Dictionaries | References

व्रत

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
व्रत  f. n. (ifc.f(). ; fr.2.वृ) will, command, law, ordinance, rule, [RV.]
obedience, service, ib.; [AV.]; [ĀśvGṛ.]
dominion, realm, [RV.]
शुचि-व्र्°   sphere of action, function, mode or, manner of life (e.g., ‘pure manner of life’ [Śak.]), conduct, manner, usage, custom, [RV.] &c. &c.
व्रतं-√ चर्   a religious vow or practice, any pious observance, meritorious act of devotion or austerity, solemn vow, rule, holy practice (as fasting, continence &c.; , ‘to observe a vow’, esp. ‘to practise chastity’), ib.
व्रतात्   any vow or firm purpose, resolve to (dat.loc., or comp.; or व्रत-वशात्, ‘in consequence of a vow’; cf.असि-धारा-व्रत and आसिधारं व्रतम्), [MBh.]; [Kāv.] &c.
मधु-व्र्°   the practice of always eating the same food (cf.), [L.]
the feeding only on milk (as a fast or observance according to rule; also the milk itself), [VS.]; [Br.]; KātyŚr.
अ-याचित-व्र्°   any food (in q.v.)
महा-व्रत   = (i.e. a partic.स्तोत्र, and the day for it), [Br.]; [ŚrS.];
(with gen. or ifc.) N. of सामन्s, [ĀrṣBr.] ([L.] also ‘month’; season; year; fire; ‘= विष्णु’; ‘N. of one of the seven islands of अन्तर-द्वीप’)
व्रत  m. m. (of unknown meaning), [AV. v, 1, 7]; [ĀpŚr. xiii, 16, 8]
N. of a son of मनु and नड्वला, [BhP.]
(pl.) N. of a country belonging to प्राच्य, [L.]
व्रत  mfn. mfn. = वेद-व्रत, one who has taken the vow of learning the वेद, [Gṛhyās. ii, 3] (Sch.)

व्रतः [vratḥ] तम् [tam]   तम् [व्रज्-घ जस्य तः]
A religious act of devotion or austerity, vowed observance, a vow in general; अभ्यस्यतीव व्रतमासिधारम् [R.13.67;2.4,25;] (there are several vratas enjoined in the different Purāṇas; but their number cannot be said to be fixed, as new ones,e. g. सत्यनारांयणव्रत, are being added every day).
A vow, promise, resolve; सोऽभूद् भग्नव्रतः शत्रूनुद्धृत्य प्रतिरोपयन् [R.17.42;] so सत्यव्रत, पुण्यव्रत, दृढव्रत &c.
Object of devotion or faith, devotion; as in पतिव्रताः (पतिर्व्रतं यस्याः सा); यान्ति देवव्रता देवान् पितॄन् यान्ति पितृव्रताः [Bg.9.25.]
A rite, an observance, practice, as in अर्कव्रत q. v.; Śabaraswāmin difines it as पुरुषाणां क्रियार्थानां शरीरधारणार्थो बलकरणार्थश्चायं संस्कारो व्रतं नाम ŚB. on [MS.4.3.8.]
Mode of life, course of conduct; अथ तु वेत्सि शुचि व्रतमात्मनः [Ś.5.27.]
An ordinance, a law, rule.
Sacrifice.
An act, deed, work.
A design, plan.
Mental activity; व्रतमिति च मानसं कर्म उच्यते ŚB. on [MS.6.2.2.]
Celibacy; व्रतलोपनम् [Ms.11.61] (com. ब्रह्मचारिणो मैथुनम्); [Mb.12.11.22.] (com. व्रतं ब्रह्मचर्याद्युपेतमध्ययनम्). -Comp.
-आचरणम्   the observance of a vow.
-आदेशः   investiture of a youth (of any one of the three classes) with the sacred thread.
-उपवासः   a fast for a vow.
-ग्रहणम्   initiation into a vow for a religious performance.
-चर्यः   a religious student; see ब्रह्मचारिन्.
-चर्या   observance or practice of a religious vow.
-धारणम्   the fulfilling of a religious observance.
-पारणम्, -णा   conclusion of a vow or fast, eating after a fast.
-प्रतिष्ठा   performance of a religious vow voluntarily undertaken.
भङ्गः breach of a vow.
breach of a promise.
-भिक्षा   begging alms as part of the ceremony of investiture with the sacred thread.
-रुचि a.  a. delighting in religious observances, devout.
-लोपनम्   breaking a vow.-वैकल्यम् the incompletion of a religious vow.
-संग्रहः   initiation into a vow.
-संपादनम्   fulfilling a religious vow.
-स्थ a.  a. practising any vow.
-स्थः   a celibate; व्रतस्थमपि दौहित्रं श्राद्धे यत्नेन भोजयेत् [Ms.3.234.]
-स्नात a.  a. one who has bathed after completing a religious vow.कः a Brāhmaṇa who has completed the first stage of his religious life, i. e. that of a Brahmachārin or religious student; see स्नातक:; [Ms.4.31.]

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
व्रत  mn.  (-तः-तं)
1. Any meritorious act of devotion, the voluntary or vowed observance, or imposition of any penance, austerity, or privation, as fasting, continence, exposure to heat and cold, &c. 2. Eating.
3. Design, plan.
4. Vow, resolution.
5. Course of con- duct.
E. वृ to choose, aff. अतच्, र substituted for the vowel; or व्रज् to go, (to heaven by it,) aff. and changed to त .

ना.  पण , प्रतिज्ञा , बाणा ब्रीद , स्वतः केलेला नेम ( धार्मिक );
ना.  धर्मविहित आचरण , निष्ठापूर्वक आचरण .

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
Any self-imposed religious observance or obligation to hold it; a course imposed of works or sufferings; or a vow made to do or bear. मासव्रत An observance occupying a month: वर्षव्रत....a year.

 न. १ स्वतःला लावून घेतलेला एखादा धार्मिक नियम , नेम ; देहदंडाचा एक मार्ग . - ह ८ . १० . ( क्रि० घेणें . ) २ असा नेम पाळण्याची केलेली प्रतिज्ञा , पण . ३ ब्रीद ; प्रतिज्ञा ; बाणा . नतावनधृतव्रत ज्वलन तूंचि बा धावनीं । - केका ६ . [ सं . ] ( वाप्र ) तीळ खाऊन व्रत मोडणें - अगदीं क्षुल्लक कारणासाठीं , फायद्यासाठीं बाणा , नेम सोडणें . सामाशब्द -
०बंध  पु. मुंज ; यज्ञोपवीत धारण करणें . हें एक प्रकारचें व्रतच आहे . [ सं . ]
०भिक्षा  स्त्री. व्रतबंधाच्या आनुषंगिक कर्मापैकीं एक ; भिक्षा मागणें . [ सं . ]
०वैकल्य  न. १ व्रताची अपूर्णता ; त्यांतील न्यूनता , कमीपणा . २ लहानसहान व्रतें , नेम इ० व्रत अर्थ १ पहा .
०संग्रह  पु. व्रत घेणें ; व्रतस्थ असणें . व्रतस्थ , व्रती - वि . १ व्रत पाळीत असलेला ; व्रताप्रमाणें कांहीं नेम करणारा . २ स्त्रीसंग न करणारा ; ब्रह्मचर्य पाळणारा . अमृतराव सात वर्षाचा असतांना त्याची आई स्वर्गवासी झाली ; तेव्हांपासून बापूसाहेब व्रतस्थ होते . - मौनयौवना .

व्रत n.  (स्वा. उत्तान.) एक राजा, जो चाक्षुष मनु के पुत्रों में से एक था । इसकी माता का नाम नड्वला था [भा. ४.१३.१६]
व्रत II. n.  अभूतरजस् देवों में से एक ।

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
VRATA   Controls ordained by Vedic Saṁhitās are called Vratas. It is known as tapas (penance) also. Vratas are Avadama etc. When it involves mortifications of the body (tapas) it is called tapas or penance. Controlling the organs of sense is called niyama (control). Vrata, fast and restraining or control are always good. [Agni Purāṇa, Chapter 175].

Aryabhushan School Dictionary | mr  en |   | 
  A religious observance. A vow.

Keyword Pages

  |  
  • अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - प्रस्तावना
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासव्रत हेमाद्रि
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • अधिमासव्रत - अधिमासीयार्चव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • श्री अनन्त व्रत
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अनन्त व्रत कथा माहात्म्य
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत पूजन की सामग्री
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • व्रत का विधान
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • श्री अनन्त व्रत कथा
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • रेवा कीर्तन
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • स्तुति श्रीनाथजी की
    इस अति पुनीत श्री अनन्त व्रत कथा के अनुष्‍ठान ही से समस्त पापों का विनाश होता है और मनुष्य सुख तथा समृद्धि को प्राप्‍त होता है ।
  • अन्य व्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति, तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है और अंतरात्मा शुद्ध होती है ।
  • मौनव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • शत्रुनाशकव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षपूजाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षतुलसीदलार्पणव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रमामव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षप्रदक्षिणाव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  • लक्षवर्तिप्रदानव्रत
    व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।
  |  

Related Pages

  |  
  |  
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP