रक्तवहस्त्रोतस् - कोष्टक

धर्म, अर्थ, काम आणि मोक्ष या चतुर्विध पुरूषार्थांच्या प्राप्तीकरितां आरोग्य हे अत्यंत आवश्यक असते.


व्याधीनाम
रक्तपित्त

हेतू
उष्ण, तीक्ष्ण, विदाही अभिष्यंदी, मद्य, विरुध्द, शिंबीधान्य.

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्त, रक्तवृध्दि, यकृत्, प्लीहा, मार्ग अभ्यंतर.

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
कंठधूमायन, छर्दि साद, शीतेच्छा, निश्वास लोहगन्धी. रक्तनिष्ठीवन, रक्तप्रवृत्ति, शुक्ताम्लगंधोद्गार, दौर्बल्य, आम्लिका. भ्रम, क्लम.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
नासार्श, उर:क्षत, रक्तातिसार, रक्तप्रवाहिका, गुदज अर्श, रक्तप्रदर

प्रकार
गतिभेदानें अधऊर्ध्व-दोष-भेदानें-वातज, पित्तज कफज, सान्निपातिक

उपद्रव व परिणाम
दौर्बल्य, ज्वर, श्वास, पांडु, मूर्च्छा, क्लैब्य, मृत्यु

चिकित्सा कल्प
चंदन, उशीर, वासा, लाक्षा, माक्षिकभस्म, मौक्तिकभस्म, प्रवाळभस्म, कामदुधा, पद्मकादि तैल

पथ्यापथ्य  
पथ्य - शीत, मृदभृष्ट जल, लाजमंड, गोदुग्ध, गोघृत
अपथ्य - उष्ण, विदाही
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व्याधीनाम
कामला

हेतू
पित्तकर आहारविहार

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्त, रक्तक्षय, स्त्रोतोरोध

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
त्वड्नेत्रमूत्रपीतता, पुरीषश्वेतता [रुध्दपथ कांमलेंत], ज्वर, दाह रक्ताचा विदाह

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
पित्तज पांडु, यकृतवृध्दि, सन्निपातज्वर, विद्रधि, गुल्म, अर्बुद

प्रकार
बहुपित्ता, रुध्दपथा

उपद्रव व परिणाम
नेत्रदाह ज्वर, विदाह, शोथ, हलीमक, मूर्च्छा

चिकित्सा कल्प
एरंडपत्रस्वरस, कुमारी, कुटकी, द्राक्षा, हरीतकी, आमलकी, मेंदी वासा आरोग्यवर्धिनी, सुतशेखर, चंद्रकला

पथ्यापथ्य  
पथ्य - नि:स्नेह दुग्ध इक्षु, फलरस
===

व्याधीनाम
वातरक्त

हेतू
अम्ल, लवण, कटु, स्निग्ध, उष्ण पदार्थ विरुध्दाशन, मद्य, हत्ती, घोडा, उंट यांसारख्या वाहनांवरुन प्रवास

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
मार्ग-बाह्य, अभ्यंतर वात, रक्त, लहान संधी.

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
वैवर्ण्य, कंडु, दाह, सूप्ति, शोथ, तोद, शूल, स्फुरण, व्रण भरुन न येणें

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
महाकुष्ठ, आमवात

प्रकार
आश्रयभेदाने - उत्तान, गंभीर
दोषभेदानें - वातज, पित्तज, कफज, रक्तज

उपद्रव व परिणाम
पाक, संधिविकृति, निद्रानाश, हृद्रोग अर्बुद

चिकित्सा कल्प
गुडूची, मंजिष्ठा, सारिवा, निर्गुडी निंब अमृतागुग्गुळ, कैशोरगुग्गुळ

पथ्यापथ्य  
पथ्य - लघु, द्रव, मधुर
अपथ्य - लवण  
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व्याधीनाम
क्षुद्रकुष्ठ

हेतू
संसर्ग, विरुध्दाशन

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
वात, पित्त, कफ, त्वक्, रक्त, मांस, लसीका.

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
वैवर्ण्य, कंडू, त्वक्, दुष्टि, सूप्ति, शोथ, विस्फोट, पाक, स्त्राव, कोथ

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
विसर्प, विस्फोट, बिब्बा उतणें

प्रकार
महा-सत्र क्षुद्र-अकरा

उपद्रव व परिणाम
कोथ अवयव झडणें व्रण

चिकित्सा कल्प
विरेचन, रक्तमोक्ष सारिवा, निंब, हरताळ, गंधक, मन:शिला, वंग, करंजतेल, निंबतेल, सिंदूरमलम

पथ्यापथ्य  
अपथ्य - मीठ, दही, तेल
===

व्याधीनाम
विसर्प

हेतू
पित्तकर रक्तदुष्टीकरी आहार विहार.

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्तप्रधानदोष, त्वक् रक्त, मांस, लसीका

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
ज्वर, वैवर्ण्य, राग, त्वक् दाह, प्रसरण-शील पुरळ.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
कुष्ट, कृमिदंश, विस्फोट  

प्रकार
वातज, पित्तज, कफज, सान्निपातिक, अग्निग्रंथी, कर्दम

उपद्रव व परिणाम
ज्वर, त्वक्स्फुटन दाह, क्लम अतिसार

चिकित्सा कल्प
जितसाया, चंदन, कमल, सारिवा, पंचवल्कल, सुक्ष्मत्रिफला, गंधक-रसायन, चंद्रकला सुदर्शनमलम

पथ्यापथ्य  
अपथ्य - उष्ण, विवाही, श्रम, व्यायाम
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व्याधीनाम
श्लीपद

हेतू
कफकर आहारविहार दलदलीचे प्रदेश

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्तप्रधानदोष, रसवाही सिरा, रक्त, मांस, मेद,

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
वंक्षणभागीं गौरव, व घन शोथ, क्वचित वेदना व ज्वर

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
एकांग शोथ, कफज शोथ, उरुस्तंभ

प्रकार
वातज, पित्तज, कफज

उपद्रव व परिणाम
शूल पाद दौर्बल्य क्रियाहानि

चिकित्सा कल्प
शिलाजतु, एरंड, शिग्रु, त्रिवृत्, वरुण, पुनर्नवा, गोमूत्रहरीतकी, आरोग्यवर्धिनी, चतुर्भुजकल्प

पथ्यापथ्य  
पथ्य - लंघन, जांगलदेश
अपथ्य - गुरु, पिच्छिल, अभिष्यंदी
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व्याधीनाम
मसूरिका

हेतू
संसर्ग, भूतोपसर्गं, तीक्ष्ण, उष्ण, क्षार विरुध्द, अध्यशन

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्त, त्वक्, रक्त धातुगतावस्था मार्ग-बाह्य, अभ्यंतर

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
ज्वर, अंगमर्द. अरति भ्रम, नेत्ररक्तता, त्वग्वैवर्ण्य. दाह, शोथ विस्फोट.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
शीतला, विसर्प, विस्फोट, सन्निपातज्वर

प्रकार
वातज, पित्तज, कफज, सान्निपातिक रक्तज

उपद्रव व परिणाम
तीव्रज्वर प्रमोह, श्वास, रक्तपित्त विरुपतां इंद्रियघात

चिकित्सा कल्प
तिक्तरसात्मक, वमन, धूपन, आलेप, व्रणकर्म निंब, गुडूची, सारिवा, कटुका, मौक्तिकभस्म, राने केळीचे बी, तिक्तपंचक, परिपाठादिक्वाथ, चंद्रकला

पथ्यापथ्य  
पथ्य - विश्रांति लघुद्रव आहार,
अपथ्य - तीक्ष्ण, उष्ण, विदाही, संसर्ग टाळणे
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व्याधीनाम
रोमांतिका

हेतू
बालकांत अधिक, संसर्ग, भूतोपसर्ग, तीक्ष्ण, उष्ण, क्षार, विरुध्द, अध्ययन

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
पित्त, त्वक, रक्त, धातुगतावस्था मार्ग, बाह्य, अभ्यंतर

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
प्रतिश्याय, नेत्राभिष्यंद, अतिसार ज्वर, तृष्णा, दाह, आरक्तवर्ण स्त्रावरहित पीडका.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
मसूरिका, शीतपित्त विसर्प, मंथरकज्वर सन्निपातिकज्वर

प्रकार
अंतर्वेगी बहिर्वेगी.

उपद्रव व परिणाम
वातकफज्वर, श्वास, कास, मूर्च्छा, रक्तपित्त, अतिसार

चिकित्सा कल्प
तिक्तरसात्मक, वमन, धूपन, आलेप, व्रणकर्म निंब, गुडूची, सारिवा, कटुका,  केळीचे बी, तिक्तपंचक, मौक्तिकभस्म, परिपाठादिक्वाथ, चंद्रकला

पथ्यापथ्य  
पथ्य - विश्रांति लघुद्रव आहार,
अपथ्य - तीक्ष्ण, उष्ण, विदाही, संसर्ग टाळणें
===

व्याधीनाम
शीतला

हेतू
संसर्ग, भूतोपसर्गं, तीक्ष्ण, उष्ण, क्षार विरुध्द, अध्यशन

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
त्वक्, रस, रक्त,

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
प्रतिश्याय, शिर:शूल, ज्वर.  

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
मसूरिका, विसर्प, विस्फोट, सान्निपातज्वर

प्रकार
वातज, पित्तज, कफज, सान्निपातिक रक्तज

उपद्रव व परिणाम
तीव्रज्वर प्रमोह, श्वास, रक्तपित्त विरुपता, इंद्रियघात

चिकित्सा कल्प
तिक्तरसात्मक, वमन, धूपन, आलेप, व्रणकर्म, निंब, गुडूची, सारिवा, कटुका, केळीचे बी, तिक्तपंचक, मौक्तिकभस्म, परिपाठादिक्वाथ, चंद्रकला

पथ्यापथ्य  
पथ्य - विश्रांति लघुद्रव आहार
अपथ्य - तीक्ष्ण, उष्ण, विदाही, संसर्ग टाळणे
===

व्याधीनाम
फिरंग

हेतू
संसर्ग, अयोनिगमन

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
कफप्रधानदोष त्वक, रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा. धातुगत अवस्था

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
संसर्गस्थळीं वेदनारहित विस्फोट, आमवाताप्रमाणें संधिशूल, त्वक् रोग, नासाभंग, अस्थिशूल.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
विस्फोट, महाकुष्ठ, आमवात, वातव्याधी, संधीगतवात, क्रोष्टुकशीर्ष

प्रकार
बाह्य अभ्यंतर

उपद्रव व परिणाम
गर्भस्त्राव, पात, अकालप्रसव, विकृतप्रसव, अस्थि भंग, वेदना, संधिशोथ, कार्श्य, दौर्बल्य

चिकित्सा कल्प
चोपचिनी, सारिवा, रसकर्पूर, समीरपन्नग, व्याधिहरण, कज्जलीमलम, गंधकरसायन  

पथ्यापथ्य  
पथ्य - विदाही अभिष्यंदी  
===

व्याधीनाम
प्लीहारोग यकृत

हेतू
मेदक्षय, रक्तदुष्टीकर आहार, विहार, विषमज्वर, जीर्णज्वर.

संप्राप्तींतील दोष व दूष्यें
वात, रक्त, प्लीहा.

पूर्वरुपें व सामान्यलक्षणें
प्लीहावृध्दि, गौरव, अग्निमांद्य; अरुचि, शूल, यकृत मंदज्वर, पांडूता.

व्यवच्छेदार्थ व्याधि
उदर, विद्रधी, गुल्म

प्रकार
वातज, पित्तज, कफज, सान्निपातिक, रक्तज

उपद्रव व परिणाम
उदर, पांडु, विद्रधी, कामला

चिकित्सा कल्प
रोहीतक, कुमारी सर्षपतेल, वज्रक्षार, ताम्र, आरोग्यवर्धिनी.

पथ्यापथ्य  
पथ्य - दुग्धाहार
अपथ्य - गुरु विदाही, अभिष्यंदी

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Last Updated : August 07, 2020

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