हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|भजन|मंजुकेशीजी|
निर्मल मनको एक स्वभाव ॥ ...

भजन - निर्मल मनको एक स्वभाव ॥ ...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


निर्मल मनको एक स्वभाव ॥

परिहर सीयराम-पद-पंकज, चिंतत और न काउ ।

जस जस सकि बुंदियात बदरवा, तस-तस कोमल भाउ ॥

एकरस बरसत नेक न जानत, कौन रंक को राउ ।

'केशी' काम कलाधर चीन्हत, चपल चंद्रिका चाउ ॥

N/A

References : N/A
Last Updated : December 23, 2007

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP