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भोज

See also:  भोजपत्र
A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
भोज  mfn. mfn. bestowing enjoyment, bountiful, liberal, [RV.]
enjoying, leading a life of enjoyment, [BhP.]
भोज  m. m. a king with uncommon qualities, [AitBr.]
(pl.) N. of a country (near the विन्ध्य mountain) or of a people (the descendants of महा-भोज), [MBh.]; [Hariv.]; [Pur.] &c.
a king of the भोजs, [MBh.]
N. of भोज-देव (q.v.), [Daś.]; [Sāh.]; [Rājat.]
of various kings and other men, [Hariv.]; [Ragh.] &c.
भोज-कट   = q.v., [L.]
See also: भोज - कट

भोज [bhōja] a.  a. Bestowing enjoyment; राजा भोजो विराट् सम्राट् क्षत्रियो भूपतिर्नृपः [Mb.12.68.54.]
Leading a life of enjoyment, enjoying; देवासुरमनुष्येषु ये भजन्त्यशिवं शिवम् । प्रायस्ते धनिनो भोजाः [Bhāg.1.88.1.]
Liberal, bountiful.
भोजः [bhōjḥ]   [भुज्-अच्] N. of a celebrated king of Mālvā (or Dhārā); (supposed to have flourished about the end of the tenth or the beginning of the eleventh century, and to have been a great patron of Sanskṛit learning; he is also supposed to have been the author of several learned works, such as सरस्वतीकण्ठाभरण &c.).
 N. N. of a country.
 N. N. of a king of the Vidarbhas; भोजेन दूतो रघवे विसृष्टः [R.5.39;7.18,29,35.]
-जाः   (m. pl.) N. of a people. -Comp.
-अधिपः   an epithet of
Kamsa.
Karṇa.
-इन्द्रः   a king of the Bhojas.-कटम् N. of a town founded by Rukmin.
-कुलम्   the dynasty of the Bhojas who ruled over the country of Vidarbha or Berar; अभोजयद् भोजकुलाङ्कुरः क्वचित् [N.16.48.]-देवः,
-राजः   king Bhoja; धन्यः श्रीभोजराजस्त्रिभुवनविजयी Udb; see (1) above.
पतिः king Bhoja.
an epithet of Kamsa.

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
भोज  m.  (-जः)
1. A country, Pātnā and Bhāgalpur.
2. The name of a sovereign of Oujein, or MĀLAVA who is supposed to have flour- [Page538-b+ 60] ished about the end of the tenth century; he was a celebrated patron of learned men, and the nine gems or poets and philoso- phers, are often ascribed to his æra.
3. A cowherd.
E. भुज् to enjoy, aff. अच् and the final consonant unchanged.

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
bhōja & भोजपत्र Properly भूर्ज & भूर्जपत्र.

 न. भूर्ज , भूर्जपत्र पहा . मग आणूनिया पुढें ठेविलें भोजपत्र उकलोनि । - होला ६० .
 न. 
 न. ज्वारी व भांगेपासून केलेलें पेय . यास सिद्धि असेहि म्हणतात . ( सं . भुज = खाणें .)
उल्हास ; आनंद . मग तया बोधाचेनि माजें । नाचती संवादसुखाचीं भोजें । - ज्ञा १० . १२० .
कर्तबगारी ; करामत . जेणें जग आपुलेनि भोजें । नाचवीत असें । - ज्ञा ३ . २४९ .
चित्र ; मूर्ति ; सोंग . परि पुढें वालभाचें भोज । नाचत असे । - ज्ञा ६ . १२३ .
प्रेम ; आवड ; कौतुक ; आदर ; संतोष ; सुख . जयाचे वाचेपुडें भोजे । नाम नाचत असे माझें । - ज्ञा ९ ५०६ .
वृद्धि ; वाढ . तैसेंचि सत्व रज । लोपोनि तमाचें भोज । - ज्ञा १४ . २०० .
निधान ; सांठा ; ठेवा . अथवा दाविलें भोज । आनंदाचें । - कथा १ . ६ . १९३ .
भोजन ; जेवण . जेयां वाइलें राणिवेचें भोज । - शिशु ३६० .
राज्य . व्हावें कीं सुखाचें भोज । - स्वादि १२ . १ . ९२ .
भूषण ; अलंकार . कवण वाईल मंत्रिपणाचें भोज ! । - भाए १३३ .
मोठेपणा ; महत्त्व ; मोल . [ सं . भुक ]
०कोटदेश  पु. कच्छदेश . - अश्वप १ . ३४ .
०राजा  पु. 
( महानु . ) कंस राजा . करी कवलय पीडा भोजराजा निपांतु - गस्तो ६१ .
एक धारचा उदार राजा .

भोज n.  ऐतरेय ब्राह्मण में प्रयुक्त नृपों की उपाधि [ऐ.ब्रा.८.१२,१४.१७] । इन्हें ‘भौज्य’ नामांतर भी प्राप्त है [ऐ.ब्रा.७.३२,८.६, १२, १४, १६] । ऋग्वेद में भोज शब्द का प्रयोग दाता अर्थ में भी किया गया है [ऋ.१०.१०७.८-९]
भोज II. n.  एक लोकसमूह, जो सुदास राजा का अनुचर था । ऋग्वेद के अनुसार, इन लोगों ने विश्वामित्र ऋषि के अश्वमेध यज्ञ में उसकी सहायता की थी [ऋ.३.५३.७]
भोज III. n.  पुराणों में निर्दिष्ट महाभोज राजा के वंशजों के लिये मुक्त सामूहिक नाम । इन लोगों की एक शाखा मृत्तिकावत् नगर में रहती थी, जो बभ्रु दैवावृध नाम राजा से उत्पन्न हुई थी [ब्रह्म.१५.४५]
भोज IV. n.  एक राजवंश, जो सुविख्यात यादवकुल में अंतर्गत था [म.आ.२१०.१८] । इन्हे वृष्णि, अंधक, आदि नामांतर भी प्राप्त थे । इस वंश में उत्पन्न एक राजा को उशीनर से एक खङ्ग के प्राप्ति हुई थी [म.शां.१६६.८९] । संभव है, इस वंश में निम्नलिखित राजा समाविष्ट थेः---(१) विदर्भाधिपति भीष्म---इसे महाभारत में भोज कहा गया है [म.उ.१५५.२] । (२) कुकुरवंशीय आहुक---इसे हरिवंश में भोज कहा गया है [ह.वं.१.३७.२२] । (३) विदर्भाधिपति रुक्मिन्---इसने ‘भोजकट’ (भोजों का नगर) नामक नयी राजधानी की स्थापना की थी (रुक्मिन् देखिये) । (४) महाभोज---यह यादववंशीय सात्वत राजा का पुत्र था । भागवत के अनुसार इसके वंशज भोज कहलाते थे [भा.९.२४.७-११]
भोज IX. n.  कान्यकुब्ज देश का एक राजा । एक बार इसे एक सुंदर स्त्री का दर्शन हुआ, जिसका सारा शरीर मनुष्याकृति होने पर भी केवल मुख हिरणी का था । इस विचित्र देहाकृति स्त्री को देखने पर इसे अत्यधिक आर्श्वय हुआ, एवं इसने उसकी पूर्व कहानी पूछी । फिर इसे पता चला की, वह स्त्री पूर्वजन्म में हिरनी थी । उस हिरनी के शरीर का जो भाग तीर्थ में गिरा, उसे मनुष्याकृति प्राप्त हुई, एवं केवल मुख तीर्थस्पर्श ने होने से हिरणी का ही रह गया । पश्चात् इसने इस स्त्री के मुख का खोज किया, एवं उसे तीर्थ में डुबों दिया, जिस कारण उस स्त्री को सुंदर मनुष्याकृति मुख की प्राप्ति हो गई । पश्चात् इस राजा ने उस स्त्री के साथ विवाह किया [स्कंद७.२.२]
भोज V. n.  मार्तिकावत् (मृत्तिकावती) नगरी का एक राजा, जो द्रौपदी के स्वयंवर में उपस्थित था [म.आ.१७७.६]
भोज VI. n.  एक राजवंश, जो हैहयवंशीय तालजंघ राजवंश में समाविष्ट था ।
भोज VII. n.  (सो. विदू.) एक राजा, जो मत्स्य के अनुसार, प्रतिक्षत्र राजा का पुत्र था । अन्य पुराणों में इसका ‘स्वयंभोज’ नामांतर दिया गया है, एवं इसे क्रोष्टुवंशीय कहा गया है ।
भोज VIII. n.  कश्यपकुलोत्पन्न गोत्रकार ऋषिगण ।

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
BHOJA I   A king of the ancient country named Mārttikāvata. In [Mahābhārata Ādi Parva, Chapter 185, Verse 6], we see that this king had attended the Svayaṁvara of Draupadī. He was slain by Abhimanyu at the battle of Kurukṣetra. [M.B. Droṇa Parva, Chapter 48, Verse 8].
BHOJA II   A king of Yaduvaṁśa. [Mahābhārata, Śānti Parva, Chapter 166, Verse 79] says, that he died under the stroke of the sword of Mahārāja Uśīnara. Bhojavaṁśa takes its source from this king.
BHOJA III   A king who became renowned as a Sanskrit scholar. It is believed that he lived from 1018 to 1054 A.D. His capital city was Dhārā. Bhoja is credited with the authorship of two scholarly books entitled, “Sarasvatīkaṇṭhābharaṇa” and “Sṛṅgāraprakāśa”. Of these, the first is a compendious volume in five chapters, dealing with the merits and defects of poetry, figures of speech, etc. Bhoja observes that besides the four styles (in poetry) laid down by Rudraka, there are two more styles, namely, “Avanti” and “Māgadhī”.
BHOJA IV   A follower of Sudās. In [Ṛgveda, 3rd Maṇḍala, 58th Anuvāka, 7th Sūkta] we find that this Bhoja had given help to sage Viśvāmitra in performing his Aśvamedha yāga.
BHOJA V   A king of Kānyakubja. Once this king Bhoja met a woman with a fantastic shape. Her body was of human shape while her face was that of a female deer. When the king asked her about her strange shape, she related her past history as follows:--“In my previous birth, I was a female deer. On one occasion the whole of my body except my face, was plunged in a river and those parts of the body under the water were transformed into human shape. From that day, I have been changed into this form.” On hearing her story, the king took her to the holy river and immersed her again in it. She was at once transformed into an actual woman and the king married her. [Skanda Purāṇa, 7-2-2].
BHOJA(Ṁ)   (BHOJAVAṀŚA). This is a branch of Yaduvaṁśa. [M.B. Ādi Parva, Chapter 217, Verse 18].

( = भोजन ).

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