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संस्कार

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
सं-स्कार  f. m. (ifc.f(). ) putting together, forming well, making perfect, accomplishment, embellishment, adornment, purification, cleansing, making ready, preparation, dressing (of food), refining (of metals), polishing (of gems), rearing (of animals or plants), [GṛŚrS.]; [MBh.]; [Kāv., &c.]
cleansing the body, toilet, attire, [Hariv.]
forming the mind, training, education, [R.]; [Ragh.]
correction (also in an astronomical sense, [Sūryas.]), correct formation or use of a word, [Nir.]; [Sarvad.]
correctness, purity (esp. of pronunciation or expression), [MBh.]; [R.] &c.
making sacred, hallowing, consecration, [Mn.]; [MBh.] &c.
गर्भाधान   a sacred or sanctifying ceremony, one which purifies from the taint of sin contracted in the womb and leading to regeneration (12 such ceremonies are enjoined on the first three or twice-born classes in [Mn. ii, 27], viz. 1. , 2. पुं-सवन, 3. सीमन्तो-न्नयन, 4. जात-कर्मन्, 5. नामकर्मन्, 6. निष्क्रमण, 7. अन्न-प्रा-शन, 8. चूडा-कर्मन्, 9. उपनयन, 10. केशा-न्त, 11. समावर्तन, 12. विवाह, q.v.; accord. to [Gaut. viii, 8 &c.] there are 40 संस्कारs), [GṛS.]; [Mn.]; [MBh.] &c. ([IW. 188]; 192 &c., [RTL. 353])
the ceremony performed on a dead body (i.e. cremation), [R.]
any purificatory ceremony, [W.]
भावना   the faculty of memory, mental impression or recollection, impression on the mind of acts done in a former state of existence (one of the 24 qualities of the वैशेषिकs, including , ‘the faculty of reproductive imagination’), [Kaṇ.]; [Sarvad.] ([IW. 69])
(pl., with Buddhists) a mental conformation or creation of the mind (such as that of the external world, regarded by it as real, though actually non-existent, and forming the second link in the twelvefold chain of causation or the fourth of the 5 स्कन्धस्), [Dharmas. 22; 42]
a polishing stone, [MW.]

संस्कारः [saṃskārḥ]   1 Making perfect, refining, polishing; (मणिः) प्रयुक्तसंस्कार इवाधिकं बभौ [R.3.18.]
Refinement, perfection, grammatical purity (as of words); संस्कार- वत्येव गिरा मनीषी [Ku.1.28] (where Malli, renders the word by व्याकरणजन्या शुद्धिः); [R.15.76.]
Education, cultivation, training (as of the mind); निसर्ग- संस्कारविनीत इत्यसौ नृपेण चक्रे युवराजशब्दभाक् [R.3.35;] [Ku. 7.1.]
Making ready, preparation.
Cooking, dressing (as of food &c.).
Embellishment, decoration, ornament; स्वभावसुन्दरं वस्तु न संस्कारमपेक्षते [Dṛi. Ś. 49;] [Ś.7.23;] [Mu.2.1.]
Consecration, sanctification, hallowing; संस्कारो नाम स भवति यस्मिञ्जाते पदार्थो भवति योग्यः कस्यचिदर्थस्य ŚB. on [MS.3.1.3.]
Impression, form, mould, operation, influence; यन्नवे भोजने लग्नः संस्कारो नान्यथा भवेत् [H. Pr.8;] [Bh.3.84.]
Idea, notion, conception.
Any faculty or capacity.
Effect of work, merit of action; फलानुमेयाः प्रारम्भाः संस्काराः प्राक्तना इव [R.1.2.]
The self-reproductive quality, faculty of impression; one of the 24 qualities or guṇas recognised by the Vaiśeṣikas; it is of three kinds: भावना, वेग, and स्थितिस्थापकता q .q. v. v.
The faculty of recollection, impression on the memory; संस्कारमात्रजन्यं ज्ञानं स्मृतिः [T. S.]
A purificatory rite, a sacred rite or ceremony; संस्कारार्थं शरीरस्य [Ms.2.66;] [R.1.78;] (Manu [mentions 12] such Saṃskāras viz. 1. गर्भाधान, 2. पुंसवन, 3. सीमन्तोन्नयन, 4. जातकर्मन्, 5. नामकर्मन्, 6. निष्क्रमण, 7. अन्नप्राशन, 8. चूडाकर्मन्, 9. उपनयन, 1. केशान्त, 11. समावर्तन, and 12. विवाह; see [Ms.2.26] &c.; some writers increase the number to sixteen).
Purification, purity.
A rite or ceremony in general.
Investiture with the sacred thread; मांसं मूत्रं पुरीषं च प्राश्य संस्कारमर्हति [Mb.12.165.76.]
Obsequial ceremonies.
A polishing stone; संस्कारोल्लिखितो महामणिरिव क्षीणोऽपि नालक्ष्यते [Ś.6.5] (where संस्कार may mean 'polishing' also). -Comp.
-पूत   a.
purified by sacred rites.
purified by refinement or education.
-भूषणम्   (speech) adorned by correctness.
-रहित, -वर्जित, -हीन a.  a. (a person of one of the three higher castes) over whom the purificatory ceremonies, particularly the threadceremony, have not been performed and who therefore becomes a Vrātya or outcast; cf. व्रात्य.
-शब्दः   a word which gains its currency owing to संस्कार; संस्कारशब्दा एते आहवनीयादयः ŚB. on [MS.5.3.21.]

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
संस्कार  m.  (-रः)
1. Completing, accomplishing, finishing, perfecting.
2. Apprehension, conception.
3. The power of memory, the faculty of recollection.
4. Faculty in general, one of the twenty-four qualities enumerated by logicians.
5. An essential and purificatory rite or ceremony amongst the Hindus; as those of the three first classes, commencing with conception and ending with marriage; or गर्भाधानं sacrifice on conception; पुंसवनं on vitality in the fœtus; सीमन्तोन्नयनं in the fourth, sixth, or eight month; जातकर्म्म giving the infant clarified butter out of a golden spoon to taste, before divi- ding the navel string; नामकरणं naming the child on the tenth, eleventh, twelfth, or hundred and first day: निष्क्रमणं carrying him out to see the moon on the third lunar day of the third light fortnight, or to see the sun in the third or fourth month; अन्नप्राशनं feeding him with rice in the sixth or eighth month, or when he has cut teeth; चूडाकार्य्यं tonsure in the second or third year; उपनयनं investiture with the string in the fifth, eight, or sixteenth year; विवाहः or marriage is the tenth and last Sanskāra.
5. Embellish- ment, decoration, elegance.
6. Purity, perfection.
7. Preparing as an article of medicine or food, cooking, dressing, compounding, &c.
8. Purification, consecration.
9. Impression, form, mould.
E. सम् implying perfection, कृ to make, अण् aff. and सुट् augment.

A dictionary, Marathi and English | mr  en |   | 
complete and perfect. 5 Any operation or action upon: also any change or abiding effect accomplished upon.

 पु. १ हिंदु धर्मांतील कांहीं विशिष्टा आवश्यक विधि . हे त्रैवर्णिकांकरितां आवश्यक मानतात . हे सोळा प्रमुख मानतात पण त्यांचीं नांवें निरनिराळीं आढळतात . उदा० गर्भाधान , पुंसवन , अनवलोभन , विष्णुबलि , सीमंतोन्नयन , जातकर्म , नामकरण , निष्क्रमण , सूर्यावलोकन , अन्नप्राशन , चूडाकर्म , उपनयन , महानाम्नी , समावर्तन , विवाह , और्ध्वदेहिक . विदेशी मेले मरणें । तयास संस्कार देणें । - दा २ . ७ . ७७ . २ शुध्दिकरण ; पवित्र करणें ; कोणत्याहि गोष्टीच्या शुध्दीकरतां करावयाचा विधि ; दोषापकर व गुणजनन . - केसरी २४ . १ . ३६ . ३ तयार करण्याची कृति ; क्रिया ; परिपाक ( स्वयंपाक , औषधि , रसायन वगैरे पचन , भाजणें , चूर्ण करणें , पुट देणें , भावना देणें वगैरे क्रियांनी ). ४ उजळा देणें ; पूर्ण करणें ; साफ करणें ; विशदीकरण करणें ( क्रिया , वस्तु वगैरे ). ५ रूपांतर , बदल , नवीन विशेष छाप , ठसा ( उठणें ); कार्य , परिणाम ( दिसणें ). [ सं . सम् ‍ + कृ ]
०रहित   विरहित - वि . ज्याचे संस्कार झाले नाहींत असा . संस्कारणें - क्रि . संस्कार करणें ; क्रिया , कार्य करणें . संस्कर्ता - पु . संस्कार करणारा . संस्कार्य - वि . ज्याचा संस्कार करावयाचा आहे तो ; संस्कार करण्या योग्य . संस्कारित - धावि . संस्कार झालेला . संस्कृत - स्त्रीन . गीर्वाण भाषा ; व्याकरणनियमांनीं बध्द अशी भाषा . - धावि . १ ज्यावर संस्कार , कृति , क्रिया घडली आहे असा . २ शुध्दीकृत ; पक्व . ३ अलंकृत ; व्याकरणशुध्द ; उजळा दिलेलें ; विद्वत्तापूर्ण . संस्कृति - स्त्री . १ संस्कार ; क्रिया ; पूर्वत्व . २ मनुष्यांचे जाति अथवा राष्ट्रस्वरूपी जे संघ त्यांचें भाषा , शास्त्रज्ञानादि रूपानें व्यक्त होणारें चरित्र . ज्ञातिराष्ट्रादि संघानां साकल्यं चरितम् ‍ । मानवी जातीची वौध्दिक , धार्मिक , नैतिक , सामाजिक , सुधारलेली स्थिति .

Aryabhushan School Dictionary | mr  en |   | 
 m  A rite, ceremony. An operation. Polishing.

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  • पूजा एवं विधी
    ईश्वर की कॄपा तथा दया प्राप्त करनेके लिए नित्य पूजा विधी करनी चाहिये, क्योंकी पूजा का अध्यात्म तथा धर्म से गहरा संबंध है । 
  • पूजा विधी - प्रकार १
    ईश्वर की कॄपा तथा दया प्राप्त करनेके लिए नित्य पूजा विधी करनी चाहिये, क्योंकी पूजा का अध्यात्म तथा धर्म से गहरा संबंध है ।
  • पूजा विधी
    ईश्वर की कॄपा तथा दया प्राप्त करनेके लिए नित्य पूजा विधी करनी चाहिये, क्योंकी पूजा का अध्यात्म तथा धर्म से गहरा संबंध है ।
  • गर्भाधान संस्कार
    इस सृष्टि में उत्पन्न किसी वस्तु को, मनुष्य प्राणी भी, उत्तम स्थिती में लाने का वा करने का अर्थ ’संस्कार’ है।
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