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इक्ष्वाकु

   { ikṣvākuḥ, ikṣvāku }
Script: Devanagari

इक्ष्वाकु     

Puranic Encyclopaedia  | English  English
IKṢVĀKU   A son of Vaivasvata Manu.
1) Genealogy.
From Viṣṇu were descended in the following order--Brahmā--Marīci--Kaśyapa--Vivasvān -Vaivasvata Manu--Ikṣvāku. Śraddhā, Vaivasvata Manu's wife bore him ten sons-- Ikṣvāku, Nṛga, Śaryāti, Diṣṭa, Dhṛṣṭa, Karūṣa, Nariṣyanta, Nābhāga, Pṛṣadhra and Kavi. Vaivasvata Manu had six more sons by another wife, Chāyā. They were Manu, Yama, Yamī, Aśvinīkumāra, Revanta, Sudyumna. The Ikṣvāku family takes its source from Ikṣvāku. The Kings of the solar dynasty were all born in the Ikṣvāku family. This dynasty is named “Solar Dynasty” because Ikṣvāku was born to Vivasvān (Sun) the son of Kaśyapa. In [Devī Bhāgavata, 7th Skandha] we see that Ikṣvāku was born from Manu's spittle. The descendants of Ikṣvāku up to Śrī Rāmā's sons Lava and Kuśa are given below:-- Ikṣvāku had three sons--Daṇḍa, Vikukṣi, and Nimi. From Vikukṣi was born Śaśāda; from Śaśāda, Purañjaya; from Purañjaya, Kakutstha; from Kakutstha, Anenas; from Anenas, Pṛthulāśva; from Pṛthulāśva Prasenajit; from Prasenajit, Yuvanāśva; and from Yuvanāśva was born Māndhātā. Ambarīṣa, Mucukunda and Purukutsa were the sons of Māndhātā. Besides them he had fifty daughters also. The sage Saubhari married them. The family-tree continues again from Purukutsa, one of the sons of Māndhātā. From Purukutsa, Trasadasyu was born; from Trasadasyu, Anaraṇya; from Anaraṇya, Aryaśva; from Aryaśva, Vasumanas; from Vasumanas, Sutanvā; from Sutanvā, Trairyyāruṇa; from Traiyyāruṇa, Satyavrata or Triśaṅku; from him Hariścandra; from Hariścandra, Rohitāśva; from Rohitāśvā, Harita; from Harita, Cuñcu; from Cuñcu, Sudeva; from Sudeva, Bharuka and from Bharuka Sagara was born. Sagara had two wives--Sumati and Keśinī. Sumati gave birth to 60,000 children, while Keśinī had a single son, Asamañjasa. Aṁśumān was the son of Asamañjasa; Bhagīratha was the son of Aṁśumān; Śrutanābha was the son of Bhagīratha; Sindhudvīpa was the son of Śrutanābha; Ayutāyus was the son of Sindhudvīpa; Ṛtuvarṇa was the son of Ayutāyus; Sarvakāma was the son of Ṛtuvarṇa; Sudās was the son of Sarvakāma; Mitrasaha, the son of Sudās; Kalmāṣapāda was the son of Mitrasaha; Aśmaka was the son of Kalmāṣapāda; Mūlaka was the son of Aśmaka; Khaṭvāṅga was the son of Mūlaka; Dīrghabāhu (Dilīpa) was the son of Khaṭvāṅga; Raghu was the son of Dīrghabāhu; Aja was the son of Raghu; Daśaratha was the son of Aja. Daśaratha had three wives. Kausalyā, Kaikeyī and Sumitrā. Śrī Rāma was born to Kausalyā, Bharata, was the son of Kaikeyī and Sumitrā had two sons, Lakṣmaṇa and Śatrughṇa. Lava and Kuśa were Śrī Rāma's sons by Sītā. (See the word Kālabrāhmaṇa)
Note: 1) Mahābhārata Aśvamedha Parva (Chapter 4) says that Mahābāhu was the son of Vaivasvata Manu, Prasandhi was the son of Mahābāhu, Kṣupa was the son of Prasandhi and Ikṣvāku was the son of Kṣupa.]

Note: 1) There are certain variations in the genealogy according to some Purāṇas. The genealogy given above is based on [Bhāgavata] and [Agni Purāṇa] .]

इक्ष्वाकु     

इक्ष्वाकु n.  (सू.) वैवस्वत मनु के दस पुत्रों में से ज्येष्ठ [म.आ.७०.१३] ;[भवि. ब्राह्म. ७९] । इसकी उत्पत्ति के संबंध में जानकारी इस प्रकार मिलती हैं । एक बार मनु को छींक आयी । उस छींक के साथ ही यह लडका सम्मुख खडा हुआ । इस पर से इसका नाम इक्ष्वाकु पडा [ह. वं.१.११.दे. भा. ७.८] ;[भा. ९.६] ;[ब्रह्म. ७.४४] ;[विष्णु.४.२.३] । मनु के कहा कि, तुम एक राजवंश के उत्पादक बनो, दंड की सहायता से राज्य करो, तथा व्यर्थ ही किसी को दंड मत दो । अपराधियों को दंड देने से स्वर्गप्राप्ति होती है । इस तरह का उपदेश दे कर, जो कार्य करना होगा उसकी रुपरेखा मनु ने इसे बतायी । मनु ने पृथ्वी के दस भाग बनाये । वसिष्ठ की आज्ञानुसार वे सुद्युम्न को न दे कर, इक्ष्वाकु को दिये [वायु.८५.२०] । मनु ने मित्र तथा वरुण देवताओं के लिये याग किया । इस कारण इक्ष्वाकु तथा अन्य पुत्र प्राप्त हुए, ऐसी कथा है [विष्णु.४.१] । वसिष्ठ इक्ष्वाकु राजा का कुलगुरु था [म.आ.६६.९-१०] ;[ब्रह्मांड. ३.४८.२९] ;[पद्म. सृ. ८.२१,४४.२३७.] ;[विष्णु. ४.३.१८] ;[वा.रा.उ.५७] । सूर्यवंश में प्रत्येक राजा के समय, वसिष्ठ के कुलगुरु होने का निर्देश है । इक्ष्वाकु, अयोध्या का पहला राजा था [वा.रा.अयो. ११०] । इसे मध्यदेश मिला था [ह. वं. १.१०] ;[लिङ्ग १.६५.२८] ;[ब्रह्मांड. ३.६०.२०] ;[मत्स्य. १२.१५] । यह क्षुप का पुत्र है ऐसा भी कहीं कहीं उल्लेख हैं । क्षुप ने प्रजापालनार्थ इसे एक खड्‌ग दी थी [म. शां. १६०. ७२] ;[म. आश्व. ४.३] । वंशावली में प्रत्यक्ष क्षुप का उल्लेख नही है । एक समय इक्ष्वाकु यात्रा करते हिमालय की तलहटी के पास आया । वहॉं जप करनेवाला कौशिक नाम का ब्राह्मण था । उसका यम, ब्राह्मण, काल तथा मृत्यु के साथ, निष्काम जप के संबंध में संवाद हुआ । उस समय इक्ष्वाकु वहीं था [म.शां.१९२] । इक्ष्वाकु कुल में पैदा हुए व्यक्तियों के लिये भी, इक्ष्वाकु कुलनाम दिया गया है । अलंबुषा के पति का नाम तृणबिंदु न हो कर इक्ष्वाकु था, ऐसा निर्देश है [वायु. ८६.१५] ;[वा.रा.बा.४७.११] । इक्ष्वाकु के सौ पुत्र थे [ह. वं. १.११] ;[दे. भा. ७.९] ;[भा. ९, ६] ;[म. अनु.५] ;[म. आ. ७५] । इसके ज्येष्ठ पुत्र का विकुक्षि था । इक्ष्वाकु के पश्चात यही अयोध्या का राजा हुआ । विकुक्षि से निमिवंश निर्माण हुआ । इक्ष्वाकु को दंडक नामक एक विद्याविहीन पुत्र भी था । इसी के नाम से दंडकारण्य बना [वा.रा.उ.७९] ;[भा. ९.६] ;[विष्णु. ४.२] । इसके दसवें पुत्र का नाम दशास्व था । वह माहिष्मती का राजा था [म. अनु. २.६] । विष्णु पुराण में इक्ष्वाकु के एक सौ एक पुत्र होने का निर्देश है [विष्णु. ४.२] । इक्ष्वाकु ने अपना राज्य सौ पुत्रों को बॉंट दिया [म. आश्व.४] । इसने शकुनि प्रभृति ५० पुत्रों को उत्तरभारत तथा शांति प्रभृति ४८ पुत्रों को, दक्षिणभारत का राज्य दिया । अयोध्या में इक्ष्वाकु का राज्य तथा वंश बहुत समय तक रहा । ईक्ष्वाकु वंश में बहुत से महान पुरुष हुए, इस कारण बहुत सारे पुराणों में इनकी वंशावलि मिलती है । पुराणों में दी गयी वंशावालियों में, बहुत साम्य होते हुए भी, रामायण में दी गई वंशावलि से वे भिन्न हैं । पुराणों में इक्ष्वाकु से ले कर, भारतीय युद्ध के बृहद्वल तक भागवतानुसार ८८, विष्णुमतानुसार ९३, तथा वायुमतानुसार ९१, पीढियॉं होती है । रामायणानुसार इनमें संख्या की अपेक्षा व्यक्तियों में अधिक भिन्नता है । संशोधकों के मतानुसार वंशावलि की दृष्टि से पुराणों का वर्णन ही अधिक न्यायसंगत होने की संभावना है । यद्यपि अधिक विस्तार से इसकी वंशावलि उपलब्ध है तथापि प्रमुख पुरुषों की है, सब पुरुषों की नही ऐसा वहॉं निर्देश है । (सुमित्र, राम तथा ऐक्ष्वाक देखिये) । इसकी पत्नी सुदेवा [पद्म. भू.४२]

इक्ष्वाकु     

हिन्दी (hindi) WN | Hindi  Hindi
noun  एक सूर्यवंशी राजा जो बहुत ही प्रतापी थे   Ex. इक्ष्वाकु के नाम पर ही इक्ष्वाकु वंश चला ।; इक्ष्वाकु राम के पूर्वज थे ।
ONTOLOGY:
पौराणिक जीव (Mythological Character)जन्तु (Fauna)सजीव (Animate)संज्ञा (Noun)
SYNONYM:
ईक्ष्वाकु
Wordnet:
benইক্ষাকু
gujઇક્ષ્વાકુ
kasاِکشواکُہٗ
kokइक्ष्वाकू
malഇക്ഷാകു
marइक्ष्वाकु
oriଇକ୍ଷ୍ବାକୁ
panਇਸ਼ਵਾਕੂ
sanइक्ष्वाकुः
tamஇஷ்வாகு
urdاکشواکُو

इक्ष्वाकु     

मराठी (Marathi) WN | Marathi  Marathi
noun  एक सूर्यवंशी राजा   Ex. इक्ष्वाकु हे रामाचे पूर्वज होते.
ONTOLOGY:
पौराणिक जीव (Mythological Character)जन्तु (Fauna)सजीव (Animate)संज्ञा (Noun)
Wordnet:
benইক্ষাকু
gujઇક્ષ્વાકુ
hinइक्ष्वाकु
kasاِکشواکُہٗ
kokइक्ष्वाकू
malഇക്ഷാകു
oriଇକ୍ଷ୍ବାକୁ
panਇਸ਼ਵਾਕੂ
sanइक्ष्वाकुः
tamஇஷ்வாகு
urdاکشواکُو

इक्ष्वाकु     

A Sanskrit English Dictionary | Sanskrit  English
इक्ष्वाकु  m. m. ([[RV.] ]) and इ॑क्ष्वाकु ([[AV.] ]). N. of a man, [RV. x, 60, 7] ; [AV. xix, 39, 9]
of a son of मनुवैवस्वत (father of कुक्षि and first king of the solar dynasty in अयोध्या), [MBh.] ; [R.] ; [Bhag.] ; [Hariv.] ; [VP.]
a descendant of इक्ष्वाकु, [R.] ; [Ragh.]
(some Buddhists as well as the जैनs derive their चक्रवर्तिन्s and many of their अर्हत्s from इक्ष्वाकु)
अवस्   () N. of a warrior-tribe descended from इक्ष्वाकु, [VarBṛS.]
इक्ष्वाकु  f. f. (उस्) a bitter gourd
according to some, the Coloquintida (Citrillus Colocynthis), the fruit of a wild species of Lagenaria Vulgaris, [Suśr.]

इक्ष्वाकु     

इक्ष्वाकुः [ikṣvākuḥ]   1 N. of the celebrated ancestor of the Solar kings who ruled in Ayodhyā; (he was the first of the Solar kings and was a son of Manu Vaivasvata; (cf. Bhāg. क्षुवतस्तु मनोर्जज्ञ इक्ष्वाकुर्घाणतः सुतः); इक्ष्वाकुवंशोऽभि- मतः प्रजानाम् [U.1.44.]
(pl.) Descendants of Ikṣvāku; गलितवयसामिक्ष्वाकूणामिदं हि कुलव्रतम् [R.3.7.]
-क्रुः  f. f. A kind of bitter gourd, Cucurbita Lagenaria (Mar. कडू दुध्या).

इक्ष्वाकु     

Shabda-Sagara | Sanskrit  English
इक्ष्वाकु  m.  (-कुः) The son of the Manu NAIVASWATA, the son of SURYA or the sun, and first prince of the solar dynasty: he reigned at Ajodhya in the commencement of the second Yuga or age.
 f.  (-कुः) A bitter gourd.
E. इक्षु and अक to obtain, and कु or उण् aff.
ROOTS:
इक्षु अक कु उण्

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