Dictionaries | References

रुखा भोजन, कर्ज शीर, और कल हलेली नार। चौथे मैले कपडे, या नरक निशाणी चार॥

( हिं.) रुक्ष भोजन, कर्ज, भांडखोर बायको व मळके कपडे या चार गोष्टी नरकाचीं चिन्हें होत.

Related Words

नार   कर्ज ओढणें   चार खुंट जहागीर   चार दीस मांयचे, चार दीस सुनेचे   उद्योग कर्ज वारतो, निरुद्योग कर्ज वाढवितो   जिवाचे चार चार करणें   द्रव्यवान्‌ कर्ज मागती, सर्व नेऊन देती   शीर काढणें   गडमें गड चितोडगड और सब गढैया है, तालमें ताल भोपालताल और सब तलैंया है   कर्ज मागतांच देतो, तो सरळ असून सुज्ञ नसतो   चोराची मौज चार दिवस, छिनालीची आठवडा   शीर उचलणें   निशाणी होणें   आँखे होते चार, दिलमें आया पियार   नरक तोंडांत सांठविणें   चार दृष्टि होणें   कर्ज लागणें   या बोटाचा थुंका त्या बोटावर   उखळांत शीर देणें   उखळांत शीर घालणें   खानेके दांत और, देखनेके और   तेली खसम करना, और रुखा खाना   आपनी और निभाय, वांकी वही जाने   नरक अंगावर घेणें   शीर सलामत तों पगडया पचीस   न खादी नार नी पायलीचा आहार   कनवटीं नाहीं पैसा आणि लोकांना म्‍हणतो या बसा   या हाताचा झाडा त्या हातावर देणें   आपलीं पापें आणि कर्ज, मनीं अधिक समज   मुंगीला पंख फुटलें म्हणजे मरायची निशाणी   आज है सो कल नही   शीर सलामत तर पगडया पंचाऐशीं   बर्‍या गेल्यार कल खोडी   घीणो पैसो और पैसोनी घी   पानी पिना छानके, और गुरुअ करना जानके   चार युगें   सहज जाईन कुंपांत, चार आणे सुपांत   सोनेका निवाला खिलाना, और शेरके नजरोसें देखना   चार स्‍थानें   कान आणि डोळे यांत चार बोटांचे अंतर   चार दिनकी चांदनी, फेर अंधयरा पांख   चार मुक्ति   दोन तोबे खाऊंगा और एक मेंढी लेउंगा   उपरका घडभाई, और निचेको अल खुदाई   घरमें नही बास, और नाम दुर्गादास   कुत्तेकू खीर और गद्धेकू चपात्‍या (नही पचती)   नानक (कहे) नन्हे होईजे जैसी दूब, और घांस जर जात है दूब खूब की खूब   खोटा पैसा गांठका और नकटा बेटा पेटका   विद्वानोको शिंग नहीं, और मुर्खको पुच्छ नहीं   सहज गेलें वाडग्यांतः चार पैसे गाडग्यांत   
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

Search results

No pages matched!

Related Pages

  |  
  |  
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP