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कपिल

See also:  कपिला
A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
कपिल  mfn. mf()n. (√ कम्, [Uṇ. i, 56]; more probably connected with कपि, [BRD.]), ‘monkey-coloured’, brown, tawny, reddish, [RV. x, 27, 16]; [ŚBr.]; [R.] &c.
red-haired, [Mn. iii, 8]
कपिल  m. m. the brown or tawny or reddish colour, [Suśr.]
a kind of mouse
a kind of ape, [Kathās.]
a (brown) dog, [L.]
incense, [L.]
N. of an ancient sage (identified by some with विष्णु and considered as the founder of the सांख्य system of philosophy), [MBh.]; [Bhag.] &c.
N. of several other men
of a दानव, [Hariv. 197]; [BhP.]
of a नाग, [MBh. iii, 8010]; [Hariv.] &c.
of a वर्ष in कुश-द्वीप, [VP. ii, 4, 37]
of several mountains
a form of fire, [MBh. iii, 14197]
N. of the sun, [MBh. iii, 154]
कपिल  m. m. pl.N. of a people, [VarBṛS.]
कपिल  m. m. of the Brāhmans in शाल्मल-द्वीप, [VP. ii, 4, 31]
a fabulous cow celebrated in the पुराणs, [W.]
a kind of leech, [Suśr. i, 40, 20]
a kind of ant, [Suśr. ii, 296, 12]
Dalbergia Sissoo, [L.]
Aloe Perfoliata, [L.]
a sort of perfume, [L.]
a kind of medicinal substance, [L.]
a kind of brass, [L.]
N. of a daughter of दक्ष, [MBh.]
of a किंनर woman, [Kāraṇḍ.]
of a river, [MBh. iii, 14233]; [VP.]
N. of the female of the elephant पुण्डरीक (q.v.), [L.]

कपिल [kapila] a.  a. [कपि-लच्]
Tawny, reddish; वाताय कपिला विद्युत् Mbh. on [P.II.3.13.]
Having tawny hairs; नोद्वेहेत्कपिलां कन्याम् [Ms.3.8.] (Kull. = कपिलकेशा).
लः N. of a great sage. [He reduced to ashes 6 sons of Sagara, who while searching for the sacrificial horse of their father taken away by Indra, fell in with him and accused him of having stolen it (see [U.1.23.]). He is also said to have been the founder of the Sāṅkhya system of philosophy.] ऋषि प्रसूतं कपिलं यस्तमग्रे ज्ञानैर्बिभर्ति Śāṅk Bhāṣ. on Bād. Sūtras 2.1; सिद्धानां कपिलो मुनिः [Bg.1.26.]
A dog.
Benzoin.
Incense.
A form or fire.
The tawny colour.
Impure benzoin.
 N. N. of the sun.
 N. N. of a country.
One of the incarnation of Viṣṇu.
ला A brown cow; कपिला चेत्तारयति भूयश्चासप्तमं कुलम् [Y.1.25.]
A kind of perfume.
A kind of timber.
The common leech.
 N. N. of the female elephant of the south east.-Comp.
-अक्षी   a kind of deer.
-अञ्जनः  N. N. of Śiva.-अश्वः an epithet of Indra.
-आचार्यः   Viṣṇu.
-द्युतिः   the sun.
-द्राक्षा   A vine with brown grapes.
-धारा  N. N. of the Ganges.
A holy place.
-वस्तु  N. N. of the town in which Buddha was born. (कपिला) षष्ठी The sixth day in the dark half of भाद्रपद.
-संहिता  N. N. of an Upa-purāṇa.
-स्मृतिः  f. f. Sāṅkhya Sūtras of Kapila.

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
कपिल  mfn.  (-लः-ला-लं) Tawny.
 m.  (-लः)
1. KAPILA, a celebrated Muni or saint, the founder of the Sankhya system of phlilosophy: the son of KERDDAMA by DEVAHUTI, and according to some, an avatar of VISHNU.
2. A title of AGNI the deity of fire.
3. A dog.
4. Tawny, (in colour.)
 f.  (-ला)
1. The female elephant of the south-east.
2. A kind of Sisu, or timber tree so called: see शिंशपा.
3. A sort of per- fume: see रेणुका
4. The aloe plant.
5. A fabulous cow, celebrated in the Puranas.
6. The common leech.
E. कम् to desire, इलच् Unadi affix, and substituted for म; or कपि a monkey, and to take, &c. being of such a colour.

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
kapila a S pop. कपिला a Tawny.

वि.  पिंगट ; तपकिरी किंवा जर्दा ( रंग ). ऐके तातलें साडेपंधरें । तैसीं कपिलवणें अपारें । ' - ज्ञा . ११ . १३२ . ( सं .)

कपिल II. n.  कर्दम को देवहूति से उत्पन्न पुत्र । यह स्वायंभुव मन्वंतर का अवतार है । कर्दम ऋषि ने संन्यस्त होने का निश्चय किया । तब देवहूति ने पूछा, ‘संसारचक्र मे मेरी रक्षा कौन करेगा?’ श्री हरि के वचन---मैं तेरे घर जन्म लूंगा’ स्मरण होने के कारण, कर्दम ने कहा, ‘श्रीहरि तुम्हारी कोख से जन्म लेंगे तथा वे तुम्हें ब्रह्मज्ञान दे कर संसारचक्र से मुक्त करेंगे । श्रीहरि की आराधना करो जिससे वे तुम्हारे उदर में आवेगे ।’ तदनुसार उसने श्रीहरि की आराधना की, जिससे कपिल उत्पन्न हुआ. कपिल का जन्म सिद्धपुर में हुआ [दे. भा.९.२१] । यह हमेशा बिंदुसर पर रहता था [भा.३.२५.५] । ये दोनों स्थान समीप रहे होंगे । कालांतर में देवहूति को इसने ब्रह्मज्ञान बताया तथा उसे संसारचक्र से मुक्त कर पाताल में जा कर रहने लगा । वहॉं खोजते सगर पुत्र वहॉं आये । यह सो रहा था ऐसा हरिवंश में दिया गया है । [ह.वं. १.१४-१५.] यही चोर है, इसी ने हमारा अश्व चुराया है यों समझ कर उन्होंने कपिल पर शस्त्रास्त्रों से प्रहार किया । तब कपिल ने क्रोधयुक्त दृष्टि से देख कर उन्हें भस्म कर दिया । इनमें से चार लोग जीवित रहे (सगर देखिये) । भागवत में दिया है कि, सब लोग भस्म हो गये [भा.९.८.१२] । व्यक्ताव्यक्त तत्त्व पर आसुरि से इसका संभाषण हुआ था । जिसमें आसुरि पृच्छक था तथा कपिल निवेदिता था । इसका शिष्य आसुरि । आसुरि का शिष्य पंचशिख [नारद.१.४५] था । पंचशिख कपिल का अवतार है यें उसे सांख्यज्ञान के प्रभाव से लोगों को प्रतीत होता था [म. शां. २११] । नारदपुराण में दो कपिल दिये गये है । उनमें से एक ब्रह्मा का [नारद. १.४५] । तथा दूसरा विष्णु का अवतार था [नारद. १.४९] । आचार्यतर्पण में पंचशिखादि के साथ इसका उल्लेख है [मत्स्य. १२.९८]; कात्या. परि. । इनमें से कौन सा सांख्यशास्त्रज्ञ तथा कौन सा वेदांती था, यह समझ में नहीं आता । कपिल नामक किसी ऋषि ने स्यूमरश्मि से संवाद किया था । उनका संवाद कपिल के वेदविषयक कथन से शुरु हुआ । इसने यज्ञ में भी गाय अवध्य है, इसी विषय पर वादविवाद किया [म.शां. २६०] । भागवत में “सांख्यशास्त्र की रचना के लिये पंचम जन्म लोगे ऐसा कहा तथा मेरे घर में जन्म लिया," इस वचन के कारण भागवत का कपिल सांख्यशास्त्रज्ञ रहा होगा तथा यह विष्णु का अवतार ही है [भा.१.३.१०, ३. २४. ६९];[ विष्णु.२.१४] । सांख्यशास्त्रज्ञ कपिल की स्मृति ने निंदा की है, तथा श्रुति में एक कपिलमाहात्म्य वर्णित है [श्वे. उ.५.२]; ब्र. स.२. १-१ शांकरभाष्य । अर्थात् यह वेदांती कपिल रहा होगा । इसके वासुदेव [म.व. १०६.२] तथा चक्रधनु [म.उ. १०७. १७] नामांतर है । वासुदेव तथा चक्रधेनु दोनों कपिल सगरपुत्रघ्न अर्थात् एक ही है । कामरुप देश में इसने कपिलेश्वर की स्थापना की [स्कंद.१.२.४५] । ब्रह्मदेव से वरदान प्राप्त कर रावण पश्चिम तट पर गया । वहॉं उसने एक तेजस्वी पुरुष देखा । रावण ने उसे युद्ध के लिये चुनौती दी । तब उस पुरुष ने रावण को एक तमाचा लगाया, जिसके कारण वह चक्कर खा कर धरती पर गिर पडा । तदनंतर वहॉं उसने एक सुंदर स्त्री देखी तथा उसकी अभिलाषा की । तब इस पुरुष ने यह जान कर उसकी ओर केवल देखा, जिससे रावण फिर धरती पर गिर पडा । रावण ने उठ कर उससे फिर पूछा, “आप कौन हैं?" तब इसने बताया कि, मेरे हाथ से शीघ्र ही तेरी मृत्यु होगी । इससे यह पता चलता है कि, यह विष्णु का अवतार रहा होगा । राम के प्रश्न का उत्तर देते समय, वसिष्ठ ने बताया कि, यह पुरुष कपिल महर्षि है [वा.रा.उ. ५ प्रक्षिप्त] । वेनवध के पश्चात् इसी के कहने पर पृथु को उत्पन्न किया गया । पृथु ने कपिल को वत्स बना कर पृथ्वी को स्थिरस्थावर बनाया [भा.४.१८-१९] । गौतमीकपिलासंगम का माहात्म्य बताते समय, यह जानकारी दी गयी है [ब्रह्म. १४१] । आगे चल कर सांख्य का तत्त्वज्ञान बताया गया है, परंतु वहा कपिल का नामोल्लेख भी नहीं है [ब्रह्म २३९]; पंचशिख देखिये । इसके रचित ग्रंथः---१. सांख्यसूत्र, २. तत्त्वसमास, ३. व्यासप्रभाकर, ४. कपिलगीता (वेदांतविषयक), ५. कपिलपंचरात्र, ६. कपिलसंहिता (उल्कलतीर्थमाहात्म्य)७. कपिलस्तोत्र, ८. कपिलस्मृति । वाग्भट ने वैद्यविषयक ग्रंथरचयिता कह कर इसका उल्लेख किया है (C.C.)|
कपिल III. n.  रुद्रगणों में से एक ।
कपिल IV. n.  विश्वामित्र के पुत्रों में से एक ।
कपिल IX. n.  वेन का वध करनेवाले ऋषियों में से एक ।
कपिल V. n.  दनु एवं कश्यप का पुत्र, एक दानव ।
कपिल VI. n.  कद्रू तथा कश्यप का पुत्र, एक नाग ।
कपिल VII. n.  ब्रह्मांडमतानुसार वसुदेव का सुगंधी से तथा वायुमतानुसार वनराजी से उत्पन्न पुत्र । यह राज्य न कर विरक्त हो कर वन में चला गया ।
कपिल VIII. n.  विंध्य पर रहनेवाला एक वानर ।
कपिल X. n.  ०. (सो. नील.) भद्राश्व का पुत्र । अन्य पुराणों में कापिल्य ऐसा पाठभेद है ।
कपिल XI. n.  १. शिवावतार दधिवाहन का शिष्य ।
कपिल XII. n.  २. एक यक्ष । इसने खशाकन्या केशिनी से यक्षराक्षस उत्पन्न किये । इल की नीला नामक कन्या थी [ब्रह्मांड ३.७.१]
कपिल XIII. n.  ३. एक ब्राह्मण । एकादशी उपवास करने के कारण यह संपन्न हुआ [पद्म. उ.३०]

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
KAPILA I   A fierce sage.
1) Genealogy and birth.
Kapila was the son of Kardamaprajāpati, son of Brahmā, born to him of his wife Devahūti, grand-daughter of Brahmā and daughter of Svāyambhuva Manu. Svāyambhuva Manu got two sons named Priyavrata and Uttānapāda and three daughters named Ākūti, Devahūti and Prasūti. The daughters were married to Ruci, Kardama and Dakṣa respectively. To Ruci was born of Ākūti a boy named Yajña. He was a partial incarnation of Viṣṇu. To Kardama was born of his wife Devahūti Kapilācārya, a great sage and the celebrated exponent of the Sāṅkhya philosophy. Prasūti got many daughters [8th Skandha, Devī Bhāgavata]. Sage Kapila was known as Cakradhanus also. [Śloka 17 Chapter 109, Udyoga Parva]. Kardama married the daughter of Vaivasvata Manu called Devahūti. They spent their honeymoon in the air travelling throughout the world. Devahūti delivered nine daughters and a son named Kapila. Kardamaprajāpati gave his daughters in marriage to Marīci and the other sages.
2) Kapila--incarnation of Viṣṇu.
The Brahmāṇḍa Purāṇa states that Kapila was the incarnation of Viṣṇu. In Chapter 93 there is this statement: “Bhagavān Nārāyaṇa will protect us all. The Lord of the universe has now been born in the world as Kapilācārya.
” 3) Kapila imparts spiritual knowledge to his mother.
Kapila started a severe penance. At that time Kardamaprajāpati died and Devahūti wife of Kardama and mother of Kapila approached Kapila and asked him to instruct her on the path of Bhakti Yoga. Kapila imparted to her spiritual knowledge and gave her instructions to follow the path of Bhakti Yoga for Salvation. She entered into a life of austerities and attained Samādhi. [3rd Skandha, Bhāgavata].
4) How Kapila burnt to ashes the Sagarputras.
Once there was a king called Sagara in the Solar dynasty. He had two wives named Keśinī and Sumati. Keśinī got a son named Asamañjasa and Sumati got sixtythousand sons. Once Sagara conducted an Aśvamedha Yāga at a place where the rivers Sindhu and Gaṅgā meet. Aṁśumān, son of Asamañjasa led the sacrificial horse. Indra disguised as a demon stole the horse when it came to a mountain side and hid it in the nether worlds. Sagara sent his sixtythousand sons in search of the horse. They dug the whole continent of Jambūdvīpa surrounded by mountains. Devas, gandharvas and bhujaṅgas complained to Brahmā. Then Brahmā said: “The whole of this world belongs to Viṣṇu. He has incarnated himself as sage Kapila to kill the sons of Sagara and is now in the nether-world bearing this world. In the fire of his anger the Sagaraputras will be burnt to death”. On hearing this all of them came back. The Sagaraputras returned to their father when they could not find the horse. But Sagara ordered “Go and dig again till you find it”. They went to the nether world. After circling the eight elephants who carry the world they dropped down to the nether world through the north-east corner of the earth. There they saw sage Kapila engaged in penance and the sacrificial horse grazing by his side. The sons of Sagara made a great hubbub there and Kapila produced a big sound of rebuke and stared at them. All the sixtythousand sons of Sagara were reduced to ashes. For more details see under Bhagīratha. [Sargas 39 and 40, Bālakāṇḍa. Vālmīki Rāmāyaṇa].
5) Kapilayogaśāstra.
Kapila made the renowned Kapila- śāstra sitting in his Āśrama and taught it to his mother Devahūti. Kapila was a great yogin. The yoga Śāstra itself is based on the Sāṅkhya philosophy of Kapila. His Sāṅkhya Śāstra, known as Kāpila Śāstra also, contains the distinctive yoga of meditation and it creates in you spiritual knowledge removing your ignorance totally. After teaching his mother his ‘Kāpila’ he went to the Āśrama of Pulaha and lived there. [8th Skandha, Devī Bhāgavata].
6) Other details regarding Kapila.
(i) Kapila was the preceptor of the King of Sindhu. 5th Skandha, Bhāgavata).
(ii) Kapila visited Bhīṣma while the latter was lying on his bed of arrows before his death. [Śloka 8, Śānti Parva, M.B.].
(iii) There occurred a discussion once between Kapila and a Sage named ‘Gau’ on the subject whether Gṛhasthadharma (doing one's duty as a house-holder) or yogadharma (doing yoga practices) was superior. [Chapter 286, Śānti Parva].
(iv) Kapila was a sage of great brilliance of body. When the sons of Sagara went to the nether world in search of the horse they saw the sage Kapila sitting there radiating a brightness equal to that of fire. [Chapter 107, Araṇya Parva].
(v) Kapila was an authority on Sāṅkhya and Veda and was a worshipper of Śiva. [Śloka 4, Chapter 18, Anuśāsana Parva].
(vi) He has written two books, namely, Sāṅkhyapravacana and Tattvasamāsa.
KAPILA II   Another name of Sūrya. [Śloka 24, Chapter 3, Vana Parva, M.B.].
KAPILA III   A serpent king. It is believed that Kapila is one of the seven serpent Kings who hold the earth in its position. The others are: Dharma, Kāma, Kāla, Vasu, Vāsuki and Ananta. [Śloka 41, Chapter 150, Anuśāsana Parva].
KAPILA IV   Son of an Agni named Bhānu. He was his fourth son and was believed to be another incarnation of sage Kapila [Śloka 21, Chapter 221, Vana Parva].
KAPILA TĪRTHA   A sacred pond owned by a King called Kapila. [Śloka 32, Chapter 84, Vana Parva].
KAPILA V   Another sage who was the father of Śālihotra. He officiated in a yajña conducted by Uparicaravasu. [Chapter 336, Śānti Parva].
KAPILA VI   A son of Viśvāmitra who was a brahmavādī. [Chapter 4, Anuśāsana Parva].
KAPILA VII   A synonym of Śiva. [Chapter 17, Anuśāsana Parva].
KAPILA VIII   A synonym of Viṣṇu. [Chapter 149, Anuśāsana Parva].

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