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त्रिशती
Meanings: 3; in Dictionaries: 3
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शती
Meanings: 3; in Dictionaries: 3
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ग्रंथकारांनीं दिलेल्या ओव्या
श्री. प. प.वासुदेवानन्दसरस्वतीकृत श्रीगुरुचरित्रकाव्य
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पूर्वभागः - पञ्चमोऽध्यायः
पुराण म्हणजे भारतीय संस्कृतीचा अमूल्य ठेवा आहे. महापुराणांच्या क्रमवारीत कूर्मपुराण पंधराव्या स्थानावर आहे.
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अध्याय २८६ - कल्पसागरः
अग्निपुराणात त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु, महेश आणि सूर्य ह्या देवतांसंबंधी पूजा-उपासनाचे वर्णन केलेले आहे.
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वेधक
Meanings: 24; in Dictionaries: 9
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बृहत्संहिताः - अध्याय ८०
’बृहत्संहिता’ ग्रंथात वास्तुविद्या, भवन निर्माण कला, वायुमंडळाची रचना, वृक्ष आयुर्वेद इ. विषय अंतर्भूत आहेत.
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पुरनिवेशो दशमोऽध्यायः - ५१ ते १००
समराङ्गणसूत्रधार भारतीय वास्तुशास्त्र से सम्बन्धित ज्ञानकोशीय ग्रन्थ है जिसकी रचना धार के परमार राजा भोज (1000–1055 ई) ने की थी।
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अवन्तीक्षेत्रमाहात्म्यम् - अध्याय ४८
भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) ने कथन केल्यामुळे ह्या पुराणाचे नाव 'स्कन्दपुराण' आहे.
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हरिवंश पर्व - अष्टमोऽध्यायः
महर्षी व्यासांनी रचलेला हा महाभारताचा पुरवणी ग्रंथ आहे.
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शत
Meanings: 52; in Dictionaries: 9
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मत्स्यपुराणम् - अध्यायः १४२
मत्स्य पुराणात सात कल्पांचे वर्णन असून हे पुराण नृसिंह वर्णनापासून सुरू होते.
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पूर्वार्धम् - अध्यायः ३२
वायुपुराणात खगोल, भूगोल, सृष्टिक्रम, युग, तीर्थ, पितर, श्राद्ध, राजवंश, ऋषिवंश, वेद शाखा, संगीत शास्त्र, शिवभक्ति, इत्यादिचे सविस्तर निरूपण आहे.
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अनुषङ्गापादः - अध्यायः २९
ब्रह्माण्डाच्या उत्पत्तीचे रहस्य या पुराणात वर्णिलेले आहे.
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नायिकाभेदप्रकरणम्
रूपगोस्वामी ह्या महान विद्वानाने रचलेला महान् ग्रंथ उज्ज्वलनीलमणिः होय.
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दत्तभक्त - वासुदेवानंदसरस्वती
महान् व्यक्तिंची चरित्रे नेहमीच प्रेरणादायी असतात. दत्तात्रेयांच्या पौराणिक शिष्यांची वा भक्तांची ओळख येथे केलेली आहे. हे दत्तभक्त अवतारी पुरूष म्हणून ओळखले जातात.
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पूर्वार्धम् - अध्यायः ५७
वायुपुराणात खगोल, भूगोल, सृष्टिक्रम, युग, तीर्थ, पितर, श्राद्ध, राजवंश, ऋषिवंश, वेद शाखा, संगीत शास्त्र, शिवभक्ति, इत्यादिचे सविस्तर निरूपण आहे.
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स्वच्छन्दभैरवतन्त्र - सप्तमः पटलः
स्वच्छन्दभैरवतन्त्र हे एक असे तंत्र आहे, ज्यापासून प्रत्यक्ष भैरव मदतीला उभे राहतात.
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प. पू. श्रीमत् वासुदेवानंद सरस्वती
दत्त संप्रदायातील सत्पुरूष
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