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सत्यतपस्

See also :
SATYATAPAS (UTATHYA) I , SATYATAPAS II , सत्यतपस् II. , सत्यतपस् III.
n.  उतथ्य नामक ऋषि का नामान्तर। इसे ‘सत्यव्रत’ नामान्तर भी प्राप्त था । यह सदैव सत्य भाषण ही करता था, जिस कारण इसे ‘सत्यतपस्’ एवं ‘सत्यव्रत’ नाम प्राप्त हुए थे । सत्य हमेशा सापेक्ष रहता है, इस तत्त्व का प्रतिपादन करने के लिए इसकी कथा देवी भागवत में दी गयी है [दे. भा. ३.११] । यह शुरू में अत्यंत आचारहीन एवं विद्याहीन पुरुष था । किन्तु एक बार सहज ही इसके मुख से ‘ऐ’ नामक ‘सारस्वत बीजमंत्र’ का उच्चारण होने के कारण, यह ऋषि बन गया, एवं सत्यकथन की विभिन्न मर्यादा इसे ज्ञात हुई। एक बार एक व्याध एक वराह का पीछा करता हुआ इसके पास आया, एवं इससे वराह का पता पूछने लगा। इस समय अपने सत्यकथन से वराह की मृत्यु हो जायेगी, यह जान कर इस सत्यप्रतिज्ञ मुने ने मौन धारण किया ।

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