नगरम् the capital of Varuṇa.-धारा,
-भारा   the capital of Kubera. [वसोर्धारा
a stream of ghee prepared for Vasus; कुड्यलग्नां वसोर्धारां सप्त वारान् घृतेन तु । कारयेत् प़ञ्च वारान् वा नातिनीचां न चोच्छ्रिताम् Chhandogapaddhati.
 N. N. of a vessel for pouring ghee into fire; त्वया द्वादशवर्षाणि वसोर्धाराहुतं हविः [Mb.1.223.72.]
 N. N. of the heavenly Ganges (मन्दाकिनी); [Mb.13.8.5.] ].-धारिणी the earth.
-पालः   a king.
-प्रभा   one of the seven tongues of fire.
-प्राणः   an epithet of Agni.
-भम्   the constellation धनिष्ठा.
-रण्व a.  a. delighted with wealth; वसुरण्वो विभुरसि [Mahānār.17.15.]
-रेतस्  m. m. fire; संप्राप्तो यत्र सांनिध्यं सदासीद् वसुरेतसः [Rām.7.31.7;] [Mb.1.13.3.] -रोचिस् m.
sacrifice; religious ceremony.
Fire.-व्रतम् a kind of penance (eating only ground rice for twelve days).
श्रेष्ठम् wrought gold.
silver.
-षेणः  N. N. of Karṇa; वसुवर्मधरं दृष्ट्वा तं बालं हेमकुण्डलम् । नामास्य वसुषेणेति ततश्चक्रुर्द्विजातयः ॥ [Mb.3.39.13-14.]
-स्थली  N. N. of the city of Kubera.
वसु [vasu] सू [sū] कः [kḥ]   (सू) कः The plant called Arka.
कम् Seasalt.
Fossil-salt.

वसु     

Shabda-Sagara | Sanskrit  English
वसु  mfn.  (-सुः-सुः-सु)
1. Sweet, sweet-flavoured.
2. Dry, dried.
 n.  (-सु)
1. Wealth, thing, substance.
2. A gem, a jewel.
3. A medicinal root, commonly Vriddhi.
4. Water.
5. Gold.
6. A yellow kind of kidney- bean.
7. A sort of salt.
8. The number eight, i. e. the eight Vasus.
 m.  (-सुः)
1. A kind of demi-god, of whom eight are enumer- ated, viz.:--DHARA, DHRUVA, SOMA or the moon, ĀPA, ANILA or wind, ANALA or fire, PRABHĀSA and PRATYUSA.
2. A name of ĀGNI or fire.
3. A ray of light.
4. The tie of a yoke.
5. A tree, (Sesbana grandiflora.)
6. The name of a king.
7. A name of KUVERA.
8. A tree in general.
9. A lake, a pool.
10. A rein, a halter.
11. A plant, (Trophis aspera.)
12. ŚIVA.
13. The sun. 14. A kind of fish.
E. वस् to abide or dwell, Unādi aff. उ .
ROOTS:
वस् उ .
वसु(सू)क  n.  (-कं) A fossil-salt, brought from a district in Ajmere, Sambhar-salt.
वसु(सू)क  m.  (-कः)
वसु(सू)क   1. A shrub, (Gigantic Asclepias.)
वसु(सू)क   2. A tree, (Sesbana grandiflora.)
वसु(सू)क   E. कन् added to the preceding; or वसु wealth, कै to sound, aff. ड .
ROOTS:
कन् वसु कै ड .

वसु     

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