लीला गान - श्रीकृष्ण बुलावे , झूलण ...

’लीलागान’में भगवल्लीकी मनोमोहिनी मनको लुभाती है ।


श्रीकृष्ण बुलावे, झूलण चालो राधा बाग में ॥ टेर॥

झूलण चालो बाग माँयने, सज सोला सिंगार,

तरह तरह का पहर आभूषन, गल मोतियन को हार ॥१॥

मलयागिरि का बन्यो हिन्डोरो, लग्या रेशम तार,

दुरमोर बोले. पीव-पीव करे पुकार,

घन गरजे और बिजली चमके, शीतल पड़े फुवार ॥४॥

शिव सनकादिक ब्रह्मा ध्यावे, कोइय न पायो पार,

दास नारायण शरण आपकी, करियो बेड़ा पार ॥५॥

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Last Updated : January 22, 2014

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