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उतथ्य

A Sanskrit English Dictionary | sa  en |   | 
उतथ्य  m. m.N. of a son of अङ्गिरस् and elder brother of बृहस्पति, [MBh.]; [VP. &c.]

उतथ्यः [utathyḥ]  N. N. of a son of Aṅgiras and elder brother of Bṛihaspati. -Comp.
-अनुजः, -अनुजन्मन्  m. m. Bṛihaspati, teacher of the gods; तथ्यमुतथ्यानुजवज्जगादाग्रे गदा- ग्रजम् [Śi.2.69.]
-तनयः  N. N. of Gautama. शूद्रावेदी पतत्यत्रेरुत- थ्थतनयस्य च । [Ms.3.16.]

Shabda-Sagara | sa  en |   | 
उतथ्य  m.  (-थ्यः) The name of a Muni, son of ANGIRAS.

उतथ्य n.  अंगिरस का पुत्र । इसकी माता का नाम स्वराज्‍ । इसका श्रद्धा नाम भी मिलता है । परशुराम द्वारा पृथ्वी निःक्षत्रिय करने के पश्चात्, इसने क्षत्रियों का पुनःरुत्थान किया । इसकी भार्या ममता । इसका कनिष्ठ भ्राता बृहस्पति, देवताओं का पुरोहित था । बृहस्पति के ममता से बलात् संभोग समय पर, ममता ने अपने देवर बृहस्पति से कहा “मैं गर्भवती हूँ।" तब कामातुर बृहस्पति आपेसे बाहर हो गया । संभोग के लिये गर्भ का भी विरोध देख कर उसने गर्भ को अन्धा होने का शाप दिया । वह दीर्घतमा औतथ्य हो गया [म.आ.९८.५-१६];[ शां. ३२८] । इसकी एक और पत्नी सोमकन्या भद्रा थी । वरुण ने उसका अपहरण किया, तब इसने समुद्रशोषण किया तथा समुद्र को मरुस्थल में परिणत कर दिया । सरस्वती नदी को जलरहित तथा अदृश्य कर दिया । अन्त में समुद्र ने उचथ्य को भद्रा लौटा दी [म.अनु.२५९.९-३२ कुं.] । उतथ्य तथा उचथ्य इसके पाठभेद है । मांधता के साथ इसका क्षात्रधर्म विषय पर संवाद हुआ था [म.शां.९१] । जो उतथ्यगीता नामसे प्रसिद्ध है । इसका पुत्र शरद्वत् । (सत्यतपस् देखिये) ।
उतथ्य II. n.  शिवावतार गुहावासिन् का शिष्य ।

Puranic Encyclopaedia  | en  en |   | 
UTATHYA I   
1) General.
Son of sage A giras. [M.B. Ādi Parva, Chapter 66, Verse 5]. He gave advice on subjects of statecraft to King Māndhātā. [M.B. Śānti Parva, Chapter 90]. He married Soma's daughter Bhadrā. [M.B. Anuśāsana Parva, Chapter 154, Verse 12].
2) Utathya drank up the sea dry.
Varuṇa deva had an eye on Soma's daughter Bhadrā when Utathya married her. Incensed at the marriage, Varuṇa carried Bhadrā off to the sea one day when Utathya was not present. Nārada informed Utathya that it was Varuṇa who stole his wife. Though Nārada, at the request of Utathya, asked Varuṇa to return Bhadrā to the former he did not oblige. Enraged at this Utathya drank up the sea dry. Yet, Varuṇa did not come round. Then Utathya rendered all the lakes of Varuṇa dry. Trembling at this Varuṇa returned Bhadrā to Utathya and prostrated at his feet. He pardoned Varuṇa and gave back the sea to him. [M.B. Anuśāsana Parva, Chapter 154].
UTATHYA II   The muni Satyatapas. (See under Satyatapas.)

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