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रेणुका

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
रेणुका  f. af. See below
रेणुका  f. bf. a partic. drug or medicinal substance (said to be fragrant, but bitter and slightly pungent in taste, and of greyish colour; cf.रेणु), [L.]
रेणु-कारिका   N. of a कारिका (composed by हरि-हर; cf.), [Cat.]
of the wife of जमद्-अग्नि and mother of परशु-राम (she was the daughter of रेणु and of king प्रसेन-जित्), [MBh.]; [Hariv.]; [Pur.]
of a river, [VP.]

रेणुका [rēṇukā]   1 The wife of Jamadagni and mother of Paraśurāma; see जमदग्नि.
A kind of medicinal substance. -Comp.
-तनयः, -सुतः   an epithet of Paraśurāma.

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
रेणुका  f.  (-का) A sort of perfume and medicine, of a bitter and slightly pungent taste and greyish colour; it is procured in grains about the size of those of pepper.
2. The wife of the saint JAMADAGNI and mother of PARAŚURĀMA; once she saw the Gandharba-king CHITTRARATHA sporting with his queen and felt envious of their felicity. Defiled by unworthy thoughts she returned disquieted to her home. JAMADAGNI seeing her fallen from sanctity, was enraged and ordered his sons to cut off her head; and one of them PARA- SŪRĀMA with explicit obedience to his father's command beheaded her; but her husband was so much pleased with the dutifulness of his son that he restored her to life at the request of his son PARASŪRĀMA.
3. A sort of pulse, (Ervum or Cicer lens.)
E. रेणु sand, dust, and कन् added.

 स्त्री. विना . जमदग्नीची पत्नी व परशुरामाची आई .

रेणुका n.  इक्ष्वाकुवंशीय रेणु (प्रसेनजित्) राजा की कन्या, जो जमदग्नि महर्षि की पत्नी थी [भा. ९.१५.२];[ ह. वं. १.२७.३८];[ म. व. ११६.२] । कई अन्य ग्रंथों में इसे अनावसु की, एवं विकल्य में सुवेणु की कन्या कहा गया है [रेणु. ५] । कालिका पुराण में इसे विदर्भ राजा की कन्या कहा गया है [कालि. ८६] । इसे कामली नामान्तर भी प्राप्त था ।
रेणुका n.  महाभारत के अनुसार, इसकी उत्पत्ति कमल में हुई थी, एवं इसके पिता एवं भ्राता का नाम क्रमशः सोंप एवं रेणु था [म. अनु. ५३.२७] । सोंप राजा के द्वारा इसका पालन होने कारण, संभवत: उसे इसका पिता कहा होगा । रेणुकापुराण के अनुसार, रेणु राजा ने कन्याकामेष्टियज्ञ किया । उस यज्ञकुण्ड से इसकी उत्पत्ति हुई [रेणु. ३] । अपने पूर्वजन्म में यह अदिति थी । इसका स्वयंवर भागीरथी क्षेत्र में हुआ, जिस समय इसने स्वयंवर के समय इंद्र ने इसे कामधेनु, कल्यतक, चिंतामणि एवं पारत्स आदि विभिन्न मौल्यवान चीजे भेंट में दे दी [रेणु. १३] । एक बार जमदग्नि ऋषि बाणक्षेपण का खेल खेल रहे थे, जिस समय बाण वापस लाने का काम इस पर सौंपा, गया था । एकबार बाण लाने में इसे कुछ देरी हो गयी जिस कारण क्रुद्ध हो कर जमदग्नि ने अपने पुत्र परशुराम से इसका शिरच्छेद करने के लिए कहा [म. अन्. ९५. ७-१७] । अपने पिता की आज्ञानुसार, परशुराम ने इसका वध किया, एवं पश्चात जमदग्नि से अनुरोध कर इसे पुनर्जीवित कराया [म. व. ११६.५-१८]
रेणुका n.  इसे निम्नलिखित पाँच पुत्र थे:--- रुमण्वत्, सुषेण, वसु, विश्वावसु एवं परशुराम [म. व. ११६. १०-११] । रेणुकापुराण में ’ रुमण्वत्’ एवं ‘सुषेण’ के बदले पुत्रों के नाम ‘बृहत्मानु’ एवं ‘बृहत्कर्मन्’ दिये गयें हैं (रेणू. १३) । कलिका पुराण में ‘रुपण्वत्’ के बदले ‘मरुत्वत्’ नाम प्राप्त है [कालि, ८६]

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
REṆUKĀ I   The wife of the hermit Jamadagni. (For further details see under the word Jamadagni).
REṆUKĀ II   A holy place frequented by Sages. It is mentioned in [Mahābhārata, Vana Parva, Chapter 82]. Stanza 82 that those who bathe in this holy bath would become as pure as Candra (Moon). It is stated in [Mahābhārata, Vana Parva, Chapter 82], that this holy place lies within the boundary of Kurukṣetra.

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