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उतथ्य

See also :
UTATHYA I , UTATHYA II , उतथ्य II.
n.  अंगिरस का पुत्र । इसकी माता का नाम स्वराज्‍ । इसका श्रद्धा नाम भी मिलता है । परशुराम द्वारा पृथ्वी निःक्षत्रिय करने के पश्चात्, इसने क्षत्रियों का पुनःरुत्थान किया । इसकी भार्या ममता । इसका कनिष्ठ भ्राता बृहस्पति, देवताओं का पुरोहित था । बृहस्पति के ममता से बलात् संभोग समय पर, ममता ने अपने देवर बृहस्पति से कहा “मैं गर्भवती हूँ।" तब कामातुर बृहस्पति आपेसे बाहर हो गया । संभोग के लिये गर्भ का भी विरोध देख कर उसने गर्भ को अन्धा होने का शाप दिया । वह दीर्घतमा औतथ्य हो गया [म.आ.९८.५-१६];[ शां. ३२८] । इसकी एक और पत्नी सोमकन्या भद्रा थी । वरुण ने उसका अपहरण किया, तब इसने समुद्रशोषण किया तथा समुद्र को मरुस्थल में परिणत कर दिया । सरस्वती नदी को जलरहित तथा अदृश्य कर दिया । अन्त में समुद्र ने उचथ्य को भद्रा लौटा दी [म.अनु.२५९.९-३२ कुं.] । उतथ्य तथा उचथ्य इसके पाठभेद है । मांधता के साथ इसका क्षात्रधर्म विषय पर संवाद हुआ था [म.शां.९१] । जो उतथ्यगीता नामसे प्रसिद्ध है । इसका पुत्र शरद्वत् । (सत्यतपस् देखिये) ।

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