Dictionaries | References

भैरव

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
भैरव  n. mf( and )n. (fr.भीरु) frightful, terrible, horrible, formidable (अम्ind.), [MBh.]; [R.] &c.
relating to भैरव, [Cat.]
भैरव  m. m.N. of a form of शिव (cf, [RTL. 85]), [Prab.]; [Rājat.]; [Pur.] (in the latter 8 Bh°s are enumerated, viz.महा-, संहार-, असिता-ङ्ग-, रुरु- काल-, क्रोध-, ताम्रचूड-, or कपाल-, चन्द्रचूड- or रुद्र-भ्°; sometimes other names are given e.g.विद्या-राज, काम-र्°, नाग-र्°, स्वच्छन्द-र्°, लम्बित-र्°, देव-र्°, उग्र-र्°, विघ्न-र्°)
a man representing Bh°, [W.]
a jackal, [L.]
a mountain, [L.]
(in music) N. of a राग
N. of a chief of शिव's host, [KālP.]
of a son of शिव by तारा-वती (wife of चन्द्र-शेखर, king of करवीर-पुर), ib.
of a नाग, [MBh.]
of a यक्ष, [Cat.]
of a hunter, [Hit.]
त्रिपाठिन्   of 2 kings and various teachers and authors (also with , दैवज्ञ, तिलक, दीक्षित, आचार्य, भट्ट and मिश्र), ib.
of a river, [L.]
भैरव  m. m. pl.N. of a partic. sect, [VP.]
भैरव  n. n. terror or the property of exciting terror, [W.]
भैरव-तन्त्र   = below.

भैरव [bhairava] a.  a. (-वी f.) [भीरोरिदम् अण्]
Terrible, frightful, horrible, formidable; वेल्लद्भैरवरुण्डमुण्डनिकरैर्वीरो विधत्ते भुवम् [U.5.6.]
Miserable.
Relating to Bhairava.
वः A form of Śiva (of which 8 kinds are enumerated).
The sentiment of terror (भयानक).
Fear, terror.
 N. N. of a musical mode (राग) calculated to excite emotions of fear or terror.
A mountain.
वी A form of the goddess Durgā. ˚चक्रम् a disc of the goddess भैरवी; प्रवृत्ते भैरवीचक्रे सर्वे वर्णा द्विजोत्तमाः । निवृत्ते भैरवीचक्रे सर्वे वर्णाः पृथक् पृथक् ॥ Utpattitantra.
 N. N. of a Rāgiṇī in the Hindu musical system.
A girl of 12 or a young girl representing the goddess Durgā at the Durgā festival.-वम् Terror, horror. -Comp.
-ईशः   an epithet of Viṣṇu (or Śiva ?); so भैरवतर्जकः.
-यातना   a sort of purificatory torment inflicted by Bhairava of Benares on those who die there, to make their spirits fit for absorption into the Supreme Spirit.

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
भैरव  mfn.  (-वः-वी-वं) Formidable, horrible, terrific.
 n.  (-वं) Horror, the property of exciting terror.
 m.  (-वः)
1. A name of ŚIVA, but more especially an inferior manifestation or form of the deity, eight of which are called by the common name Bhairava, and are severally termed ASITĀNGA, RURU, CHANDA, KRODHA, UN- MATTA, KUPATI, BHISHANA, and SANHĀRA, all alluding to terrific properties of mind or body.
2. The name of a river.
3. A musical mode; that which is calculated to excite emotion of terror.
 f.  (-वी) 1. A name or form of DURGĀ.
2. A young girl personating DURGĀ at the festival of that goddess.
3. Name of a Rāgini.
E. भीरु fear- ful, aff. अण् .

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
A name of शिव, but esp. an inferior manifestation or form, of which this is the common name for eight; viz. असितांग, रुरु, चंद, क्रोध, अन्मत्त, कुपति, भीषण, संव्हर. All these allude to terrific properties of mind or body. In the general apprehension भैरव is identified with, or very faintly distinguished from, खंडेराव. 2 A musical mode,--that which is calculated to excite emotions of terror. 3 An ear-ornament of females. भैरवाची सेवा असणें in. con. To be deaf.
bhairava a S Formidable, frightful, terrific.

 पु. 
 स्त्री. शेंदुर लावून बनविलेला पाषाणाचा देव ' अंगण वजा मोकळा जागेंत कच्च्या ओठ्यावर एक मैरव होता ' - के ३ . १० . १९४१ .
शंकराचा एक अवतार . विशेषतः असितांग , रुरु , चंड , क्रोध , उन्मत्त , कुपति ( किंवा कपाल ) भीषण आणि संहार हीं शंकराचीं आठ रुपें , मूर्ती .
( सामा . ) खंडेराव . भैरव भगवती मल्लारी मुंजा नृसिंह बनशंकरी । - दा ४ . ५ . ७ .
एक राग . ह्यांत षड्ज , कोमल ऋषभ , तीव्र गांधार , कोमल मध्यम , पंचम , कोमल धैवत , तीव्र निषाद हे स्वर लागतात . जात संपूर्ण - संपूर्ण . वादी धैवत . संवादी ऋषभ , गायनसमय प्रातःकाल . ह्याच्या अवरोहांत कोमल निषादाचा अल्प प्रयोग विवादी ह्या नात्यानें केलेला दिसतो . ह्याचे अहीर , आनंद , गुणकली , प्रभात , बंगालशिव , रामकली , सौराष्ट्र , हिजेज इ० प्रकार आहेत .
स्त्रियांचें एक कर्णभूषण . - वि . भयंकर ; भीतिप्रद ; भीषण . पापासि काळ आणि भैरव दुष्टभावा । - नरहरि , गंगाधररत्नमाला १५४ ( नवनीत पृ ४३३ ). [ सं . ]
०गुंडा  पु. ( महानु . ) मोठा दगड . नक्षत्रांचा भैरवगुंडा । केवि पाडिजे गगनीचा हुंडा । - भाए ५९४ .
०चक्र  न. भीषण परिस्थिति .
०जोगी  पु. कानफाट्या गोसावी ; हे भैरवभक्तहि असतात .
०थाट  पु. ( संगीत . ) एका थाटाचें नांव . ह्याचे पुढील सात स्वर असतात - शुद्ध षड्ज , कोमल ऋषभ , शुद्ध गांधार , शुद्ध मध्यम , शुद्ध पंचम , कोमल , धैवत , शुद्ध निषाद . फेरा , फेरी पुस्त्री . कानफाट्याची संध्याकाळची भिक्षेची फेरी . भैरवाष्टमी स्त्री . कृष्णपक्षांतील अष्टमी . [ भैरव + आष्टमी ] भैरवी स्त्री .
एक राग . ह्यांत षड्ज , कोमल ऋषभ , कोमल गांधार , कोमल मध्यम , पंचम , कोमल धैवत , कोमल निषाद हे स्वर लागतात . जाति संपूर्ण - संपूर्ण . वादी धैवत . संवादी गांधार . गानसमय दिवसाचा दुसरा प्रहर . कोणी त्यास सार्वकालिक मानितात . ह्याच्या अवरोहांत तीव्र ऋषभ विवादी या नात्यानें दिलेला दृष्टीस पडतो .
दुर्गादेवी . भैरवीचक्र - नपु . तंत्रशास्त्रापैकीं एक चक्र . यंत्र . भैरवीचक्रें बहुत केलीं । आणि सांप्रदायाहातीं ही करविलीं । - कथासा १४ . १११ . भैरवी थाट - पु . ( संगीत . ) एका थाटाचें नांव . ह्याचे पुढील सात स्वर असतात . शुद्ध षड्ज , कोमल ऋषभ , कोमल गांधार , शुद्ध मध्यम , शुद्ध पंचम , कोमल धैवत , कोमल निषाद . भैरवी यातना - स्त्री . काशीमध्यें जो मरण पावतो त्याच्या पदरीं जें पाप असतें . त्याच्या निरसनार्थ भैरवापासून जी यातना सोसावी लागते ती . भैरी - पु . भैरव नांवाचा देव

भैरव n.  एक रुद्रगण, जो वाराणसी नगरी का क्षेत्रपाल माना जाता है । एकबार विष्णु एवं ब्रह्मा अत्यंत गर्वोद्वत हो गये, एवं भगवान् शंकर का अपमान करने लगे । इस अपमान के कारण शंकर अत्यधिक क्रुद्ध हुआ, जिससे एक अतिअभयानक शिवगण की उत्पत्ति हुई । वही भैरव है । इसे निम्नलिखित नामान्तर प्राप्त थेः
भैरव n.  उत्पन्न होते ही, इसने अपने बाये हात की उँगली के नख से ब्रह्मा का पॉंचवा सिर तोड डाला, क्यों कि, ब्रह्मा के उस मुख से शिव की निंदा की गयी थी । ब्रह्मा के पॉंचवे मुख का इस प्रकार नाश करने के कारण, इसे ब्रह्महत्या का पातक लगा । उस पाप से छुटकारा पाने के लिए, शंकर ने ब्रह्मा के कपाल को हाथ में ले कर इसे भिक्षा मॉंगने के लिए कहा । उसी समय शिव ने ब्रह्महत्या नामक एक स्त्री का निर्माण किया, एवं उसे इसके पिछे जाने के लिये कहा । यह अनेक तीर्थस्थानों में घूमता रहा, किन्तु इसका ब्रह्महत्या का दोष नष्ट न हुआ । अन्त में शिव ने इसे वाराणसी क्षेत्र में जाने के लिए कहा । शिव के आदेशानुसार, यह वाराणसी क्षेत्र में गया, जिस में प्रवेश करते ही इसका ब्रह्महत्या का पातक धुल गया । पश्चात् इसके हाथ में स्थित ब्रह्मा का कपाल भी नीचे गिर पडा, एवं उसे भी मुक्ति प्राप्त हुयी । जिस स्थान पर ब्रह्मा के कपाल को मुक्ति मिली, उस स्थान पर ‘कपालमोचनतीर्थ’ नामक सुविख्यात तीर्थ का निर्माण हुआ [शिव.शत.८-९];[ स्कंद.३.१.२४]
भैरव n.  कालिका पुराण में, भैरवस्तोत्र नामक मंत्र की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है । वहॉं इसका वंश ही विस्तृत रुप में दिया गया है । उस पुराण क अनुसार, वाराणसी का सुविख्यात राजा विजय इसीके वंश में उत्पन्न हुआ था । उस राजा ने खाण्डवी नगर को उध्वस्त कर खाण्डववन का निर्माण किया था [कालि. ९२] । कालिका पुराण के अनुसार, भैरव एवं वेताल ये शिवपार्षद अपने पूर्वजन्म में महाकाल एवं भृंगी नामक शिवदूत थे । पार्वती के शाप के कारण, उन्हें अगले जन्म में मनुष्ययोनी प्राप्त हुई[कालिका.५३]; वेताल देखिये । पुराणों में अष्टभैरवों की नामावली प्राप्त है, जिसमें निम्नलिखित भैरव निर्दिष्ट हैः---असितांग, रुरु, चण्ड, क्रोध, उन्मत्त, कुपति (कपालिन्), भीषण एवं संहार ।
भैरव II. n.  धृतराष्ट्र वंश का एक नाग, जो जनमेजय के सर्पसत्र में दग्ध हुआ था [म.आ.५२.१५]

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
BHAIRAVA I   A nāga belonging to the Dhṛtarāṣṭra Vaṁśa. There is a reference to this nāga in [Mahābhārata, Ādi Parva, Chapter 51, Verse 17]. He was burnt up at the Sarpasatra performed by King Janamejaya.
BHAIRAVA II   A Pārṣada of Śiva.
1) General.
Immediately after his birth, this terrible monster subdued all the Devas without getting the permission of Śiva. Enraged at it, Śiva turned him into a tree by a curse. But Śiva was soon pacified and lifted the curse by declaring that those who offered pūjā to the gods would get the full reward for their worship only if they offered pūjā to Bhairava also. Bhairava became a tree as soon as he was cursed. He became a tree because he subdued the gods. Therefore that tree came to be called “DAMANAKA” tree (Damana = Subdue). It has another name. “TĀTIRI” tree. Even now, pious people offer pūjā to this tree. [Agni Purāṇa, Chapters 52-80].
2) Birth.
Once Brahmā and Viṣṇu became swollen with pride. In his haughty way, Brahmā insulted Śiva. Under the insult, Śiva was infuriated and out of the fire of his fury was born Bhairava with his black form. [Liṅga Purāṇa 1.90].
3) Brahmahatyā.
As soon as he was born, Bhairava rushed towards Brahmā and pinched off his fifth head which had insulted Śiva. By this, he incurred the sin of Brahmahatyā. For the expiation of this sin, as ordered by Śiva, Bhairava started on a journey to go abegging, with Brahmā's severed head in his hand. Śiva then created a woman named “Brahmahatyā” and asked her to follow Bhairava. Although Bhairava visited many holy places, he was not able to liberate himself from the sin of Brahmahatyā. At last, at the suggestion of Śiva, he went to Vārāṇasī and washed off his sin. Brahmā's head which he carried, was also deposited there and the place became famous under the name of “Kapālamocana tīrtha”. [Śiva Purāṇa, Śatarudra Saṁhitā].
4) Family.
In [Kālikā Purāṇa] there is an elaborate account of the family of Bhairava. According to this Purāṇa, Vijaya, the reputed King of Vārāṇasī was born in the family of Bhairava. [Kālikā Purāṇa] also says that Vijaya destroyed the Khāṇḍavī city and set up the Khāṇḍava forest in its place. According to Kālikā Purāṇa, Bhairava and Vetāla were, in their previous births, two Śivapārṣadas named Mahākāla and Bhṛṅgi. It was by the curse of Pārvatī. that they were born as mortals in their next birth. [Kālikā Purāṇa 53]. The Purāṇas mention eight Bhairavas called Asitāṁga, Ruru, Caṇḍa, Krodha, Unmatta, Kapāli, Bhīṣaṇa and Saṁhāra.
5) Shape.
Bhairava has a terrible shape. He wears the crescent moon and plaited hair on his head. His weapons are, sword, arrow, dagger, bow, trident, rope etc. At times he is dressed in elephant-skin. He has five faces. Serpents are his ornaments. [Agni Purāṇa, Chapters 52-80].

Aryabhushan School Dictionary | mr  en |   | 
 m  Name of शिव.
  Terrific, formidable.

Keyword Pages

: Folder : Page : Word/Phrase : Person

Related Pages

  |  
  |  
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP