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भैरव

See also BHAIRAVA I , BHAIRAVA II
A name of शिव, but esp. an inferior manifestation or form, of which this is the common name for eight; viz. असितांग, रुरु, चंद, क्रोध, अन्मत्त, कुपति, भीषण, संव्हर. All these allude to terrific properties of mind or body. In the general apprehension भैरव is identified with, or very faintly distinguished from, खंडेराव. 2 A musical mode,--that which is calculated to excite emotions of terror. 3 An ear-ornament of females. भैरवाची सेवा असणें in. con. To be deaf.
bhairava a S Formidable, frightful, terrific.
 पु. 
 स्त्री. शेंदुर लावून बनविलेला पाषाणाचा देव ' अंगण वजा मोकळा जागेंत कच्च्या ओठ्यावर एक मैरव होता ' - के ३ . १० . १९४१ .
शंकराचा एक अवतार . विशेषतः असितांग , रुरु , चंड , क्रोध , उन्मत्त , कुपति ( किंवा कपाल ) भीषण आणि संहार हीं शंकराचीं आठ रुपें , मूर्ती .
( सामा . ) खंडेराव . भैरव भगवती मल्लारी मुंजा नृसिंह बनशंकरी । - दा ४ . ५ . ७ .
एक राग . ह्यांत षड्ज , कोमल ऋषभ , तीव्र गांधार , कोमल मध्यम , पंचम , कोमल धैवत , तीव्र निषाद हे स्वर लागतात . जात संपूर्ण - संपूर्ण . वादी धैवत . संवादी ऋषभ , गायनसमय प्रातःकाल . ह्याच्या अवरोहांत कोमल निषादाचा अल्प प्रयोग विवादी ह्या नात्यानें केलेला दिसतो . ह्याचे अहीर , आनंद , गुणकली , प्रभात , बंगालशिव , रामकली , सौराष्ट्र , हिजेज इ० प्रकार आहेत .
स्त्रियांचें एक कर्णभूषण . - वि . भयंकर ; भीतिप्रद ; भीषण . पापासि काळ आणि भैरव दुष्टभावा । - नरहरि , गंगाधररत्नमाला १५४ ( नवनीत पृ ४३३ ). [ सं . ]
०गुंडा  पु. ( महानु . ) मोठा दगड . नक्षत्रांचा भैरवगुंडा । केवि पाडिजे गगनीचा हुंडा । - भाए ५९४ .
०चक्र  न. भीषण परिस्थिति .
०जोगी  पु. कानफाट्या गोसावी ; हे भैरवभक्तहि असतात .
०थाट  पु. ( संगीत . ) एका थाटाचें नांव . ह्याचे पुढील सात स्वर असतात - शुद्ध षड्ज , कोमल ऋषभ , शुद्ध गांधार , शुद्ध मध्यम , शुद्ध पंचम , कोमल , धैवत , शुद्ध निषाद . फेरा , फेरी पुस्त्री . कानफाट्याची संध्याकाळची भिक्षेची फेरी . भैरवाष्टमी स्त्री . कृष्णपक्षांतील अष्टमी . [ भैरव + आष्टमी ] भैरवी स्त्री .
एक राग . ह्यांत षड्ज , कोमल ऋषभ , कोमल गांधार , कोमल मध्यम , पंचम , कोमल धैवत , कोमल निषाद हे स्वर लागतात . जाति संपूर्ण - संपूर्ण . वादी धैवत . संवादी गांधार . गानसमय दिवसाचा दुसरा प्रहर . कोणी त्यास सार्वकालिक मानितात . ह्याच्या अवरोहांत तीव्र ऋषभ विवादी या नात्यानें दिलेला दृष्टीस पडतो .
दुर्गादेवी . भैरवीचक्र - नपु . तंत्रशास्त्रापैकीं एक चक्र . यंत्र . भैरवीचक्रें बहुत केलीं । आणि सांप्रदायाहातीं ही करविलीं । - कथासा १४ . १११ . भैरवी थाट - पु . ( संगीत . ) एका थाटाचें नांव . ह्याचे पुढील सात स्वर असतात . शुद्ध षड्ज , कोमल ऋषभ , कोमल गांधार , शुद्ध मध्यम , शुद्ध पंचम , कोमल धैवत , कोमल निषाद . भैरवी यातना - स्त्री . काशीमध्यें जो मरण पावतो त्याच्या पदरीं जें पाप असतें . त्याच्या निरसनार्थ भैरवापासून जी यातना सोसावी लागते ती . भैरी - पु . भैरव नांवाचा देव
n.  एक रुद्रगण, जो वाराणसी नगरी का क्षेत्रपाल माना जाता है । एकबार विष्णु एवं ब्रह्मा अत्यंत गर्वोद्वत हो गये, एवं भगवान् शंकर का अपमान करने लगे । इस अपमान के कारण शंकर अत्यधिक क्रुद्ध हुआ, जिससे एक अतिअभयानक शिवगण की उत्पत्ति हुई । वही भैरव है । इसे निम्नलिखित नामान्तर प्राप्त थेः
ब्रह्महत्त्या n.  उत्पन्न होते ही, इसने अपने बाये हात की उँगली के नख से ब्रह्मा का पॉंचवा सिर तोड डाला, क्यों कि, ब्रह्मा के उस मुख से शिव की निंदा की गयी थी । ब्रह्मा के पॉंचवे मुख का इस प्रकार नाश करने के कारण, इसे ब्रह्महत्या का पातक लगा । उस पाप से छुटकारा पाने के लिए, शंकर ने ब्रह्मा के कपाल को हाथ में ले कर इसे भिक्षा मॉंगने के लिए कहा । उसी समय शिव ने ब्रह्महत्या नामक एक स्त्री का निर्माण किया, एवं उसे इसके पिछे जाने के लिये कहा । यह अनेक तीर्थस्थानों में घूमता रहा, किन्तु इसका ब्रह्महत्या का दोष नष्ट न हुआ । अन्त में शिव ने इसे वाराणसी क्षेत्र में जाने के लिए कहा । शिव के आदेशानुसार, यह वाराणसी क्षेत्र में गया, जिस में प्रवेश करते ही इसका ब्रह्महत्या का पातक धुल गया । पश्चात् इसके हाथ में स्थित ब्रह्मा का कपाल भी नीचे गिर पडा, एवं उसे भी मुक्ति प्राप्त हुयी । जिस स्थान पर ब्रह्मा के कपाल को मुक्ति मिली, उस स्थान पर ‘कपालमोचनतीर्थ’ नामक सुविख्यात तीर्थ का निर्माण हुआ [शिव.शत.८-९];[ स्कंद.३.१.२४]
वंश n.  कालिका पुराण में, भैरवस्तोत्र नामक मंत्र की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है । वहॉं इसका वंश ही विस्तृत रुप में दिया गया है । उस पुराण क अनुसार, वाराणसी का सुविख्यात राजा विजय इसीके वंश में उत्पन्न हुआ था । उस राजा ने खाण्डवी नगर को उध्वस्त कर खाण्डववन का निर्माण किया था [कालि. ९२] । कालिका पुराण के अनुसार, भैरव एवं वेताल ये शिवपार्षद अपने पूर्वजन्म में महाकाल एवं भृंगी नामक शिवदूत थे । पार्वती के शाप के कारण, उन्हें अगले जन्म में मनुष्ययोनी प्राप्त हुई[कालिका.५३]; वेताल देखिये । पुराणों में अष्टभैरवों की नामावली प्राप्त है, जिसमें निम्नलिखित भैरव निर्दिष्ट हैः---असितांग, रुरु, चण्ड, क्रोध, उन्मत्त, कुपति (कपालिन्), भीषण एवं संहार ।
 m  Name of शिव.
  Terrific, formidable.
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

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